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जंगे आजादी-
Updated Thu, 10 Aug 2017 12:49 AM IST
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बच्चों के हाथों में तिरंगा, जुबां पर थे आजादी के तराने
चंदौसी (संभल)। आजादी के परवाने किसी खास वर्ग और जाति के नहीं थे। हर उम्र और वर्ग के व्यक्ति आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। किसी भी कीमत पर केवल देश को आजाद करने की तमन्ना। बड़े-बुजुर्ग रणनीति बनाते थे। नौजवान आंदोलन की धार तेज करने के लिए प्रदर्शन करते थे। बच्चे आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव- गांव जनजागरण की कमान संभालते थे।
नगर चंदौसी के स्टेशन रोड स्थित आनंद कालोनी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक विद्यासागर गुप्त (90) ने आजादी के लिए संघर्ष की धुंधली यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के जुल्म से परेशान लोगों में अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फेंकने की इच्छा बलवती हुई। महात्मा गांधी ने आजादी की अलख जगाई और अहिंसा का पालन करते हुए अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। आंदोलन की शुरुआत में क्रांतिकारी शामिल हुए। धीरे- धीरे आंदोलन व्यापक स्तर पर फैल गया। शहरों से गांवों तक आंदोलन जोर पकड़ने लगा। हर उम्र वर्ग के व्यक्तियों ने आंदोलन में प्रतिभाग करना शुरू कर दिया। आंदोलन को व्यापक रूप लेते देख अंग्रेजी हुकूमत बौखला गई। ग्रामीण क्षेत्र को आंदोलन से अलग- थलग करने के लिए गांवों को आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों को प्रताड़ित किया गया। अंग्रेजी हुकूमत का यह प्रयास आंदोलन को और तेज धार दे गया। अंग्रेजी सरकार के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ गया। गांव- गांव बच्चे हाथ में तिरंगा लेकर आजादी के तराने गाते हुए लोगों केे असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए रैलियां निकालते थे। बच्चों की टोलियां लोगों को आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित करती थीं।
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चंदौसी (संभल)। आजादी के परवाने किसी खास वर्ग और जाति के नहीं थे। हर उम्र और वर्ग के व्यक्ति आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। किसी भी कीमत पर केवल देश को आजाद करने की तमन्ना। बड़े-बुजुर्ग रणनीति बनाते थे। नौजवान आंदोलन की धार तेज करने के लिए प्रदर्शन करते थे। बच्चे आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव- गांव जनजागरण की कमान संभालते थे।
नगर चंदौसी के स्टेशन रोड स्थित आनंद कालोनी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक विद्यासागर गुप्त (90) ने आजादी के लिए संघर्ष की धुंधली यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के जुल्म से परेशान लोगों में अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फेंकने की इच्छा बलवती हुई। महात्मा गांधी ने आजादी की अलख जगाई और अहिंसा का पालन करते हुए अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। आंदोलन की शुरुआत में क्रांतिकारी शामिल हुए। धीरे- धीरे आंदोलन व्यापक स्तर पर फैल गया। शहरों से गांवों तक आंदोलन जोर पकड़ने लगा। हर उम्र वर्ग के व्यक्तियों ने आंदोलन में प्रतिभाग करना शुरू कर दिया। आंदोलन को व्यापक रूप लेते देख अंग्रेजी हुकूमत बौखला गई। ग्रामीण क्षेत्र को आंदोलन से अलग- थलग करने के लिए गांवों को आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों को प्रताड़ित किया गया। अंग्रेजी हुकूमत का यह प्रयास आंदोलन को और तेज धार दे गया। अंग्रेजी सरकार के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ गया। गांव- गांव बच्चे हाथ में तिरंगा लेकर आजादी के तराने गाते हुए लोगों केे असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए रैलियां निकालते थे। बच्चों की टोलियां लोगों को आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित करती थीं।
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