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Mirzapur News: वरमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी
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मां विंध्यवासिनी।-संवाद।
सप्तमी पर मां विंध्यवासिनी के दरबार में उमड़े तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु
- मां कालरात्रि की आराधना कर भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि, विंध्यधाम से त्रिकोण परिक्रमा पथ पर गूंजे जयकारे
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर मां कालरात्री की अराधना विशेष फलदायी है। मंदिरों में वरमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी के मंत्रों का जाप किया गया। शनिवार को मां विंध्यवासिनी के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि तीन लाख से ज्यादा भक्तों ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। आदिशक्ति के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं।
मां के दर्शन कर भक्तों ने सुख-समृद्धि, आरोग्य और परिवार की मंगलकामना की। मां विंध्यवासिनी के चरणों में शीश नवाने के बाद श्रद्धालुओं ने त्रिकोण परिक्रमा कर मां काली और मां अष्टभुजी के दरबार में भी हाजिरी लगाई। घंटे-घड़ियाल की गूंज और जयकारों से पूरा विंध्यधाम दिनभर भक्तिमय बना रहा। नवरात्र की सप्तमी का शक्ति उपासना में विशेष महत्व है। मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। जीवन में साहस, शक्ति व अभय का संचार होता है।
मंगल आरती के बाद शुरू हुआ दर्शन-पूजन
मां विंध्यवासिनी मंदिर में भोर में मंगल आरती के बाद कपाट खुलते ही दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। हाथों में नारियल, चुनरी और पुष्प लिए श्रद्धालु मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन पाने के लिए आतुर दिखे। किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर मां के चरणों में शीश नवाया तो किसी ने झांकी से दर्शन कर आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर में दुर्गा चालीसा और दुर्गा स्तुति के स्वर गूंजते रहे।
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त्रिकोण परिक्रमा कर किए तीनों देवियों के दर्शन
विंध्यधाम की धार्मिक मान्यता के अनुसार मां विंध्यवासिनी, मां काली और मां अष्टभुजी के दर्शन के साथ त्रिकोण परिक्रमा का विशेष महत्व है। सप्तमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद त्रिकोण मार्ग का रुख किया। अष्टभुजी पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजी के दरबार में पहुंचकर भक्तों ने पूजा-अर्चना की। तीनों देवियों के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
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गड़बड़ा धाम: उमड़े 60 हजार श्रद्धालु
हलिया। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर शनिवार को गड़बड़ा शीतला धाम में 60 हजार श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन-पूजन किए। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। मंगला आरती के बाद से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने सेवटी नदी में स्नान के बाद मां के दरबार में मत्था टेका। मेले में सुरक्षा के मद्देनजर हलिया थाना प्रभारी राजीव श्रीवास्तव और ड्रमंडगंज थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार पुलिस टीम के साथ गश्त करते रहे।
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- मां कालरात्रि की आराधना कर भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि, विंध्यधाम से त्रिकोण परिक्रमा पथ पर गूंजे जयकारे
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर मां कालरात्री की अराधना विशेष फलदायी है। मंदिरों में वरमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी के मंत्रों का जाप किया गया। शनिवार को मां विंध्यवासिनी के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि तीन लाख से ज्यादा भक्तों ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। आदिशक्ति के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं।
मां के दर्शन कर भक्तों ने सुख-समृद्धि, आरोग्य और परिवार की मंगलकामना की। मां विंध्यवासिनी के चरणों में शीश नवाने के बाद श्रद्धालुओं ने त्रिकोण परिक्रमा कर मां काली और मां अष्टभुजी के दरबार में भी हाजिरी लगाई। घंटे-घड़ियाल की गूंज और जयकारों से पूरा विंध्यधाम दिनभर भक्तिमय बना रहा। नवरात्र की सप्तमी का शक्ति उपासना में विशेष महत्व है। मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। जीवन में साहस, शक्ति व अभय का संचार होता है।
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मंगल आरती के बाद शुरू हुआ दर्शन-पूजन
मां विंध्यवासिनी मंदिर में भोर में मंगल आरती के बाद कपाट खुलते ही दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। हाथों में नारियल, चुनरी और पुष्प लिए श्रद्धालु मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन पाने के लिए आतुर दिखे। किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर मां के चरणों में शीश नवाया तो किसी ने झांकी से दर्शन कर आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर में दुर्गा चालीसा और दुर्गा स्तुति के स्वर गूंजते रहे।
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त्रिकोण परिक्रमा कर किए तीनों देवियों के दर्शन
विंध्यधाम की धार्मिक मान्यता के अनुसार मां विंध्यवासिनी, मां काली और मां अष्टभुजी के दर्शन के साथ त्रिकोण परिक्रमा का विशेष महत्व है। सप्तमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद त्रिकोण मार्ग का रुख किया। अष्टभुजी पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजी के दरबार में पहुंचकर भक्तों ने पूजा-अर्चना की। तीनों देवियों के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
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गड़बड़ा धाम: उमड़े 60 हजार श्रद्धालु
हलिया। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर शनिवार को गड़बड़ा शीतला धाम में 60 हजार श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन-पूजन किए। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। मंगला आरती के बाद से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने सेवटी नदी में स्नान के बाद मां के दरबार में मत्था टेका। मेले में सुरक्षा के मद्देनजर हलिया थाना प्रभारी राजीव श्रीवास्तव और ड्रमंडगंज थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार पुलिस टीम के साथ गश्त करते रहे।

मां विंध्यवासिनी।-संवाद।

मां विंध्यवासिनी।-संवाद।

मां विंध्यवासिनी।-संवाद।