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Mirzapur News: अपेक्षाओं के बोझ के चलते जेंजी में आ रहे आत्महत्या के विचार
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आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। अपेक्षाओं के बोझ, निराशा, उदासी और असहायता के चलते जेंजी जनरेशन में आत्महत्या के विचार तेजी से आ रहे हैं। इस कारण जेंजी जनरेशन में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विभाग के मनोवैज्ञानिक डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि डिप्रेशन के चलते ही आत्महत्या के विचार आते हैं। डिप्रेशन बढ़ जाता है तो लोग आत्महत्या करते हैं। मानसिक रोग विभाग में प्रतिदिन 100 मरीज आ रहे हैं। इनमें 20 डिप्रेशन के मरीज होते हैं, जिनको आत्महत्या के विचार आते हैं। इनमें 10 जेंजी जनरेशन के होते हैं। आज के समय लोग एक या दो बच्चे पैदा करते हैं। उन पर अपेक्षाओं का बोझ अधिक होता है। जेंजी जनरेशन को माता-पिता किसी बात को लेकर डांट देते हैं तो इससे वे डिप्रेशन और एंजाइटी के शिकार हो जाते हैं। डिप्रेशन भी इमरजेंसी है। 14 दिन तक डिप्रेशन में रहने पर आत्महत्या करने के विचार तेजी से आते हैं। ऐसे में कोई डिप्रेशन में है तो उससे बात करें और मनोचिकित्सक को दिखाएं।
पढ़ाई के दबाव में छात्रा ने ढेर सारी दवा खा लीइंटर की छात्रा को पढ़ाई का दबाव दिया जा रहा था। परिजन उसे दिखा चुके थे। अचानक उसने दी गई सारी दवा खा ली। ऐसा डिप्रेशन के चलते किया है। पढ़ाई के चलते दबाव में जान देने के मामले पहले से बढ़ गए हैं।
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हर पांचवें दिन जहर खाकर और 10वें दिन फंदे से लटककर जान देने की घटनाएं
मिर्जापुर। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक जिले में माता-पिता की डांट पर जहर खाकर जान देने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। हर दूसरे-तीसरे दिन जहर या विषाक्त पदार्थ खाने की शिकायत आती है। पांच से छह दिन में जहर खाने से मौत होती है और 10 से 12 दिन में फंदे पर लटककर जान देने के मामले आते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। अपेक्षाओं के बोझ, निराशा, उदासी और असहायता के चलते जेंजी जनरेशन में आत्महत्या के विचार तेजी से आ रहे हैं। इस कारण जेंजी जनरेशन में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विभाग के मनोवैज्ञानिक डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि डिप्रेशन के चलते ही आत्महत्या के विचार आते हैं। डिप्रेशन बढ़ जाता है तो लोग आत्महत्या करते हैं। मानसिक रोग विभाग में प्रतिदिन 100 मरीज आ रहे हैं। इनमें 20 डिप्रेशन के मरीज होते हैं, जिनको आत्महत्या के विचार आते हैं। इनमें 10 जेंजी जनरेशन के होते हैं। आज के समय लोग एक या दो बच्चे पैदा करते हैं। उन पर अपेक्षाओं का बोझ अधिक होता है। जेंजी जनरेशन को माता-पिता किसी बात को लेकर डांट देते हैं तो इससे वे डिप्रेशन और एंजाइटी के शिकार हो जाते हैं। डिप्रेशन भी इमरजेंसी है। 14 दिन तक डिप्रेशन में रहने पर आत्महत्या करने के विचार तेजी से आते हैं। ऐसे में कोई डिप्रेशन में है तो उससे बात करें और मनोचिकित्सक को दिखाएं।
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पढ़ाई के दबाव में छात्रा ने ढेर सारी दवा खा लीइंटर की छात्रा को पढ़ाई का दबाव दिया जा रहा था। परिजन उसे दिखा चुके थे। अचानक उसने दी गई सारी दवा खा ली। ऐसा डिप्रेशन के चलते किया है। पढ़ाई के चलते दबाव में जान देने के मामले पहले से बढ़ गए हैं।
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हर पांचवें दिन जहर खाकर और 10वें दिन फंदे से लटककर जान देने की घटनाएं
मिर्जापुर। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक जिले में माता-पिता की डांट पर जहर खाकर जान देने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। हर दूसरे-तीसरे दिन जहर या विषाक्त पदार्थ खाने की शिकायत आती है। पांच से छह दिन में जहर खाने से मौत होती है और 10 से 12 दिन में फंदे पर लटककर जान देने के मामले आते हैं।