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डूबे पुल से जान जोखिम में डालकर आने जाने को मजबूर लोग
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:47 AM IST
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टांडा। बारिश रुकने के तीन दिन बाद भी नदी का जलस्तर नहीं घटा। पिछले दिनों लगातार कई दिनों तक पहाड़ों पर हुई बारिश से बहाल्ला नदी का जल स्तर अभी भी बढ़ा हुआ है। जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के गांव लोहर्रा के पास नदी पर बना पुल नदी में डूबा है। नदी पर बने पुल डूबने से करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है। ऐसे में इन क्षेत्रों के लोगों को आने जाने में भारी परेशानी हो रही है। वहीं प्रशासन द्वारा कोई सुध नहीं लेने से ग्रामीणों मे आक्रोश है।
पहाड़ों और मैदान में हुई बारिश से बहाल्ला नदी का जलस्तर बढ़ गया।
जिससे तहसील क्षेत्र के दो दर्जन अधिक गांवों खेतों की फसल पानी में डूबने से खराब हो गई। बढ़े जलस्तर से गांव लोहर्रा फार्म के पास बहाल्ला नदी पर बना पुल अभी भी डूबा हुआ है। नदी पर बना पुल डूबने से डेढ़ दर्जन से अधिक गांव का संपर्क मार्ग समाप्त हो गया है। क्षेत्र के गांवों में आने जाने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से लोग जान जोखिम में डाल नदी में डूबे पुल से गुजरने को मजबूर हैं।
बहाल्ला नदी के पास बसे गांव चक लोहर्रा मिलक, लोहर्रा टांडा, भाऊपरा, मेवला फार्म, मेवला कला, मेवला धारू, नागलिया, चक खारदिया, परसूपुरा, देवी पुरा, लाडपुर बीवी आदि नदी के निकटवर्ती गांव के लोग जलस्तर बढ़ने से चिंतित हैं। उनका जन जीवन भी प्रभावित हो रहा है। डूबे पुल से जान जोखिम में डालकर आने जाने को मजबूर लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।
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पहाड़ों और मैदान में हुई बारिश से बहाल्ला नदी का जलस्तर बढ़ गया।
जिससे तहसील क्षेत्र के दो दर्जन अधिक गांवों खेतों की फसल पानी में डूबने से खराब हो गई। बढ़े जलस्तर से गांव लोहर्रा फार्म के पास बहाल्ला नदी पर बना पुल अभी भी डूबा हुआ है। नदी पर बना पुल डूबने से डेढ़ दर्जन से अधिक गांव का संपर्क मार्ग समाप्त हो गया है। क्षेत्र के गांवों में आने जाने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से लोग जान जोखिम में डाल नदी में डूबे पुल से गुजरने को मजबूर हैं।
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बहाल्ला नदी के पास बसे गांव चक लोहर्रा मिलक, लोहर्रा टांडा, भाऊपरा, मेवला फार्म, मेवला कला, मेवला धारू, नागलिया, चक खारदिया, परसूपुरा, देवी पुरा, लाडपुर बीवी आदि नदी के निकटवर्ती गांव के लोग जलस्तर बढ़ने से चिंतित हैं। उनका जन जीवन भी प्रभावित हो रहा है। डूबे पुल से जान जोखिम में डालकर आने जाने को मजबूर लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।
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