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महामना की बैलगाड़ी पर आई थी बारात
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Tue, 23 Dec 2014 12:24 AM IST
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जनपदवासियों को पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे कर्मयोगी का ससुराल होने का गर्व है। इस पर जनपदवासी भी इतराते हैं कि कभी जिले में महामना की बारात आई थी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद जन्म और वाराणसी कर्मस्थली रही है लेकिन मिर्जापुर भी महामना के सानिध्य से दूर नहीं रहा।
महामना का ससुराल मिर्जापुर के बसनही बाजार में बड़ी माता मंदिर के इमली महादेव पर है। मालवीयजी की शादी 1878 में नंदराम की इकलौती बेटी कुंदन देवी के साथ हुआ था।
सास-ससुर के निधन के बाद कोई नहीं है। मालवीय जी की बरात इलाहाबाद से बैलगाड़ी पर आई थी। लोगों की मानें तो बारात को इलाहाबाद से मिर्जापुर आने में एक सप्ताह लगा था।
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बारात एक सप्ताह तक जनवासे में रुकी रही। ससुराल होने के चलते महामना का आना जाना मिर्जापुर में होता था। इमली महादेव स्थित लगभग 20 बाई 50 फीट का यह मकान आज भी मिर्जापुर के लोगों को इतराने और लोगों को महामना से जुड़े रहने का मौका देता है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद जन्म और वाराणसी कर्मस्थली रही है लेकिन मिर्जापुर भी महामना के सानिध्य से दूर नहीं रहा।
महामना का ससुराल मिर्जापुर के बसनही बाजार में बड़ी माता मंदिर के इमली महादेव पर है। मालवीयजी की शादी 1878 में नंदराम की इकलौती बेटी कुंदन देवी के साथ हुआ था।
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सास-ससुर के निधन के बाद कोई नहीं है। मालवीय जी की बरात इलाहाबाद से बैलगाड़ी पर आई थी। लोगों की मानें तो बारात को इलाहाबाद से मिर्जापुर आने में एक सप्ताह लगा था।
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बारात एक सप्ताह तक जनवासे में रुकी रही। ससुराल होने के चलते महामना का आना जाना मिर्जापुर में होता था। इमली महादेव स्थित लगभग 20 बाई 50 फीट का यह मकान आज भी मिर्जापुर के लोगों को इतराने और लोगों को महामना से जुड़े रहने का मौका देता है।