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Mirzapur News: 40 डिग्री पहुंचा तापमान, गर्मी ने किया बेहाल
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मिर्जापुर। बार-बार मौसम का मिजाज बदलने के साथ तापमान बढ़ने का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। दो दिन में दो डिग्री पारा बढ़ गया है।
शुक्रवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री पहुंचने से लोग बेहाल हो गए। तेज धूप की वजह से घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, बाजारों में भी चहल-पहल काफी कम थी।
शुक्रवार को सुबह तो बाछल छाए रहे लेकिन नौ बजे से तेज धूप निकल आई, जिससे लोग बेहाल हो उठे। दोपहर में गर्म हवाएं चलने से बदल झुलता रहा। भीषण उमस और गर्मी की वजह से पंखे और कूलर भी बेअसर हो गए।
अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 39 और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण बार-बार मौसम बदल रहा है। एक-दो दिनों में फिर से मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। कहीं बूंदाबादी तो कहीं तेज बारिश हो सकती है।
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मौसम के बदलने से फसलों को हो सकता है नुकसान : ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह का कहना है कि मौसम के उतार-चढ़ाव से किसानों के लिए चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों की पैदावार और किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को बाजरा, मक्का जैसी फसलें बोनी चाहिए, जो सूखा और अधिक तापमान सहन कर सकें।
तापमान को ध्यान में रखकर डालें नर्सरी : मौसम वैज्ञानिक शिवमंगल सिंह ने बताया कि मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर किसान फसलों की बुवाई करें। तापमान के उतार-चढ़ाव से कुछ फसलों को नुकसान होता है, जबकि कुछ फसलें इन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि तापमान को ध्यान में रखकर धान की नर्सरी डालें। अधिक गर्मी और पानी की कमी से बीज अंकुरण पर असर पड़ सकता है।
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शुक्रवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री पहुंचने से लोग बेहाल हो गए। तेज धूप की वजह से घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, बाजारों में भी चहल-पहल काफी कम थी।
शुक्रवार को सुबह तो बाछल छाए रहे लेकिन नौ बजे से तेज धूप निकल आई, जिससे लोग बेहाल हो उठे। दोपहर में गर्म हवाएं चलने से बदल झुलता रहा। भीषण उमस और गर्मी की वजह से पंखे और कूलर भी बेअसर हो गए।
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अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 39 और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण बार-बार मौसम बदल रहा है। एक-दो दिनों में फिर से मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। कहीं बूंदाबादी तो कहीं तेज बारिश हो सकती है।
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मौसम के बदलने से फसलों को हो सकता है नुकसान : ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह का कहना है कि मौसम के उतार-चढ़ाव से किसानों के लिए चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों की पैदावार और किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को बाजरा, मक्का जैसी फसलें बोनी चाहिए, जो सूखा और अधिक तापमान सहन कर सकें।
तापमान को ध्यान में रखकर डालें नर्सरी : मौसम वैज्ञानिक शिवमंगल सिंह ने बताया कि मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर किसान फसलों की बुवाई करें। तापमान के उतार-चढ़ाव से कुछ फसलों को नुकसान होता है, जबकि कुछ फसलें इन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि तापमान को ध्यान में रखकर धान की नर्सरी डालें। अधिक गर्मी और पानी की कमी से बीज अंकुरण पर असर पड़ सकता है।