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अमेरिकी इंजन ट्रायल में पास
Updated Wed, 26 Sep 2018 02:10 AM IST
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मुरादाबाद।
माल से लदी मालगाड़ियां अब सौ की रफ्तार से दौड़ेंगी। अमेरिकी इंजनों का ट्रायल सफल होने के बाद अब उन्हें ट्रैक पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। मुरादाबाद रेल मंडल के रोजा में बनाए गए लोकोमोटिव शेड में तीस अमेरिकी इंजन पहुंच चुके हैं। अत्याधुनिक इंजनों से ट्रेनों को रफ्तार तो मिलेगी ही साथ ही डीजल की खपत भी कम होगी।
मंडल के रोजा में करोड़ों की लागत से पहला लोको शेड तैयार किया गया है। यहां एक साथ 400 इंजनों की मरम्मत की जा सकेगी। अमेरिका की जीके ट्रांसपोरेशन कं पनी से रेलवे का करार हुआ है। अमेरिकी कंपनी से जो इंजन तैयार किए हैं। उनमें 70 प्रतिशत पार्ट्स इंडियन कंपनियों के हैं। रोजा को साढ़े चार हजार एचपी के तीस डीजल इंजन मिले हैं। इन इंजनों में ये खासियत है कि चालक के केबिन में एसी और टायलेट की सुविधा के साथ ही पार्ट्स में कोई खराबी आने पर लाल बत्ती जल जाएगी। साथ ही लोकोमोटिव शेड में भी इसकी जानकारी होगी। जब इंजन मरम्मत को शेड में पहुंचेगा तो इंजीनियरों की टीम को इंजन का खराब पार्ट्स ढूंढने में देर नहीं लगेगी। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि रोजा को तीस अमेरिकी इंजन मिल गया है। इनका ट्रायल भी हो गया है। जल्द ही इन इंजनों को ट्रैक पर चलाया जाएगा।
अत्याधुनिक इंजन तो मिले, ट्रैक कब सुधरेगा
मुरादाबाद। मुरादाबाद रेल मंडल को तीस अमेरिकी इंजन मिल गए हैं। जल्द ही इन्हें ट्रैक पर उतारा जाएगा। रेल अफसरों का दावा है कि इन इंजनों से 100 की रफ्तार से भी ज्यादा रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाई जा सकेंगी, लेकिन लगातार रेल पटरियों के चटकने और टूटने के मामले लगातार जारी हैं। कमजोर और जर्जर रेल पटरियों पर कैसे गाड़ियाें को सौ की रफ्तार पर दौड़ा जाएगा।
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माल से लदी मालगाड़ियां अब सौ की रफ्तार से दौड़ेंगी। अमेरिकी इंजनों का ट्रायल सफल होने के बाद अब उन्हें ट्रैक पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। मुरादाबाद रेल मंडल के रोजा में बनाए गए लोकोमोटिव शेड में तीस अमेरिकी इंजन पहुंच चुके हैं। अत्याधुनिक इंजनों से ट्रेनों को रफ्तार तो मिलेगी ही साथ ही डीजल की खपत भी कम होगी।
मंडल के रोजा में करोड़ों की लागत से पहला लोको शेड तैयार किया गया है। यहां एक साथ 400 इंजनों की मरम्मत की जा सकेगी। अमेरिका की जीके ट्रांसपोरेशन कं पनी से रेलवे का करार हुआ है। अमेरिकी कंपनी से जो इंजन तैयार किए हैं। उनमें 70 प्रतिशत पार्ट्स इंडियन कंपनियों के हैं। रोजा को साढ़े चार हजार एचपी के तीस डीजल इंजन मिले हैं। इन इंजनों में ये खासियत है कि चालक के केबिन में एसी और टायलेट की सुविधा के साथ ही पार्ट्स में कोई खराबी आने पर लाल बत्ती जल जाएगी। साथ ही लोकोमोटिव शेड में भी इसकी जानकारी होगी। जब इंजन मरम्मत को शेड में पहुंचेगा तो इंजीनियरों की टीम को इंजन का खराब पार्ट्स ढूंढने में देर नहीं लगेगी। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि रोजा को तीस अमेरिकी इंजन मिल गया है। इनका ट्रायल भी हो गया है। जल्द ही इन इंजनों को ट्रैक पर चलाया जाएगा।
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अत्याधुनिक इंजन तो मिले, ट्रैक कब सुधरेगा
मुरादाबाद। मुरादाबाद रेल मंडल को तीस अमेरिकी इंजन मिल गए हैं। जल्द ही इन्हें ट्रैक पर उतारा जाएगा। रेल अफसरों का दावा है कि इन इंजनों से 100 की रफ्तार से भी ज्यादा रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाई जा सकेंगी, लेकिन लगातार रेल पटरियों के चटकने और टूटने के मामले लगातार जारी हैं। कमजोर और जर्जर रेल पटरियों पर कैसे गाड़ियाें को सौ की रफ्तार पर दौड़ा जाएगा।
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