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घोटाला दर घोटाला, नहीं हुई कार्रवाई
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मिर्जापुर। सबसे अधिक बजट वाले मनरेगा में सबसे अधिक घोटाले भी हो रहे हैं लेकिन अभी तक उन पर रोक नहीं लग सकी है। कई जगहों पर तो मामला खुलने के पहले ही बंद हो गया। इसमें हलिया में अधिक घोटाले हो रहे हैं। हलिया, विकास खंड में 2007 से 2010 में हुए क्षेत्र पंचायत में मनरेगा के कार्य हुए। इसमें लगभग पौने चार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया। मामला आगे बढ़ा तो उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ के दो न्यायाधीशों की बेंच ने मनरेगा योजना में हुए कार्यों की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद से हलिया ब्लॉक में सीबीआई मनरेगा कार्यों की जांच कर रही है। इसके पहले स्पेशल क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अशरफ सिद्दीकी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जनपद में आकर जांच कर चुकी है। सीबीआई हलिया ब्लॉक में हुए पौने चार करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित फाइलों को खंगाल चुकी है। सीबीआई 2012 में हलिया थाने में 54 मुकदमेे दर्ज करा चुकी है। लेकिन जांच अभी भी चल रही है।
इसी ब्लाक में अभी हाल में ही मनरेगा के तहत हो चुके कार्यों के स्थल पर आरसीसी के बजाय पटिया का बोर्ड लगने की जांच का आदेश सीडीओ ने दिया था। इसमें एसडीएम लालगंज अमित शुक्ला सहित लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की तीन सदस्यीय टीम जांच कर चुकी है। एसडीएम ने कार्य से जुड़े लोगों के बयान भी लिए। पटिया के बोर्ड निर्माण करा रही उज्जवला समूह के कोषाध्यक्ष पार्वती का बयान दर्ज किया था। इसमें एक सौ 36 पटिया का भुगतान हो चुका था। जिसपर लागत 200 से 300 रुपये आई जबकि प्रति बोर्ड तीन हजार से पांच हजार रुपये तक का भुुगतान कराया जा रहा है। 136 बोर्ड का भुगतान करा लिया गया है। ज्यादातर बोर्ड के लिए पांच हजार रुपये लिए गए हैं। दो हजार से ज्यादा बोर्ड क्षेत्र में लगाए जाने थे। जिस पर पांच लाख 66 हजार 500 रुपए का भुगतान भी करा लिया गया। पटिया के बोर्ड के संबंध में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। यह भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। डीसी मनरेगा मुहम्मद नफीस ने ऐसी किसी जानकारी के प्रति अनभिज्ञता प्रकट की। जांच की मांग किया है।
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इसी ब्लाक में अभी हाल में ही मनरेगा के तहत हो चुके कार्यों के स्थल पर आरसीसी के बजाय पटिया का बोर्ड लगने की जांच का आदेश सीडीओ ने दिया था। इसमें एसडीएम लालगंज अमित शुक्ला सहित लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की तीन सदस्यीय टीम जांच कर चुकी है। एसडीएम ने कार्य से जुड़े लोगों के बयान भी लिए। पटिया के बोर्ड निर्माण करा रही उज्जवला समूह के कोषाध्यक्ष पार्वती का बयान दर्ज किया था। इसमें एक सौ 36 पटिया का भुगतान हो चुका था। जिसपर लागत 200 से 300 रुपये आई जबकि प्रति बोर्ड तीन हजार से पांच हजार रुपये तक का भुुगतान कराया जा रहा है। 136 बोर्ड का भुगतान करा लिया गया है। ज्यादातर बोर्ड के लिए पांच हजार रुपये लिए गए हैं। दो हजार से ज्यादा बोर्ड क्षेत्र में लगाए जाने थे। जिस पर पांच लाख 66 हजार 500 रुपए का भुगतान भी करा लिया गया। पटिया के बोर्ड के संबंध में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। यह भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। डीसी मनरेगा मुहम्मद नफीस ने ऐसी किसी जानकारी के प्रति अनभिज्ञता प्रकट की। जांच की मांग किया है।
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