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पश्चिमी विक्षोभ से पारा लुढ़का, पुरवा ने बढ़ाई उमस
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दिन प्रतिदिन बढ़ते तापमान के बीच रविवार को लोगों को कुछ राहत मिली। हालांकि उमस भरी गर्मी से उनकी परेशानी और बढ़ी, लेकिन तापमान कम होने से वातावरण में तपिश कुछ कम हुई। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी।
जिले में इस बार पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। अप्रैल महीने में इतना तापमान कई साल पहले तक नहीं पहुंचा था। नगर के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि लगभग 25 वर्ष पहले ऐसी ही गर्मी पड़ी थी, लेकिन ऐसी गर्मी मई माह में पड़ी थी। इस बार पूरे अप्रैल माह में पारा लगातार बढ़ता रहा। इस बीच शनिवार से ही मौसम ने करवट ली। इसका कारण पश्चिमी विक्षोभ बताया जा रहा है। इस समय पछुआ और पुरवा दोनों ही चल रहे हैं। इसके कारण कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से यह हानिकारक है। इसे काल बैसाखी की संज्ञा दी जा रही है। इस समय बैशाख का महीना चल रहा है और मौसम की ये स्थिति इस समय बनती है। इसी कारण इसका नाम काल बैशाखी पड़ा है। लगातार पछुआ हवा चलने के बाद जब पुरवा हवा शुरू होती है तो पुरवा और पछुआ के मिलने के वक्त वातावरण में नमी आती है, जिससे तेज आंधी चलती है। इस आंधी के बीच ही जोरदार गरज-चमक संग भारी बारिश होती है। ये बारिश दो-तीन घंटे भी हो सकती है। इससे मौसम तो जरूर कुछ देर के लिए ठंडा हो जाता है परंतु भारी बारिश और बिजली गिरने से जान-माल का खतरा बना रहता है। बीएचयू के मौसम विज्ञानी शिवमंगल सिंह ने बताया कि काल बैशाखी, अप्रैल और मई के पहले पक्ष में ही ज्यादा असरकारक होती है।
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जिले में इस बार पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। अप्रैल महीने में इतना तापमान कई साल पहले तक नहीं पहुंचा था। नगर के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि लगभग 25 वर्ष पहले ऐसी ही गर्मी पड़ी थी, लेकिन ऐसी गर्मी मई माह में पड़ी थी। इस बार पूरे अप्रैल माह में पारा लगातार बढ़ता रहा। इस बीच शनिवार से ही मौसम ने करवट ली। इसका कारण पश्चिमी विक्षोभ बताया जा रहा है। इस समय पछुआ और पुरवा दोनों ही चल रहे हैं। इसके कारण कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से यह हानिकारक है। इसे काल बैसाखी की संज्ञा दी जा रही है। इस समय बैशाख का महीना चल रहा है और मौसम की ये स्थिति इस समय बनती है। इसी कारण इसका नाम काल बैशाखी पड़ा है। लगातार पछुआ हवा चलने के बाद जब पुरवा हवा शुरू होती है तो पुरवा और पछुआ के मिलने के वक्त वातावरण में नमी आती है, जिससे तेज आंधी चलती है। इस आंधी के बीच ही जोरदार गरज-चमक संग भारी बारिश होती है। ये बारिश दो-तीन घंटे भी हो सकती है। इससे मौसम तो जरूर कुछ देर के लिए ठंडा हो जाता है परंतु भारी बारिश और बिजली गिरने से जान-माल का खतरा बना रहता है। बीएचयू के मौसम विज्ञानी शिवमंगल सिंह ने बताया कि काल बैशाखी, अप्रैल और मई के पहले पक्ष में ही ज्यादा असरकारक होती है।
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