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घोड़ा पालकों को दिया ग्लैंडर्स और फार्सी बीमारी से बचाव का प्रशिक्षण
Updated Sun, 01 Jul 2018 01:20 AM IST
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ठाकुरद्वारा। शनिवार को तहसील सभागार में घोड़ा पालकों को प्रशिक्षण देकर ग्लैंडर्स और फार्सी बीमारी के प्रति जागरूक किया गया। पशुपालन विभाग ने तहसील सभागार में घोड़ा पालकों को ग्लैंडर्स और फार्सी बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें घोड़ों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने और उससे बचाव के तरीके विस्तार से बताए गए। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. बृजेश गुप्ता ने कहा कि ग्लैंडर्स बीमारी की पुष्टि होने पर घोड़े को दर्दरहित मौत देकर उसे आठ फीट गहरे गड्ढे में नमक चूना डालकर दफन किया जाए। ऐसा नहीं करने पर समाज को नुकसान पहुंच सकता है।
ठाकुरद्वारा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एसपी पांडे ने कहा कि यह बीमारी सदियों पुरानी है जो पूरे विश्व में पाई जाती है। 2006 से 2011 के बीच यह बीमारी भारत में देखी गई है। यह बीमारी घोड़े के अलावा खच्चर, टट्टू, गधा, कुत्ता, बिल्ली, मनुष्य को भी चपेट में ले सकती है। कार्यक्रम में मौजूद भायपुर के मो. इमरान ने कहा कि उसके तीन घोड़ों को ग्लैंडर्स बीमारी बताकर उन्हें मौत पशुपालन विभाग ने दी थी। लेकिन आश्वासन के तहत एक माह बाद भी मुआवजा नहीं मिल सका है। इस पर कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने शीघ्र मुआवजे का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य केंद्र के डा. सचिन शर्मा, डा. पीके तोमर, डा. नवनीत कुमार, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. तनु सिंह ने भी विचार रखे।
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ठाकुरद्वारा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एसपी पांडे ने कहा कि यह बीमारी सदियों पुरानी है जो पूरे विश्व में पाई जाती है। 2006 से 2011 के बीच यह बीमारी भारत में देखी गई है। यह बीमारी घोड़े के अलावा खच्चर, टट्टू, गधा, कुत्ता, बिल्ली, मनुष्य को भी चपेट में ले सकती है। कार्यक्रम में मौजूद भायपुर के मो. इमरान ने कहा कि उसके तीन घोड़ों को ग्लैंडर्स बीमारी बताकर उन्हें मौत पशुपालन विभाग ने दी थी। लेकिन आश्वासन के तहत एक माह बाद भी मुआवजा नहीं मिल सका है। इस पर कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने शीघ्र मुआवजे का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य केंद्र के डा. सचिन शर्मा, डा. पीके तोमर, डा. नवनीत कुमार, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. तनु सिंह ने भी विचार रखे।
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