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दस हजार मानदेय नामंजूर
mirzapur news
Updated Fri, 08 Sep 2017 12:13 AM IST
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धरना देते शिक्षा मित्र।
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शिक्षामित्रों ने गुरुवार को अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार की वादाखिलाफी पर रोष जताया। शिक्षामित्रों ने प्रदेश सरकार द्वारा दस हजार मानदेय देने और मूल स्कूलों पर वापसी का विरोध किया। कहा कि सरकार समान कार्य का समान वेतन निर्धारित करे।
संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित धरना प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष अजयधर दूबे ने कहा कि शिक्षामित्रों के प्रांतीय प्रतिनिधि मंडल का शासन से वार्ता के दौरान एक तरफ समान कार्य हेतु समान वेतन देने की और टीईटी में छूट देने की विधिक राय लेने की बात करते हैं, तो दूसरी तरह सरकार दोहरी नीति अपनाते हुए आनन फानन में कैबिनेट मिटिंग बुला कर दस हजार मानदेय और मूल विद्यालयों में लौटने की घोषणा करती है।
विनोद कुमार सरोज ने कहा कि सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों को महज दस हजार मानदेय देते हुए उनके मूल विद्यालयों में पद स्थापित करने का निर्णय लिया जा रहा है जबकि शासन से वार्ता के दौरान इस तरह का कोई समझौता नहीं हुआ था। धरने का संचालन आदिशंकर दूबे ने किया। इस दौरान रामदेव यादव, बीडी त्रिपाठी, दिनेश सिंह, माला, विनय सिंह, माधुरी सिंह, रजनी, संजिता, मयंक प्रभा, राजेश दूबे, मनोज दूबे, अशोक यादव, दीपेंद्रसिंह ने सरकार की नीतियों की निंदा की। इस दौरान दुर्गा सिंह, दिलीप सिंह, संदीप शर्मा, अशोक राय, राजेश मिश्रा, महेश उपाध्याय, विष्णु मिश्रा, रविशंकर शुक्ल, नसीरूद्दीन, राम गोपाल यादव, राजेश बिंद, राज कुमार, कृपाशंकर, इंद्र बहादुर आदि मौजूद रहे।
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संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित धरना प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष अजयधर दूबे ने कहा कि शिक्षामित्रों के प्रांतीय प्रतिनिधि मंडल का शासन से वार्ता के दौरान एक तरफ समान कार्य हेतु समान वेतन देने की और टीईटी में छूट देने की विधिक राय लेने की बात करते हैं, तो दूसरी तरह सरकार दोहरी नीति अपनाते हुए आनन फानन में कैबिनेट मिटिंग बुला कर दस हजार मानदेय और मूल विद्यालयों में लौटने की घोषणा करती है।
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विनोद कुमार सरोज ने कहा कि सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों को महज दस हजार मानदेय देते हुए उनके मूल विद्यालयों में पद स्थापित करने का निर्णय लिया जा रहा है जबकि शासन से वार्ता के दौरान इस तरह का कोई समझौता नहीं हुआ था। धरने का संचालन आदिशंकर दूबे ने किया। इस दौरान रामदेव यादव, बीडी त्रिपाठी, दिनेश सिंह, माला, विनय सिंह, माधुरी सिंह, रजनी, संजिता, मयंक प्रभा, राजेश दूबे, मनोज दूबे, अशोक यादव, दीपेंद्रसिंह ने सरकार की नीतियों की निंदा की। इस दौरान दुर्गा सिंह, दिलीप सिंह, संदीप शर्मा, अशोक राय, राजेश मिश्रा, महेश उपाध्याय, विष्णु मिश्रा, रविशंकर शुक्ल, नसीरूद्दीन, राम गोपाल यादव, राजेश बिंद, राज कुमार, कृपाशंकर, इंद्र बहादुर आदि मौजूद रहे।
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