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वाह्य परीक्षकों के चक्कर में फंसे प्रयोगात्मक अंक
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मुरादाबाद।
एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय की व्यावसायिक परीक्षाओं को समाप्त हुए करीब एक माह का समय बीत गया है, लेकिन कालेजों की ओर से अभी तक विवि को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक मुहैया नहीं कराए जा सके हैं। इसके लिए विवि ने अंतिम तारीख में बढ़ोतरी की है। प्राचार्यों का कहना है कि दूसरे प्रदेशों के वाह्य परीक्षकों की वजह से देरी हुई है।
विवि की ओर से गत वर्ष 23 अक्तूबर को जारी पत्र के अनुसार 30 नवंबर तक सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रम के आंतरिक और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक विवि की वेबसाइट पर अपलोड करके उसके प्रिंट की प्रति हस्ताक्षर कर गोपनीय विभाग में जमा करने के निर्देश दिए थे। विवि की वेबसाइट पर एक बार में ही अंक अपलोड करने को कहा था, क्योंकि वेबसाइट लॉक होने के बाद संशोधन संभव नहीं था। अंक न मिलने पर विवि ने अंतिम तारीख को 20 जनवरी तक बढ़ाया था, लेकिन अभी भी बहुत से कालेजों ने अंक नहीं भेजे हैं। विवि ने अब तारीख बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी है। एक निजी कालेज के प्राचार्य ने बताया कि उनके यहां पर वाह्य परीक्षक के रूप में हिसार के शिक्षक का नाम भेजा गया था। उनके इन्कार करने पर विवि से दूसरे परीक्षक का नाम मांगा था। अब तीन दिन पहले प्रयोगात्मक परीक्षा हुई है। अध्यक्ष वित्तविहीन शिक्षण संस्थान संगठन एमजेपी रूहेलखंड विवि डॉ. छुट्टन खान ने बताया कि विवि की ओर से वाह्य परीक्षकों की जो सूची मिलती है, उसमें ज्यादातर परीक्षक दूसरे प्रदेशों के होते हैं। ट्रेन में रिजर्वेशन न मिलने पर टैक्सी का विकल्प बचता है। कालेजों को इसके लिए पहले कुलपति से अनुमति लेनी पड़ती है। कई बार प्रयोगात्मक परीक्षा की देरी में एक कारण यह भी होता है।
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एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय की व्यावसायिक परीक्षाओं को समाप्त हुए करीब एक माह का समय बीत गया है, लेकिन कालेजों की ओर से अभी तक विवि को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक मुहैया नहीं कराए जा सके हैं। इसके लिए विवि ने अंतिम तारीख में बढ़ोतरी की है। प्राचार्यों का कहना है कि दूसरे प्रदेशों के वाह्य परीक्षकों की वजह से देरी हुई है।
विवि की ओर से गत वर्ष 23 अक्तूबर को जारी पत्र के अनुसार 30 नवंबर तक सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रम के आंतरिक और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक विवि की वेबसाइट पर अपलोड करके उसके प्रिंट की प्रति हस्ताक्षर कर गोपनीय विभाग में जमा करने के निर्देश दिए थे। विवि की वेबसाइट पर एक बार में ही अंक अपलोड करने को कहा था, क्योंकि वेबसाइट लॉक होने के बाद संशोधन संभव नहीं था। अंक न मिलने पर विवि ने अंतिम तारीख को 20 जनवरी तक बढ़ाया था, लेकिन अभी भी बहुत से कालेजों ने अंक नहीं भेजे हैं। विवि ने अब तारीख बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी है। एक निजी कालेज के प्राचार्य ने बताया कि उनके यहां पर वाह्य परीक्षक के रूप में हिसार के शिक्षक का नाम भेजा गया था। उनके इन्कार करने पर विवि से दूसरे परीक्षक का नाम मांगा था। अब तीन दिन पहले प्रयोगात्मक परीक्षा हुई है। अध्यक्ष वित्तविहीन शिक्षण संस्थान संगठन एमजेपी रूहेलखंड विवि डॉ. छुट्टन खान ने बताया कि विवि की ओर से वाह्य परीक्षकों की जो सूची मिलती है, उसमें ज्यादातर परीक्षक दूसरे प्रदेशों के होते हैं। ट्रेन में रिजर्वेशन न मिलने पर टैक्सी का विकल्प बचता है। कालेजों को इसके लिए पहले कुलपति से अनुमति लेनी पड़ती है। कई बार प्रयोगात्मक परीक्षा की देरी में एक कारण यह भी होता है।
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