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Mirzapur News: ललही छठ माता की पूजा कर पुत्र के दीर्घायु होने की मंगल कामना की

Sun, 25 Aug 2024 02:54 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 25 Aug 2024 02:54 AM IST
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Worshiped Lalahi Chhath Mata and prayed for the long life of the son
मिर्जापुर। पुत्र की मंगल कामना के लिए ललही छठ का पर्व शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। शहर से लेकर गांव तक जगह-जगह समूह में महिलाओं ने बेदी बनाकर ललही छठ माता को दूध-दही, महुआ व तिन्नी का चावल चढ़ाकर विधि-विधान पूजा-अर्चना की। मुराद पूरी होने पर कुछ स्थानों पर महिलाओं ढोल, नगाड़ा के साथ नाचते-गाते पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
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नगर के रमईपट्टी, पक्का पोखरा, बबुआ पोखरा, शुक्लहा, महुवरिया, वासलीगंज, बरियाघाट, पक्काघाट, सुंदरघाट, नारघाट पहुंचकर गंगा के किनारे, सरोवरों के तट पर महिलाओं ने ललही छठ माता की पूजा-अर्चना की। पूजन से पहले सुबह महिलाएं फल, कपड़े, दूध-दही व तिन्नी के चावल से थाल सजाने में जुटी रहीं। समूह में जुटी महिलाओं ने बेदी बनाकर छठ माता की पूजा की और उनकी महिमा से जुड़ी कहानियां आपस में सुनाई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ललही छठ माता की पूजा की गई। अर्जुनपुर, अघौली, हरिहरपुर बेदौली, खजुरी, महेवा, दुबेपुर, अनंतरामपट्टी, चेरुईराम, धौरुपुर, राजपुर, भरुहना, कतरन, पहाड़ी, बरकछा कला, लोहंदी कला समेत कई और इलाकों मेंं ललही छठ माता की पूजा-अर्चना की गई। विंध्याचल क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर ललई छठ माता की पूजा-अर्चना की गई। देव स्थलों और घरों में महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा कर पुत्र की दीर्घायु की कामना की। अमरावती चौराहा, हनुमान मंदिर, मोती झील मार्ग पर स्थित अमर सिंह फैंस एसोसिएशन परिसर के पास, भारतीय स्टेट बैंक चौराहे के समीप, संकटा मंदिर बनवारीपुर, शिवपुर बाजार स्थित हनुमान मंदिर, रामगया घाट पर स्थित तारा मंदिर, गोपीगंज बस स्टैंड के पास कंतित, गजिया, महुआरी आदि में भी ललई छठ माता की पूजा की गई। हलिया बाजार स्थित माता चौरा, हथेड़ा, पुरवा औसान सिंह, भटवारी, सोनगढ़ा, राजपुर, बबुरा कला आदि गांवों में महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु एवं उनके सुखमय जीवन के लिए व्रत रखकर सामूहिक रूप से ललही छठ माता की विधि विधान से पूजा की।
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उधर, अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां षष्ठी देवी मंदिर पहुंचकर काफी संख्या में महिलाओं ने दर्शन-पूजन किए और पुत्र की दीर्घायु के लिए मंगल कामना की। ललही छठ पर मंदिर को सुगंधित फूलों एवं रंगीन झालरों से सजाया गया। माता षष्ठी के दर्शन-पूजन का सिलसिला सुबह से शाम तक चलता रहा। माता के दरबार में नव दंपती ने ढोल-नगाड़े के साथ हाजिरी लगाई और पुत्र प्राप्ति की कामना की। विंध्य पर्वत पर विराजमान पुत्रदायनी मां षष्ठी देवी को श्रद्धालु खरष्टि देवी के नाम से भी पुकारते हैं। भादो के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को ललई छठ का पर्व विंध्याचल में धूमधाम से मनाया जाता है। अष्टभुजा पहाड़ के नीचे कजरहवा पोखरा से पहाड़ के ऊपर मां षष्ठी देवी मंदिर तक सड़क के दोनों तरफ सजी अस्थायी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। पंडित देवेंद्र पांडेय ने बताया कि विंध्य पर्वत पर विराजमान माता षष्ठी देवी साक्षात पुत्र दायिनी माता हैं।
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