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Mirzapur News: अष्टभुजा पहाड़ी पर जल संकट, सीता कुंड समेत छह से ज्यादा झरने और कुंड सूखे

Sun, 08 Jun 2025 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jun 2025 12:36 AM IST
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Water crisis on Ashtabhuja hill, more than six springs and ponds including Sita Kund dry up.
विंध्याचल। भीषण गर्मी में अष्टभुजा पहाड़ पर जलसंकट उत्पन्न हो गया है। धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर सीता कुंड में नाममात्र का पानी आ रहा है। इसके अलावा छह से ज्यादा झरनों और कुंडों का जलस्रोत बंद हो गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं को भी परेशानी हो रही। प्यास बुझाने के लिए लोगों को बोतल का पानी खरीदना पड़ रहा है।
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सीता कुंड के पुजारी अजय दुबे ने बताया कि गर्मी के चलते सीता कुंड का जलस्रोत मामूली रह गया है। कुंड के पास हैंडपंप तो है लेकिन कई महीने खराब है। भैरव कुंड के पुजारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि भैरव कुंड का जलस्रोत समाप्ति की ओर है। इसके लिए उन्होंने अष्टभुजा पहाड़ी पर जगह-जगह हुई बोरिंग को जिम्मेदार ठहराया है। मछिंद्रा कुंड पुजारी गौरी शंकर महाराज ने बताया कि जब ज्यादा गर्मी पड़ती है तो कुंड का पानी धीरे-धीरे घटने लगता है। विंध्य पर्वत पर मौजूद झरने और कुंड बंद हो जाने से त्रिकोण परिमार्ग पर आने वाले श्रद्धालुओं को पेयजल की समस्या होगी। प्यास बुझाने के लिए दुकानों से बोतल बंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
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मछिंद्रा और सीता कुंड के जल से दूर होते हैं रोग
देश की पवित्र और ऐतिहासिक पहाड़ियों में से एक अष्टभुजा पहाड़ी में आध्यात्मिकता और प्रकृति का मिलन होता है। प्राकृतिक सुंदरता की गोद में स्थित विंध्याचल सदियों से तीर्थयात्रियों और खोजकर्ताओं को आकर्षित करता रहा है। अष्टभुजा पहाड़ पर झरने निरंतर बहते रहे हैं। वहीं, ऐतिहासिक सीता कुंड और मछिंद्रा कुंड का पानी औषधीय गुणों से भरपूर है। इन कुंडों के पानी से पेट की बीमारियां दूर होती हैं। देश के कोने-कोने से लोग यहां का पानी मंगाकर पीते हैं।
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इन झरनों पर गहराया संकट
त्रिकोण परिक्रमा के दौरान विंध्य पर्वत से बहने वाले झरने लोगों का मन मोह लेते हैं। क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ाने के साथ लोगों के पेयजल का भी साधन थे। इनमें से कई झरने और कुंड इस समय सूख गए हैं। राम कुंड, लक्ष्मण कुंड, भीतरी खोह, काली कुंड, गुलरिया, मदिनिया खोह, डयनिया खोह, तुल तुलिया खोह में हमेशा पानी रहता है। इनके सूखने से श्रद्धालु के अलावा स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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