तीन दिन में 1370 किलोमीटर का सफर तय करके पुणे से मिर्जापुर के लालगंज पहुंचे 12 ग्रामीण, शेल्टर होम में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण व जांच
लाक डाउन के दौरान परदेस गए लोगों के घर आने का सिलसिला बना हुआ है। रविवार को महाराष्ट्र के पुणे से 12 लोग बाइक से मिर्जापुर के लालगंज क्षेत्र के पड़री दाढ़ी राम लौटे। ये लोग तीन दिन की यात्रा के बाद यहां पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस टीम ने उन्हें बापू उपरौध इंटर कॉलेज में बनाए गए होम सेल्टर रखा है।
जिले के पड़री क्षेत्र के दाढ़ी राम गांव के लोग महाराष्ट्र के पुणे से रविवार को परिवार सहित बाइक से लालगंज बाजार पहुंचे। पुलिस उन्हें शेल्टर होम ले गई जहां उनकी जांच की गई। अधीक्षक डॉ संजय सिंह ने रास्ते के पड़ावों, उनके भोजन समेत पूरी गतिविधियों की जानकारी ली। ये सभी लोग महाराष्ट्र के पुणे में टाइल्स लगाने का काम करते थे। इनमें से एक लक्ष्मी मौर्य अपने दो बच्चे और पत्नी के साथ लालगंज पहुंचे थे।
पूछने पर बताया कि लालगंज पहुंचने में तीन दिन का समय लगा। उन लोगों ने रास्ते में पेट्रोल पंप पर रुकते थे। उनके साथ अन्य बाइक सवारों में शंभू पाल, अशोक पाल, अखिलेश पाल, अक्षय गुप्ता ,दिनेश पाल ,रिया मौर्या, पलक मौर्या समेत एक दर्जन पुणे से लौटे लोगों की शेल्टर होम पर स्वास्थ्य की जांच की गई। स्वास्थ्य टीम में डाक्टर अशोक यादव, सिंपी, ज्योति, प्रियंका, इंदू चिकित्सा व्यवस्था में लगी रहीं।
कानपुर से आए थे पैदल, जांच के बाद घर में मिला प्रवेश
वाराणसी के सेवापुरी में कानपुर से पैदल चलकर चार दिन बाद शुक्रवार को घर पहुंचे चार युवकों को उनके परिजनों ने प्रवेश नहीं करने दिया। भूख और प्यास से बेहाल चारों युवकों की जांच कराई गई और डॉक्टरों ने कहा कि घर रह सकते हैं, तब जाकर उन्हें प्रवेश मिला और परिजन आवभगत में जुटे।
जंसा क्षेत्र के भुईली का राजकुमार पाल, पतेरवा का सुरेंद्र प्रजापति, तेंदुई का मनोज पटेल और अमरीपुर का शशि कुमार कानपुर में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए चारों युवक कानपुर से बीती 14 अप्रैल को पैदल ही घर के लिए निकले। चार दिन के अथक प्रयास के बाद चारों अपने घर पहुंचे तो परिजनों ने घुसने से मना कर दिया। परिजनों की सूचना पर ग्राम प्रधान और पुलिस आई। चारों की सेवापुरी और फिर दीनदयाल अस्पताल में जांच कराई गई।