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मक्का की फसल में किसान के हाथ नहीं आ रही लागत
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:00 AM IST
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चंदौसी। गन्ने का भुगतान नहीं मिलने, पर्चियां मिलने की दिक्कतों आदि को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने मक्का को गन्ने के विकल्प के रूप में अपनाया था लेकिन इस बार मक्के की फसल ने किसानों को धोखा दे दिया है। किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। भले ही सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 1700 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, लेकिन मंडियों में मक्का एक हजार रुपये से 1100 रुपये प्रति क्विंटल तक ही खरीदा जा रहा है।
पिछले सालों में गन्ने की खेती से ऊब चुके किसानों ने मक्का को अपनाया। शायद यह सोचकर कि उसे फसल का अच्छा भाव मिल जाएगा। लेकिन फसल होते ही किसानों को नुकसान होने लगा। फसल में लगाई रकम की भरपाई भी किसान नहीं कर पा रहे हैं। किसान अर्पित मेहरोत्रा ने बताया कि उन्होंने अपने दस बीघा खेत में 2200 रुपये जुताई, 4000 रुपये का बीज, 2500 रुपये बीज लगवाई, 7000 रुपये का पानी, 700 रुपये की खाद, 2200 रुपये पोटेशियम डाया फास्फेट, 2000 की मजदूरी, 500 रुपये मशीन, 2800 रुपये सिंचाई लेबर, 600 रुपये कीटनाशक, 400 रुपये मंडी खर्च आया। कुल 24500 रुपये का व्यय हुआ। दस बीघे में सात क्विंटल मक्का का उत्पादन हुआ। जिसकी कीमत 5280 रुपये मिली। यानी कुल घाटा 19620 रुपये हुआ। जब किसान फसल मंडी लेकर पहुंच रहा है तो भाव सुनकर पसीने आ रहे है। मंडी में मक्का 800 रुपये से 1100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसान को मक्का की फसल कर पछतावा हो रहा है। हालांकि सरकार ने मक्का का न्यूनतम मूल्य 1700 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। लेकिन इसका लाभ अभी किसान को नहीं मिल रहा है।
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-मक्का की फसल करके पछतावा हो रहा है। लागत हाथ नहीं आई। इसमें किसान की मेहनत बेकार गई। इस बार फसल में घर से पैसे लगाने पड़े हैं।
-अर्पित मेहरोत्रा मक्का किसान प्रहलादपुर
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- मक्का की खेती में इस बार किसान को खासा नुकसान उठाना पड़ा है। लागत अधिक है और पैदावार कम है। इसके बाद फसल का भाव नहीं मिल सका। समर्थन मूल्य से किसान का कुछ भला होने वाला नहीं है।
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-विकास कुमार सिंह किसान काजी बेहटा
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पिछले सालों में गन्ने की खेती से ऊब चुके किसानों ने मक्का को अपनाया। शायद यह सोचकर कि उसे फसल का अच्छा भाव मिल जाएगा। लेकिन फसल होते ही किसानों को नुकसान होने लगा। फसल में लगाई रकम की भरपाई भी किसान नहीं कर पा रहे हैं। किसान अर्पित मेहरोत्रा ने बताया कि उन्होंने अपने दस बीघा खेत में 2200 रुपये जुताई, 4000 रुपये का बीज, 2500 रुपये बीज लगवाई, 7000 रुपये का पानी, 700 रुपये की खाद, 2200 रुपये पोटेशियम डाया फास्फेट, 2000 की मजदूरी, 500 रुपये मशीन, 2800 रुपये सिंचाई लेबर, 600 रुपये कीटनाशक, 400 रुपये मंडी खर्च आया। कुल 24500 रुपये का व्यय हुआ। दस बीघे में सात क्विंटल मक्का का उत्पादन हुआ। जिसकी कीमत 5280 रुपये मिली। यानी कुल घाटा 19620 रुपये हुआ। जब किसान फसल मंडी लेकर पहुंच रहा है तो भाव सुनकर पसीने आ रहे है। मंडी में मक्का 800 रुपये से 1100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसान को मक्का की फसल कर पछतावा हो रहा है। हालांकि सरकार ने मक्का का न्यूनतम मूल्य 1700 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। लेकिन इसका लाभ अभी किसान को नहीं मिल रहा है।
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-मक्का की फसल करके पछतावा हो रहा है। लागत हाथ नहीं आई। इसमें किसान की मेहनत बेकार गई। इस बार फसल में घर से पैसे लगाने पड़े हैं।
-अर्पित मेहरोत्रा मक्का किसान प्रहलादपुर
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- मक्का की खेती में इस बार किसान को खासा नुकसान उठाना पड़ा है। लागत अधिक है और पैदावार कम है। इसके बाद फसल का भाव नहीं मिल सका। समर्थन मूल्य से किसान का कुछ भला होने वाला नहीं है।
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-विकास कुमार सिंह किसान काजी बेहटा
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