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मां विंध्यवासिनी धाम में उमड़े आस्थावान
विंध्याचल (सं.)।
Updated Fri, 24 Jul 2015 12:17 AM IST
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गुप्त नवरात्र की सप्तमी तिथि पर विंध्य दरबार में मां के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के लिए आस्थावानों का तांता लगा रहा। मां विंध्यवासिनी के भव्य श्रृंगार का दर्शन कर श्रद्घालु निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा व माता के जयकारे से मंदिर सहित विंध्य की गलियां भी देवीमय हो रही थीं। रिमझिम फुहारों के बीच विंध्यधाम में पहुंचे दर्शनार्थियों ने श्रद्घाभाव से पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्घि के लिए कामना की।
गुरुवार की भोर से ही पावन विंध्य दरबार में दर्शन-पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान आदि का कार्य अनवरत चलता रहा। अष्टभुजा पहाड़ सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में जगह-जगह चल रहे हवन- पूजन, अनुष्ठान से वातावरण पूर्ण रूप से देवीमय हो रहा है। तीर्थ पुरोहित भी अपने यजमानों को गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन से ही अनुष्ठान कराने में मशगूूल रहे। गंगा में स्नान के बाद नर-नारी माला-फूल, नारियल-चुनरी एवं प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे, जहां मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो उठे। मंदिर में किसी ने गर्भगृह में जाकर तो किसी ने झांकी से मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन किया। मां के दर्शन-पूजन के बाद भक्तों ने विंध्याचल मंदिर परिसर में विराजमान मां काली, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, मां शीतला, श्री पंचमुखी महादेव, दक्षिणमुखी हनुमान, बटुक भैरव सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर विधिवत उपासना की। महिलाओं ने मां को हलवा-पूड़ी का भोग लगाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। मंदिर की छत पर कतार में बैठे साधक मंत्रोच्चार बीच पूजन-अनुष्ठान में तल्लीन रहे, वहीं मुंडन संस्कार का भी दौर चलता रहा। विंध्याचल की गलियां श्रद्घालुओं से पटी रही। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्त नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।
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गुरुवार की भोर से ही पावन विंध्य दरबार में दर्शन-पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान आदि का कार्य अनवरत चलता रहा। अष्टभुजा पहाड़ सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में जगह-जगह चल रहे हवन- पूजन, अनुष्ठान से वातावरण पूर्ण रूप से देवीमय हो रहा है। तीर्थ पुरोहित भी अपने यजमानों को गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन से ही अनुष्ठान कराने में मशगूूल रहे। गंगा में स्नान के बाद नर-नारी माला-फूल, नारियल-चुनरी एवं प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे, जहां मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो उठे। मंदिर में किसी ने गर्भगृह में जाकर तो किसी ने झांकी से मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन किया। मां के दर्शन-पूजन के बाद भक्तों ने विंध्याचल मंदिर परिसर में विराजमान मां काली, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, मां शीतला, श्री पंचमुखी महादेव, दक्षिणमुखी हनुमान, बटुक भैरव सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर विधिवत उपासना की। महिलाओं ने मां को हलवा-पूड़ी का भोग लगाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। मंदिर की छत पर कतार में बैठे साधक मंत्रोच्चार बीच पूजन-अनुष्ठान में तल्लीन रहे, वहीं मुंडन संस्कार का भी दौर चलता रहा। विंध्याचल की गलियां श्रद्घालुओं से पटी रही। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्त नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।
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