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यूपी: अति प्राचीन लखनिया दरी का मनमोहक दृश्य आपको भी बना देगा दीवाना

Wed, 05 Sep 2018 04:53 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर Updated Wed, 05 Sep 2018 04:53 PM IST
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Beautiful scenes of the ancient Lakhania darimake you crazy
लखनिया दरी जलप्रपात - फोटो : अमर उजाला

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यूपी के मिर्जापुर स्थित लखनिया दरी जल-प्रपात का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। जल-प्रपात के पास पहाड़ की कंदराओं में बने भित्ति चित्र से इसकी प्राचीनता का पता चलता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व लखनिया दरी पर लाव-लश्कर के साथ एक राजा अपनी रानी को सैर कराने लाए थे। उस दौरान बाढ़ के चलते राजा, सैनिक और हाथी-घोड़े बह गए जबकि पहाड़ की कंदराओं में छिपने के कारण रानी अकेली बची थी।

रानी को जब लगा कि वह भी नहीं बचेंगी तो उन्होंने अपने खून से पहाड़ के चट्टान पर राजा, सैनिक, हाथी, घोड़ा की तस्वीरें उकेर दीं, जिससे पता चल सके कि बाढ़ में फंसने की वजह से कोई जीवित बच नहीं सका है। भित्ति चित्र को देखकर पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी इसे मानव के खून से बना हुआ बताते हैं। अति प्राचीन लखनिया दरी न सिर्फ पर्यटन स्थल बल्कि  ऐतिहासिक रूप से भी समृद्ध है।
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बरसात के मौसम में बड़ी संख्या में सैलानी यहां जलप्रपात और प्रकृति के मनोहारी दृश्य का आनंद उठाने आते हैं। अगर यहां सैलानियों को सुविधाएं मुहैया कराई जाए तो यहां सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। यह स्थल उपेक्षा का शिकार है।
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यहां न तो सैलानियों के बैठने के लिए चबूतरे बने हैं और न ही बारिश से बचाव के लिए शेड लगे हैं। झरने में स्नान करने के बाद महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम नहीं है।    
         

      

बरसात में काफी मनोरम हो जाता है दृश्य

Beautiful scenes of the ancient Lakhania darimake you crazy
लखनिया दरी जल-प्रपात - फोटो : अमर उजाला
तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरे लखनिया दरी का दृश्य बरसात में काफी मनोरम हो जाता है। पहाड़ों पर पेड़ों की हरियाली, जल-प्रपात और कल-कल कर गिरते झरने लोगों को आकर्षित करते हैं।

अहरौरा नगर से आठ किलोमीटर दक्षिण स्थित लखनिया दरी जलप्रपात स्थल के विकास की असीम संभावनाएं हैं लेकिन इस दिशा में कुछ खास नहीं किया गया। 2012 में सपा के शासन में पर्यटन मंत्री रहे ओमप्रकाश सिंह लखनिया दरी आए थे। उन्होंने लखनिया दरी से चूनादरी जल-प्रपात तक रोप-वे बनवाने की घोषणा की थी लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं किया गया। यहां दूर दराज से लोग पिकनिक मनाने आते हैं।


सरकार की उदासीनता के कारण उनके बैठने के लिए चबूतरे, बारिश से बचाव के लिए शेड, कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम नहीं होने से  सैलानी खुद को असहज महसूस करते हैं।        
 
 

ब्रिटिश हुकूमत के समय अहरौरा जलाशय में बना था तीन तखवा पुल

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जलप्रपात
सन 1827 में ब्रिटिश हुकूमत के समय अहरौरा जलाशय में तीन तखवा पुल बनाया गया था जिससे होकर लोग सोनभद्र जाते थे। उस दौरान लखनिया दरी जल-प्रपात जाने के लिए कोई मार्ग नहीं था।

लोग जंगल एवं पहाड़ों से होकर होकर जाते थे। प्रथम पंचवर्षीय योजना में 1951 से 56 के मध्य वाराणसी से सोनभद्र जाने के लिए सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद जल-प्रपात पर आने जाने का रास्ता सुगम हुआ। इस बारे में  डीएफओ राजेश चौधरी बताते हैं कि लखनिया दरी के विकास की योजना पर काम हो रहा है। इसको लेकर शासन गंभीर है। जल्द ही कुछ नए कार्य किए जाएंगे।  

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