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नकली की खाद की तरह ही चंदौसी में बनाई जा रही नकली खल
Updated Fri, 02 Nov 2018 12:36 AM IST
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चंदौसी। नकली खाद की तरह ही चंदौसी में नकली खल तैयार की जा रही है। यह दुधारू पशुओं को बेहद घातक है। इससे पशु बीमार होकर मर रहे हैं। प्रशासन अंजान बना है। जबकि शहर में दर्जन भर स्थानों पर नकली खल के कारखाने संचालित हैं।
पशुपालक पशुओं के सेहत व अधिक दूध देने के लिए अपने पशुओं को खल खिलाना बेहतर समझते हैं। अगर सतर्कता नहीं बरती तो यही खल उनके पशुओं के लिए जहर का काम भी कर सकती है। क्योंकि शहर में नकली खल का धंधा खूब फल फूल रहा है। इससे किसान व पशुपालक बढ़िया खल समझकर नकली खल खरीद रहे हैं। इस अवैध कारोबार से यह कारोबारी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। घटिया सामग्री, रसायनिक पदार्थ समेत हानिकारक तत्वों का प्रयोग कर दुधारू पशुओं के लिए जहर देने का काम कर रहे हैं। इस खपत शहर के अलावा आसपास जनपदों व राजस्थान व मध्य प्रदेश में भी हो रही है। शहर में अलावा बहजोई में ऊंचे स्तर पर यह कारोबार संचालित है। चंदौसी में दर्जन भर स्थानों पर इस नकली खाद के कारखाने संचालित है। इसका खामियाजा पशु पालक व पशुओं को उठाना पड़ रहा है। हालांकि शहर में वास्तविक खल विक्रेताओं की संख्या भी कम नहीं है लेकिन नकली खल बनाने वालों के कारण असली खल विक्रेता भी बदनाम हो रहे हैं। उपजिलाधिकारी महेश प्रसाद दीक्षित ने बताया कि जानकारी में यह बात नहीं है। अब मामला संज्ञान में आया है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभाग को सतर्क किया जाएगा।
नकली खल तैयार कर कमाया जाता मोटा मुनाफा
चंदौसी। नकली खल के कारोबारियों ने इसके लिए बाकायदा कारखाने संचालित हैं। यहां बिजली का कनेक्शन के साथ बड़े जनरेटर लगे हैं। एक, दो एक्पेलर भी लगे हैं। वहां पर नकली खल बनाई जाती है। इसमें 75 प्रतिशत धान की भूसी, सड़ी गली फफूंदी वाली नमकीन व बिस्किट, 25 चिकनी मिट्टी व रसायनिक पदार्थ मिलाकर खल बना रहे हैं। इसमें खल का कोई अता-पता नहीं होता है। जानकारों की माने तो असली खल की बोरी 60 किलोग्राम की होती है 1270 में मिलती है। जबकि नकली खल की बोरी इससे काफी सस्ते में आसानी से मिल जाती है। इस लिए पशुपालक सत्तर रुपये के चक्कर में इसे अधिक खरीदते है। नकली खर की बोरी पर कारोबारियों को करी तीन सौ से चार सौ रुपये मिल जाते है। इस तरह वह मोटा मुनाफा कमा रहे।
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पशुपालक पशुओं के सेहत व अधिक दूध देने के लिए अपने पशुओं को खल खिलाना बेहतर समझते हैं। अगर सतर्कता नहीं बरती तो यही खल उनके पशुओं के लिए जहर का काम भी कर सकती है। क्योंकि शहर में नकली खल का धंधा खूब फल फूल रहा है। इससे किसान व पशुपालक बढ़िया खल समझकर नकली खल खरीद रहे हैं। इस अवैध कारोबार से यह कारोबारी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। घटिया सामग्री, रसायनिक पदार्थ समेत हानिकारक तत्वों का प्रयोग कर दुधारू पशुओं के लिए जहर देने का काम कर रहे हैं। इस खपत शहर के अलावा आसपास जनपदों व राजस्थान व मध्य प्रदेश में भी हो रही है। शहर में अलावा बहजोई में ऊंचे स्तर पर यह कारोबार संचालित है। चंदौसी में दर्जन भर स्थानों पर इस नकली खाद के कारखाने संचालित है। इसका खामियाजा पशु पालक व पशुओं को उठाना पड़ रहा है। हालांकि शहर में वास्तविक खल विक्रेताओं की संख्या भी कम नहीं है लेकिन नकली खल बनाने वालों के कारण असली खल विक्रेता भी बदनाम हो रहे हैं। उपजिलाधिकारी महेश प्रसाद दीक्षित ने बताया कि जानकारी में यह बात नहीं है। अब मामला संज्ञान में आया है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभाग को सतर्क किया जाएगा।
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नकली खल तैयार कर कमाया जाता मोटा मुनाफा
चंदौसी। नकली खल के कारोबारियों ने इसके लिए बाकायदा कारखाने संचालित हैं। यहां बिजली का कनेक्शन के साथ बड़े जनरेटर लगे हैं। एक, दो एक्पेलर भी लगे हैं। वहां पर नकली खल बनाई जाती है। इसमें 75 प्रतिशत धान की भूसी, सड़ी गली फफूंदी वाली नमकीन व बिस्किट, 25 चिकनी मिट्टी व रसायनिक पदार्थ मिलाकर खल बना रहे हैं। इसमें खल का कोई अता-पता नहीं होता है। जानकारों की माने तो असली खल की बोरी 60 किलोग्राम की होती है 1270 में मिलती है। जबकि नकली खल की बोरी इससे काफी सस्ते में आसानी से मिल जाती है। इस लिए पशुपालक सत्तर रुपये के चक्कर में इसे अधिक खरीदते है। नकली खर की बोरी पर कारोबारियों को करी तीन सौ से चार सौ रुपये मिल जाते है। इस तरह वह मोटा मुनाफा कमा रहे।
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