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टीआरटी मशीन ने एक घंटे में बिछाई साढ़े तीन सौ मीटर रेल पटरी
Updated Fri, 25 May 2018 02:06 AM IST
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Indian Railway
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मुरादाबाद।
रेल पटरी और स्लीपर बदलने के लिए अब घंटों रेलवे को ब्लाक लेने की जरूरती नहीं पड़ेगी। यूएसए निर्मित टीआरटी (ट्रैक रिन्युवल ट्रेन) मशीन से कम समय और आसानी से स्लीपर और पटरियां बिछा सकेगी। गुरुवार दोपहर मुरादाबाद रेल मंडल के हरथला रेलवे स्टेशन के यार्ड में इस अत्याधुनिक मशीन से एक घंटे में साढ़े तीन सौ मीटर पटरियां बिछा दी गईं। उत्तर रेलवे मुख्यालय से आई अफसरों की टीम की मौजूदगी में किया गया डेमो सफल रहा। अब इस मशीन से ही पटरियां बिछाने का काम होता रहेगा।
रेल गाड़ियां पिछले पांच माह से देरी से चल रही हैं। इनके देरी से चलने के पीछे वजह जो भी हो। लेकिन रेल अधिकारी पटरियों पर चल रहे कार्य का ही हवाला ही देते हैं। रेलवे ने यूएसए की हार्सको रेल कंपनी से तकरीबन 40 करोड़ रुपये की कीमत में टीआरटी मशीन खरीदी है। उत्तर रेलवे मुख्यालय के डिप्टी चीफ इंजीनियर (ट्रैक) संदीप कुमार गर्ग के नेतृत्व में सीपीआरओ नितिन चौधरी, पीआरओ आरके राणा समेत अन्य अफसरों की टीम गुरुवार को स्पेशल गाड़ी से मुरादाबाद पहुंची। इस टीम ने साढ़े चार बजे मशीन ने कार्य शुरू किया। करीब एक घंटे में टीआरटी मशीन ने साढ़े तीन सौ मीटर पटरी बिछा दी। छह सीनियर सेक्शन इंजीनियर और जूनियर इंजीनियरों समेत 50 कर्मचारी इस कार्य में जुटे। डिप्टी चीफ इंजीनियर उत्तर रेलवे संजीव कुमार गर्ग ने बताया कि पहले इस काम को दो हजार से ज्यादा कर्मचारी आठ से दस दिन में पूरा करते थे। अब तीन घंटे में एक किलोमीटर पटरियां आसानी से बिछाई जा सकती हैं।
इस तरह मशीन ने किया कार्य
मुरादाबाद। अति आधुनिक इलेक्ट्रिॉनिक, मेकेनिकल और इंजीनियरिंग के मेल वाली इस मशीन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह पुरानी पटरी और स्लीपर को हटाते हुए मिट्टी की सतह को समतल और ठोस बनाकर नए स्लीपर बैठाती है। अंत में नई पटरियों को बिछाते हुए स्लीपर के बीच की सही दूरी को बनाए रखते हुए रेलपथ तैयारी करती है। ट्रैक तैयार होने के तुरंत बाद ही गाड़ियां को दौड़ाया जा सकता है।
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मशीन में तीन प्रमुख सेक्शन
1- टीआरटी मशीन में तीन प्रमुख सेक्शन हैं। पावर प्लांट और हाईड्रोलिक प्रणाली वाली पावर कार।
2- पुरानी पटरियों को खोलकर निकालने और नई पटरियों को कसने के साथ साथ पुराने स्लीपर को हटाने और नये स्लीपर लगाने के लिए कन्वेयर्स वाली हैंडलिंग कार
3- हैंडलिंग कार से जुड़ी बीम कार, जिसमें पुराने स्लीपर को हटाने, मिट्टी को समतल करने और उसकी ठोस सतह तैयार करने वाली मशीन
इस साल 70 किलोमीटर रेल पटरियों बिछाने का लक्ष्य
मुरादाबाद। उत्तर रेलवे के सीपीआरओ नितिन चौधरी ने बताया कि दो साल में करीब 100 किलोमीटर रेल पटरियों बिछाई जा चुकी है। इस साल 70 किलोमीटर पटरियां बिछाने का लक्ष्य तय किया गया है। गाजियाबाद और सहारनपुर सेक्शन में भी पटरियों बदली गई है।
