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कमजोर हो रही है दूध की सेहत
Updated Tue, 27 Nov 2018 02:19 AM IST
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मुरादाबाद।
पोषाहार में पौष्टिक तत्व कम होने के कारण दुधारू पशु और दूध की सेहत खराब होने लगी है। जिसकी मुख्य वजह खेतों में पौषक तत्वों की कमी रही है। कम पौषक तत्वों वाले चारे के खाने के कारण पशु कुपोषण की चपेट में आ गए हैं। दुधारू पशुओं में कुपोषण का असर अब दूध में आने लगा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो दूध में पौष्टिक तत्वों की बीस से तीस फीसदी तक की कमी सामने आ रही है। अब इसका असर दूध का सेवन करने वालों पर भी पड़ने लगा है। इतना ही नहीं दूध को पैकिंग और शोधन में कई तत्व कम हो जाते हैं।
पूर्ण आहार कहे जाने वाले दूध का सेवन करके व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है। लोग ताकत के लिए दूध के सेवन की सलाह देते हैं। अब यही दूध कमजोरी की चपेट में है। क्योंकि इसमें मिलने वाले पोषण तत्व व खनिज लवण कम होते जा रहे हैं। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। दूध का परीक्षण सामान्यतया वसा के आधार पर ही किया जाता है। कुछ खास मामलों में दूध में मिलावट की जांच कराई गई थी। जिसमें सिंथेटिक और मिलावटी दूध की पुष्टि हुई है।
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सौ ग्राम दूध में पोषकता के मानक -
..
कार्बोहाईड्रेट 5.26 ग्राम (लैक्टोज व शर्करा)
वसा - संतृप्त 1.865 ग्राम
वसा-एकल असंतृप्त 0.812 ग्राम
वसा- बहु असंतृप्त 0.195 ग्राम
प्रोटीन 3.22 ग्राम
पानी 88.32 ग्राम
विटामिन-ए तीन फीसदी
थायमीन- विटामिन बी-1 0.044 मिग्रा- तीन फीसदी
राइबोक्सलेविन - विटामिन बी-2 0.188 मिग्रा 12 फीसदी
विटामिन - बी-12 0.44 18 फीसदी
विटामिन - डी 40 20 फीसदी
कैल्शियम 113 मिग्रा 11 फीसदी
मैगनीशियम 10 तीन फीसदी
पोटेशियम 143 तीन फीसदी
.......
पशुओं को ही पौष्टिक चारा-रातब नहीं मिल रहा है। ऐसे में दूध में भी पोषक तत्वों की कमी सामने आने लगी है। पैकिंग केदौरान भी कई तत्व कम हो जाते हैं। यह खतरनाक संकेत है। खेतों और पशुओं के स्वास्थ्य का मानक बनाने की जरूरत है। इसके साथ ही दूध की गुणवत्ता में भी सुधार होने लगेगा।
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- विनीत कुमार यादव, उपायुक्त खाद्य सुरक्षा।
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पोषाहार में पौष्टिक तत्व कम होने के कारण दुधारू पशु और दूध की सेहत खराब होने लगी है। जिसकी मुख्य वजह खेतों में पौषक तत्वों की कमी रही है। कम पौषक तत्वों वाले चारे के खाने के कारण पशु कुपोषण की चपेट में आ गए हैं। दुधारू पशुओं में कुपोषण का असर अब दूध में आने लगा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो दूध में पौष्टिक तत्वों की बीस से तीस फीसदी तक की कमी सामने आ रही है। अब इसका असर दूध का सेवन करने वालों पर भी पड़ने लगा है। इतना ही नहीं दूध को पैकिंग और शोधन में कई तत्व कम हो जाते हैं।
पूर्ण आहार कहे जाने वाले दूध का सेवन करके व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है। लोग ताकत के लिए दूध के सेवन की सलाह देते हैं। अब यही दूध कमजोरी की चपेट में है। क्योंकि इसमें मिलने वाले पोषण तत्व व खनिज लवण कम होते जा रहे हैं। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। दूध का परीक्षण सामान्यतया वसा के आधार पर ही किया जाता है। कुछ खास मामलों में दूध में मिलावट की जांच कराई गई थी। जिसमें सिंथेटिक और मिलावटी दूध की पुष्टि हुई है।
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सौ ग्राम दूध में पोषकता के मानक -
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कार्बोहाईड्रेट 5.26 ग्राम (लैक्टोज व शर्करा)
वसा - संतृप्त 1.865 ग्राम
वसा-एकल असंतृप्त 0.812 ग्राम
वसा- बहु असंतृप्त 0.195 ग्राम
प्रोटीन 3.22 ग्राम
पानी 88.32 ग्राम
विटामिन-ए तीन फीसदी
थायमीन- विटामिन बी-1 0.044 मिग्रा- तीन फीसदी
राइबोक्सलेविन - विटामिन बी-2 0.188 मिग्रा 12 फीसदी
विटामिन - बी-12 0.44 18 फीसदी
विटामिन - डी 40 20 फीसदी
कैल्शियम 113 मिग्रा 11 फीसदी
मैगनीशियम 10 तीन फीसदी
पोटेशियम 143 तीन फीसदी
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पशुओं को ही पौष्टिक चारा-रातब नहीं मिल रहा है। ऐसे में दूध में भी पोषक तत्वों की कमी सामने आने लगी है। पैकिंग केदौरान भी कई तत्व कम हो जाते हैं। यह खतरनाक संकेत है। खेतों और पशुओं के स्वास्थ्य का मानक बनाने की जरूरत है। इसके साथ ही दूध की गुणवत्ता में भी सुधार होने लगेगा।
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- विनीत कुमार यादव, उपायुक्त खाद्य सुरक्षा।