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हक की लड़ाई के लिए दिल्ली कूच करेंगे यूपी के किसान, 29-30 नवंबर को किसान संसद का आयोजन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sat, 24 Nov 2018 02:32 AM IST
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हक मांगने के लिए किसान अब दिल्ली में जमावड़ा लगाएंगे। महाराष्ट्र में मांग स्वीकार हो जाने के बाद यूपी के किसानों के हौसले भी बुलंद हैं। इसके लिए दिल्ली 29 व 30 नवंबर को किसान संसद का आयोजन किया जाएगा। समस्याओं के समाधान के लिए किसान एक दिन का संसद सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं।
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चुनावी माहौल में किसान भी आरपार की लड़ाई को तैयार हो गए हैं। आजादी के बाद से हक की लड़ाई लड़ रहे अन्नदाता अब 29 व 30 नवंबर को दिल्ली में अधिकार संसद का आयोजन करेंगे। किसानों ने अधिकार संसद में बड़ी संख्या में जुटने का आह्वान किया है। आयोजकों ने प्रत्येक गांव से 20 किसान दिल्ली ले जाने का लक्ष्य रखा है। किसानों ने एलान किया है कि अबकी बार मांग पूरी होने तक दिल्ली नहीं छोड़ेंगे। महाराष्ट्र में मांग माने जाने के बाद अबकी बार दिल्ली की अधिकार संसद में जाने वालों के हौसले भी बुलंद हैं।
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रैली के व्यवस्थापक भाकियू असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने बताया कि सरकार का एमएसपी छलावा होकर रह गया है। इसका लाभ किसानों की बजाय दलालों को मिलता है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश सरकार नहीं मान रही है। किसानों को फसल बीमा व किसान बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। कृषि यंत्र खरीदने में भी किसानों का शोषण किया जा रहा है। कृषि प्रधान देश में सरकार की नीतियां उद्योगपतियों और कारोबारियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं। इनको अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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भयावह हो सकते हैं परिणाम
खेती घाटे का सौदा होकर रह गई है। मजदूरी तो दूर, किसानों को फसलों की लागत तक नहीं मिल रही है। इससे किसानों का खेती से मोहभंग हो रहा है। किसानों ने अपने बच्चों को खेती न करने की सींख देकर दूसरे कारोबार में लगा दिया है। पचास बीघे के बड़े किसान से ज्यादा बेहतर स्थिति परचून की दुकान चलाने वाले व्यापारी और सरकारी चपरासी की है। हम हक की लड़ाई कृषि को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। यदि सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने वाली नीतियां लागू नहीं कीं, तो खेती करने के लिए किसान नहीं मिलेंगे।
- बीएम सिंह, आयोजक किसान अधिकार संसद