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Mirzapur News: डेनमार्क के राजदूत ने 305 करोड़ रुपये की महादेव परियोजना का किया निरीक्षण
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एडीएम विजेता से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में जानकारी लेते डेनमार्क के राजदूत रासमस एब्ल्ड
मिर्जापुर। डेनमार्क के राजदूत रासमस एब्ल्डगार्ड क्रिस्टेंसन मंगलवार को मिर्जापुर पहुंचे। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत संचालित 305.30 करोड़ रुपये की महादेव परियोजना का जायजा लिया।
राजदूत ने लालगंज के नरैना कला स्थित जल शोधन संयंत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने दुहौवा-परसिया में बने उच्च जलाशय टैंक का भी अवलोकन किया और जलार्पण किया।
नरैना कला में राजदूत ने जल शोधन संयंत्र का गहन निरीक्षण किया। पानी के स्रोत से लेकर शोधन और घरों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को समझा। राजदूत ने अधिकारियों से पानी की गुणवत्ता, शोधन के विभिन्न चरणों और क्लोरीनेशन की जानकारी ली। स्रोत से मिलने वाले पानी की प्रारंभिक गुणवत्ता पर सवाल किए।
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शोधन के बाद गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जांच प्रक्रियाओं को भी पूछा। एनसीसी कंपनी के प्रमुख विनोद मिश्रा ने उन्हें जल शोधन की पूरी प्रक्रिया समझाई। राजदूत ने जल परीक्षण प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने पानी के नमूने लेने और उनकी जांच प्रक्रिया को करीब से देखा। राजदूत ने स्वच्छ पेयजल से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़े असर की जानकारी ली। खासकर, जलजनित बीमारियों में कमी और जीवन स्तर में बदलाव पर सवाल किए।
परियोजना की प्रगति और आंकड़े जल निगम के अधिशासी अभियंता विश्वजीत ने महादेव परियोजना के तहत हुए कार्यों की जानकारी दी।
बताया कि जिले में 1,483.9 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके अलावा, 25 ओवरहेड टैंक का निर्माण किया गया है। योजना से अब तक 82 ग्राम पंचायतों और 258 राजस्व गांवों को लाभ मिला है। 3,642 परिवारों को पानी के कनेक्शन दिए जा चुके हैं। एडीएम विजेता ने भी परियोजना की प्रगति और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा की जानकारी दी।
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राजदूत ने लालगंज के नरैना कला स्थित जल शोधन संयंत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने दुहौवा-परसिया में बने उच्च जलाशय टैंक का भी अवलोकन किया और जलार्पण किया।
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नरैना कला में राजदूत ने जल शोधन संयंत्र का गहन निरीक्षण किया। पानी के स्रोत से लेकर शोधन और घरों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को समझा। राजदूत ने अधिकारियों से पानी की गुणवत्ता, शोधन के विभिन्न चरणों और क्लोरीनेशन की जानकारी ली। स्रोत से मिलने वाले पानी की प्रारंभिक गुणवत्ता पर सवाल किए।
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शोधन के बाद गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जांच प्रक्रियाओं को भी पूछा। एनसीसी कंपनी के प्रमुख विनोद मिश्रा ने उन्हें जल शोधन की पूरी प्रक्रिया समझाई। राजदूत ने जल परीक्षण प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने पानी के नमूने लेने और उनकी जांच प्रक्रिया को करीब से देखा। राजदूत ने स्वच्छ पेयजल से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़े असर की जानकारी ली। खासकर, जलजनित बीमारियों में कमी और जीवन स्तर में बदलाव पर सवाल किए।
परियोजना की प्रगति और आंकड़े जल निगम के अधिशासी अभियंता विश्वजीत ने महादेव परियोजना के तहत हुए कार्यों की जानकारी दी।
बताया कि जिले में 1,483.9 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके अलावा, 25 ओवरहेड टैंक का निर्माण किया गया है। योजना से अब तक 82 ग्राम पंचायतों और 258 राजस्व गांवों को लाभ मिला है। 3,642 परिवारों को पानी के कनेक्शन दिए जा चुके हैं। एडीएम विजेता ने भी परियोजना की प्रगति और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा की जानकारी दी।

एडीएम विजेता से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में जानकारी लेते डेनमार्क के राजदूत रासमस एब्ल्ड