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रेल पटरी और स्लीपर बदलने के लिए अब घंटों रेलवे को ब्लाक लेने की जरूरती नहीं पड़ेगी। यूएसए निर्मित टीआरटी (ट्रैक रिन्युवल ट्रेन) मशीन से कम समय और आसानी से स्लीपर और पटरियां बिछा सकेगी। गुरुवार दोपहर मुरादाबाद रेल मंडल के हरथला रेलवे स्टेशन के यार्ड में इस अत्याधुनिक मशीन से एक घंटे में साढ़े तीन सौ मीटर पटरियां बिछा दी गईं। उत्तर रेलवे मुख्यालय से आई अफसरों की टीम की मौजूदगी में किया गया डेमो सफल रहा। अब इस मशीन से ही पटरियां बिछाने का काम होता रहेगा।
रेल गाड़ियां पिछले पांच माह से देरी से चल रही हैं। इनके देरी से चलने के पीछे वजह जो भी हो। लेकिन रेल अधिकारी पटरियों पर चल रहे कार्य का ही हवाला ही देते हैं। रेलवे ने यूएसए की हार्सको रेल कंपनी से तकरीबन 40 करोड़ रुपये की कीमत में टीआरटी मशीन खरीदी है। उत्तर रेलवे मुख्यालय के डिप्टी चीफ इंजीनियर (ट्रैक) संदीप कुमार गर्ग के नेतृत्व में सीपीआरओ नितिन चौधरी, पीआरओ आरके राणा समेत अन्य अफसरों की टीम गुरुवार को स्पेशल गाड़ी से मुरादाबाद पहुंची। इस टीम ने साढ़े चार बजे मशीन ने कार्य शुरू किया। करीब एक घंटे में टीआरटी मशीन ने साढ़े तीन सौ मीटर पटरी बिछा दी। छह सीनियर सेक्शन इंजीनियर और जूनियर इंजीनियरों समेत 50 कर्मचारी इस कार्य में जुटे। डिप्टी चीफ इंजीनियर उत्तर रेलवे संजीव कुमार गर्ग ने बताया कि पहले इस काम को दो हजार से ज्यादा कर्मचारी आठ से दस दिन में पूरा करते थे। अब तीन घंटे में एक किलोमीटर पटरियां आसानी से बिछाई जा सकती हैं।
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इस तरह मशीन ने किया कार्य
मुरादाबाद। अति आधुनिक इलेक्ट्रिॉनिक, मेकेनिकल और इंजीनियरिंग के मेल वाली इस मशीन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह पुरानी पटरी और स्लीपर को हटाते हुए मिट्टी की सतह को समतल और ठोस बनाकर नए स्लीपर बैठाती है। अंत में नई पटरियों को बिछाते हुए स्लीपर के बीच की सही दूरी को बनाए रखते हुए रेलपथ तैयारी करती है। ट्रैक तैयार होने के तुरंत बाद ही गाड़ियां को दौड़ाया जा सकता है।
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मशीन में तीन प्रमुख सेक्शन
1- टीआरटी मशीन में तीन प्रमुख सेक्शन हैं। पावर प्लांट और हाईड्रोलिक प्रणाली वाली पावर कार।
2- पुरानी पटरियों को खोलकर निकालने और नई पटरियों को कसने के साथ साथ पुराने स्लीपर को हटाने और नये स्लीपर लगाने के लिए कन्वेयर्स वाली हैंडलिंग कार
3- हैंडलिंग कार से जुड़ी बीम कार, जिसमें पुराने स्लीपर को हटाने, मिट्टी को समतल करने और उसकी ठोस सतह तैयार करने वाली मशीन
इस साल 70 किलोमीटर रेल पटरियों बिछाने का लक्ष्य
मुरादाबाद। उत्तर रेलवे के सीपीआरओ नितिन चौधरी ने बताया कि दो साल में करीब 100 किलोमीटर रेल पटरियों बिछाई जा चुकी है। इस साल 70 किलोमीटर पटरियां बिछाने का लक्ष्य तय किया गया है। गाजियाबाद और सहारनपुर सेक्शन में भी पटरियों बदली गई है।