मिर्जापुर। जिले में शुक्रवार की सुबह गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हुई तो दोपहर बाद झमाझम बादल बरसे। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। तीन डिग्री तापमान लुढ़कने से पूरा जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। वहीं, दलहनी, तिलहनी के साथ ही आलू और मटर की फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सुबह कोहरे के साथ आसमान में बादल छाए थे। कुछ देर तक बूंदाबादी होने के बाद मौसम खुल गया लेकिन आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर बाद फिर से झमाझम बारिश हुई, जिससे सड़कों और गलियों के गड्ढ़ों में पानी भर गए। तेज बारिश के चलते पारा लुढ़क जाने से गलन और ठंड बढ़ गई। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जबकि बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा। तीन डिग्री तापमान लुढ़कने से बढ़ी ठंड के चलते लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ठंड के चलते रोडवेज, रेलवे स्टेशन परिसर सहित बाजारों में भी पहले की तरह भीड़-भाड़ नहीं है। आफिस, कार्यालय सहित व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हीटर, ब्लोअर का प्रयोग कर लोग दिन व्यतीत करते नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित चट्टी और चौराहों पर भी लोग ठंड से बेहाल हैं। अलाव की व्यवस्था न होने से लोग कांपते रहे हैं। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह व तकनीकी अधिकारी (मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह ने बताया लगातार तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते मौसम बिगड़ रहा है। फिलहाल अभी दो, तीन दिनोंं तक ऐसे ही मौसम रहने की संभावना। मौसम वैज्ञानिकाें ने पशुओं को किसी छायादार स्थान पर ही बांधे जाने और पशुबाड़े में धूंआं आदि किए जाने का सुझाव दिया।