इमिलिया चट्टी बाजार में काव्य गोष्ठी में पेश हुई एक से बढ़कर एक रचनाएं
अहरौरा। इमिलिया चट्टी बाजार स्थित एक लॉन में शनिवार शाम ‘दोस्तों की महफिल, कविता की छांव’ में काव्य पाठ का आयोजन हुआ। कवयित्री विभा सिंह ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी रचना ‘तीर नजरों से क्यों चलाते हो, जीते जी हमें मार जाते हो...’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
काव्य गोष्ठी के संचालक कुमार प्रवीण ने एक-एक कर कवियों को मंच पर आमंत्रित किया। सोनांचली ने ‘कविता हुंकार दे, आ जाते हैं जोश में’ सुनाकर माहौल में जोश भर दिया। दामोदर दबंग की भोजपुरी रचना ‘चोरहा कुलीह चऊधुर हो गइल, ई कईसन आजादी बा’ पर भी खूब वाहवाही मिली। हास्य कवि नरसिंह साहसी ने ‘राह मालूम हो तो भटकों को बता दो, दीवार जाति-धरम की सभी गिरा दो’ सुनाकर सामाजिक संदेश दिया। डॉ. हरिवंश सिंह बवाल, नयन वर्मा, राजनारायण, यथार्थ विष्णु और बी. प्रसाद ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं का मनोरंजन किया।