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घोटाले के आरोपी अवर अभियंता दीपक पर मुकदमा दर्ज

Mon, 01 Aug 2022 12:33 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2022 12:33 AM IST
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Scam accused under engineer Deepak filed a case
सेतु निगम द्वारा बनवाए जा रहे आरओबी के लिए उपलब्ध निर्माण सामग्री का गबन करने और कार्य स्थल की माप पुस्तिका व अन्य दस्तावेज कार्यालय में नहीं जमा करने पर विभाग के अवर अभियंता सिविल दीपक मिश्रा के खिलाफ विंध्याचल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह मुकदमा सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक आरएस उपाध्याय ने आयुक्त विंध्याचल मंडल योगेश्वर राम मिश्र के निर्देश पर दर्ज कराया है ।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर छह मई को प्रभारी मंत्री ने भ्रमण कर विकास कार्यों का जायजा लिया था। उस दौरान विधायकों ने आरओबी का निर्माण कार्य धीमी गति से होने की शिकायत की थी। जिसके बाद टीएसी से जांच कराए जाने का निर्देश दिया गया था। टीएसी की जांच में शिवपुर आरओबी और गैपुरा-मिर्जापुर सेतू निर्माण की प्रगति में लापरवाही मिलने पर आयुक्त ने संबंधित अभियंता के स्थानांतरण के लिए प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा। जिसके बाद अवर अभियंता दीपक मिश्रा का स्थानांतरण गाजियाबाद कर दिया गया। कार्य में शिथिलता बरतने के कारण उनको कार्यमुक्त कर दिया गया। कार्यस्थल से सीमेंट, स्टील आदि के सामान की हेराफेरी का मामला भी जांच में सामने आया। इस पर आयुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने समीक्षा बैठक में परियोजना प्रबंधक को अवर अभियंता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक आरएस उपाध्याय ने बताया कि अवर अभियंता दीपक मिश्रा पर आरोप है कि दोनों निर्माणाधीन पुलों की माप पुस्तिका व क्वालिटी कंट्रोल से संबंधित अभिलेख अभी तक कार्यालय में जमा नहीं किया है। उन्होंने बताया कि ठेकेेदारों का जरूरी कागजात भी जमा नहीं कराया गया है। समय से भुगतान नहीं होने से ठेकेदार द्वारा कार्य करने से इंकार किया जा रहा था। इसके चलते सरकारी कार्य की प्रगति में गतिरोध पैदा हो रहा था। उन्होंने बताया कि मंडलायुक्त के निर्देश के बाद 29 जुलाई को विंध्याचल थाने में तहरीर देकर अवर अभियंता दीपक मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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टीएसी की जांच के बाद विभागीय स्तर पर जांच कमेटी का गठन किया गया। जांच कमेटी में अवर अभियंता अनिल दुबे, रियाज अहमद, अरविंद कुमार सिंह, सहायक अभियंता विजय कुमार त्रिपाठी, जय प्रकाश विश्वकर्मा व लेखाकार आशुतोष पांडेय शामिल थे। कमेटी ने 15 जून को जांच की। जिसमें तीन स्थानों पर 12 निर्माण सामग्रियां नहीं मिलीं। इनमें मोटा बालू, बड़ी गिट्टी, छोटी गिट्टी, सरिया, सीमेंट, मोटी प्लेट आदि शामिल हैं। जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 40 लाख रुपये है। ये सामान साइट पर उतारे ही नहीं गए। इस कारण टीएसी की जांच में अनियमितता की बात कही गई थी।
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जिले में गैपुरा में रेल ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण 61 करोड़ रुपये की लागत से आठ माह पहले शुरू किया गया था। इसके अलावा विंध्याचल में आरओबी का निर्माण जनवरी 2021 में लगभग 45 करोड़ की लागत से शुरू किया गया था। जांच रिपोर्ट में दोनों पुलों के निर्माण में अनियमितता की बात कही गई है। विंध्याचल कोतवाल विनीत राय का कहना है कि सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक आरएस उपाध्याय की तहरीर पर अवर अभियंता दीपक मिश्रा के खिलाफ गबन करने और सरकारी दस्तावेज को नष्ट करने संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक आरएस उपाध्याय का कहना है कि टीएसी जांच में अनियमितता पाए जाने पर अवर अभियंता दीपक मिश्रा का स्थानांतरण किया गया था। इसके बाद गठित कमेटी की जांच में 40 लाख रुपये के निर्माण सामग्री की हेराफेरी की बात सामने आई। आयुक्त व जिलाधिकारी के निर्देश पर विंध्याचल थाने में संबंधित अवर अभियंता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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