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Mirzapur News: कथा वाचिका की गुरुग्राम के निजी अस्पताल में मौत, परिजनों का आरोप-लापरवाही से गई जान
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भागवत कथा वाचिका कु विशाखा दुबे।
जिगना। छानबे क्षेत्र के देवरी में सोमवार सुबह 24 वर्षीया भागवतकथा वाचिका विशाखा दुबे का शव पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह से ही श्रद्धांजलि देनेवालों का तांता लगा रहा।
कथा वाचिका के भाई सचींद्र दुबे ने बताया कि तबीयत खराब होने पर हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक हाॅस्पिटल में इलाज के दौरान शुक्रवार 20 फरवरी को मृत्यु हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण विशाखा की हालत गंभीर हुई और समय रहते उचित इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि मौत के बाद करीब 24 घंटे तक अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों को नहीं सौंपा।
काफी हो हल्ला और विवाद होने के बाद शव परिजनों को सौंपा गया। मौत के चौथे दिन जैसे ही विशाखा दुबे का पार्थिव शरीर देवरी गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
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गांव और आस-पास लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। विशाखा दुबे दो भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटी थीं। मात्र 10 वर्ष की आयु में वृंदावन चली गईं और वहीं से उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद पिछले 8 वर्षों से लगातार भागवत कथा वाचन कर रही थीं।
कम उम्र में ही उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में अलग पहचान बना ली थी। पिता रामधर दुबे संतों की सेवा में जुड़े रहते हैं, जबकि माता का देहांत तीन वर्ष पूर्व हो चुका है। कथा वाचिका का अंतिम संस्कार राम गया गंगा घाट शिवपुर में किया गया।
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कथा वाचिका के भाई सचींद्र दुबे ने बताया कि तबीयत खराब होने पर हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक हाॅस्पिटल में इलाज के दौरान शुक्रवार 20 फरवरी को मृत्यु हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण विशाखा की हालत गंभीर हुई और समय रहते उचित इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि मौत के बाद करीब 24 घंटे तक अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों को नहीं सौंपा।
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काफी हो हल्ला और विवाद होने के बाद शव परिजनों को सौंपा गया। मौत के चौथे दिन जैसे ही विशाखा दुबे का पार्थिव शरीर देवरी गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
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गांव और आस-पास लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। विशाखा दुबे दो भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटी थीं। मात्र 10 वर्ष की आयु में वृंदावन चली गईं और वहीं से उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद पिछले 8 वर्षों से लगातार भागवत कथा वाचन कर रही थीं।
कम उम्र में ही उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में अलग पहचान बना ली थी। पिता रामधर दुबे संतों की सेवा में जुड़े रहते हैं, जबकि माता का देहांत तीन वर्ष पूर्व हो चुका है। कथा वाचिका का अंतिम संस्कार राम गया गंगा घाट शिवपुर में किया गया।