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सिद्धनाथ दरी पर सुविधाओं का टोटा, सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:56 AM IST
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पर्यटन स्थल सिद्धनाथ दरी का विहंगम दृश्य।
- फोटो : mirzapur
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प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर मौजूद चुनार तहसील का प्रसिद्ध जल प्रपात एवं पर्यटन स्थल सिद्धनाथ का दरी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
पूरे वर्ष पर्यटकों के आवाजाही के बाबजूद इस पर्यटन स्थल पर मूलभूत सुविधाएं आज तक मुहैया नहीं करायी जा सकीं लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों से वाहन स्टैंड के नाम पर ठेकेदार जबरदस्ती सैकड़ों रुपये वसूल रहे हैं तो दूसरी तरफ पर्यटकों की सुरक्षा का कोई इंतजाम न होने से हर समय यहां शोहदों, उचक्कों एवं नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। जो परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों के साथ र्दुव्यवहार करते है।
वाराणसी मिर्जापुर राजमार्ग से चुनार सक्तेशगढ़ जाने वाले पहाड़ी मार्ग पर 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सिद्धनाथ की दरी पर अब कोई पर्यटक परिवार के साथ नहीं जाना पसंद करता है। पर्यटन मानचित्र में दर्ज होने के कारण यहां पूरे वर्ष सैलानी आते हैं। इसके बाबजूद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग इस मनोरम पहाड़ी जल प्रपात के रख रखाव के प्रति पूरी तरह उदासीन है।
वर्ष 2011-12 में प्रदेश सरकार ने सिद्धनाथ की दरी के सौंर्दयीकरण एवं सुविधाओं के लिए तीन करोड़ रुपये जारी किया। जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत अभिजात ने जिला पंचायत और पर्यटन विभाग द्वारा यहां छोटी बड़ी गाड़ियों के लिए वाहन स्टैंड, सीढ़ी, पार्क, बगीचा, किचन और दरी के दक्षिण स्थित जर्जर भवन का नवनिर्माण कराया।
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इसके अलावा झरने में सुरक्षित स्नान के लिए सुरक्षा स्तंभ लगावाया। घटिया निर्माण होने के कारण बरसात में सभी निर्माण ढह गए ।
इसके बाद आज तक यहां कोई कार्य नहीं कराया गया।
अलबत्ता हर वर्ष जिला पंचायत यहां वाहन स्टैंड का ठेका देता है। ठेकेदार व उसके आदमी यहां आने वाले सैलानियों से स्टैंड के नाम पर जबरदस्ती सैकड़ों रुपये वसूल करते हैं। इसके अलावा यहां आने वाली महिला सैलानियों और बच्चों की सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है।
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पूरे वर्ष पर्यटकों के आवाजाही के बाबजूद इस पर्यटन स्थल पर मूलभूत सुविधाएं आज तक मुहैया नहीं करायी जा सकीं लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों से वाहन स्टैंड के नाम पर ठेकेदार जबरदस्ती सैकड़ों रुपये वसूल रहे हैं तो दूसरी तरफ पर्यटकों की सुरक्षा का कोई इंतजाम न होने से हर समय यहां शोहदों, उचक्कों एवं नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। जो परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों के साथ र्दुव्यवहार करते है।
वाराणसी मिर्जापुर राजमार्ग से चुनार सक्तेशगढ़ जाने वाले पहाड़ी मार्ग पर 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सिद्धनाथ की दरी पर अब कोई पर्यटक परिवार के साथ नहीं जाना पसंद करता है। पर्यटन मानचित्र में दर्ज होने के कारण यहां पूरे वर्ष सैलानी आते हैं। इसके बाबजूद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग इस मनोरम पहाड़ी जल प्रपात के रख रखाव के प्रति पूरी तरह उदासीन है।
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वर्ष 2011-12 में प्रदेश सरकार ने सिद्धनाथ की दरी के सौंर्दयीकरण एवं सुविधाओं के लिए तीन करोड़ रुपये जारी किया। जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत अभिजात ने जिला पंचायत और पर्यटन विभाग द्वारा यहां छोटी बड़ी गाड़ियों के लिए वाहन स्टैंड, सीढ़ी, पार्क, बगीचा, किचन और दरी के दक्षिण स्थित जर्जर भवन का नवनिर्माण कराया।
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इसके अलावा झरने में सुरक्षित स्नान के लिए सुरक्षा स्तंभ लगावाया। घटिया निर्माण होने के कारण बरसात में सभी निर्माण ढह गए ।
इसके बाद आज तक यहां कोई कार्य नहीं कराया गया।
अलबत्ता हर वर्ष जिला पंचायत यहां वाहन स्टैंड का ठेका देता है। ठेकेदार व उसके आदमी यहां आने वाले सैलानियों से स्टैंड के नाम पर जबरदस्ती सैकड़ों रुपये वसूल करते हैं। इसके अलावा यहां आने वाली महिला सैलानियों और बच्चों की सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है।