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महंगाई की मार से अभिभावक लाचार
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मुरादाबाद। अप्रैल आने के साथ ही नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। परिजन बच्चों के प्रवेश, किताब और ड्रेस आदि खरीदने में व्यस्त हो गए हैं। अभी होली का त्योहार व मार्च माह के अन्य खर्चों से निपटे परिजनों के लिए बच्चों की महंगी पढ़ाई चिंता बढ़ा रही है। वह स्कूल और दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
मध्यवर्ग के परिवार के लिए पब्लिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। मनमानी फीस और एडमीशन शुल्क की मार के बाद अब स्टेशनरी और यूनिफार्म की खरीदारी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। इसके कारण परिवारों का बजट भी लड़खड़ा रहा है। गत वर्ष की अपेक्षा इस बार टिफिन बॉक्स, स्कूल बैग, पानी की बोतल, ड्राइंग बोर्ड, फाउंटेन पेन, कलश ब्रुश आदि की कीमत में करीब दस फीसदी की वृद्धि हुई है। कापियां और उन पर चढ़ने वाली जिल्द के दाम बढ़ने से पूरा सैट खरीदने में चार सौ से पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी आ रही है, जबकि किताबों में अलग से पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी है। स्थिति यह है कि कक्षा दो और तीन के बच्चों की किताबें कक्षा दस के बच्चों की किताबों से महंगी हो गई हैं। यूनिफार्म पर भी महंगाई की मार है। गत वर्ष की अपेक्षा एक जोड़ी यूनिफार्म सौ रुपये तक महंगी हो गई है। जूता भी अब साढ़े तीन सौ रुपये तक का हो गया है।
यूनिफार्म की बढ़ी कीमतें
यूनीफार्म 2018 2019
शर्ट 260 300
पेंट 270 320
टाई 75 85
जूता 300 350
मौजे 50 100
बेल्ट 100 120
वर्जन...
अपने बच्चे का प्ले ग्रुप में एडमीशन करवाया है। प्रवेश शुल्क 15 हजार रुपये है, जबकि किताबें और यूनीफार्म अलग से खरीदी है। पूरा खर्चा करीब 20 हजार रुपये का आया है। त्योहार के समय भी खर्चा हुआ था। परिवार का बजट बनाना मुश्किल हो रहा है।
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आरती।
स्कूलों ने अपनी फीस बढ़ा दी है और अब किताब व यूनीफार्म के बढ़े दामों से घर चलाना मुश्किल हो गया है। पिछले तीन माह से बजट में कटौती कर रहे थे, ताकि एडमीशन के समय ज्यादा जूझना नहीं पड़े। कक्षा दो में एडमीशन के 35 हजार रुपये खर्च हुए हैं।
रेखा देवी।
कक्षा एक दो हजार से 25 सौ का है। कागज 25 से 30 फीसदी का रेट बढ़ा है। पब्लिशर ने दस फीसदी के दाम बढ़ाए हैं। एनसीआरटी कक्षा छह, सात आठ का गणित, कक्षा दस की अंग्रेजी की किताब नहीं है। हमने पहले ही अंग्रेजी की दो हजार किताबें उठा ली थीं, इसलिए बेच पा रहे हैं।
संतोष किंगर, पुस्तक विक्रेता।
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मध्यवर्ग के परिवार के लिए पब्लिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। मनमानी फीस और एडमीशन शुल्क की मार के बाद अब स्टेशनरी और यूनिफार्म की खरीदारी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। इसके कारण परिवारों का बजट भी लड़खड़ा रहा है। गत वर्ष की अपेक्षा इस बार टिफिन बॉक्स, स्कूल बैग, पानी की बोतल, ड्राइंग बोर्ड, फाउंटेन पेन, कलश ब्रुश आदि की कीमत में करीब दस फीसदी की वृद्धि हुई है। कापियां और उन पर चढ़ने वाली जिल्द के दाम बढ़ने से पूरा सैट खरीदने में चार सौ से पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी आ रही है, जबकि किताबों में अलग से पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी है। स्थिति यह है कि कक्षा दो और तीन के बच्चों की किताबें कक्षा दस के बच्चों की किताबों से महंगी हो गई हैं। यूनिफार्म पर भी महंगाई की मार है। गत वर्ष की अपेक्षा एक जोड़ी यूनिफार्म सौ रुपये तक महंगी हो गई है। जूता भी अब साढ़े तीन सौ रुपये तक का हो गया है।
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यूनिफार्म की बढ़ी कीमतें
यूनीफार्म 2018 2019
शर्ट 260 300
पेंट 270 320
टाई 75 85
जूता 300 350
मौजे 50 100
बेल्ट 100 120
वर्जन...
अपने बच्चे का प्ले ग्रुप में एडमीशन करवाया है। प्रवेश शुल्क 15 हजार रुपये है, जबकि किताबें और यूनीफार्म अलग से खरीदी है। पूरा खर्चा करीब 20 हजार रुपये का आया है। त्योहार के समय भी खर्चा हुआ था। परिवार का बजट बनाना मुश्किल हो रहा है।
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आरती।
स्कूलों ने अपनी फीस बढ़ा दी है और अब किताब व यूनीफार्म के बढ़े दामों से घर चलाना मुश्किल हो गया है। पिछले तीन माह से बजट में कटौती कर रहे थे, ताकि एडमीशन के समय ज्यादा जूझना नहीं पड़े। कक्षा दो में एडमीशन के 35 हजार रुपये खर्च हुए हैं।
रेखा देवी।
कक्षा एक दो हजार से 25 सौ का है। कागज 25 से 30 फीसदी का रेट बढ़ा है। पब्लिशर ने दस फीसदी के दाम बढ़ाए हैं। एनसीआरटी कक्षा छह, सात आठ का गणित, कक्षा दस की अंग्रेजी की किताब नहीं है। हमने पहले ही अंग्रेजी की दो हजार किताबें उठा ली थीं, इसलिए बेच पा रहे हैं।
संतोष किंगर, पुस्तक विक्रेता।