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धान क्रय केंद्र बंद मिला
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:15 AM IST
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अंबेडकरनगर के सिझौलिया में नोटबंदी के चलते नहीं बिक पा रहा किसानों का धान।
- फोटो : अमर उजाला
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किसानों की शिकायत पर विपणन निरीक्षक मड़िहान अजित प्रताप सिंह ने भारतीय खाद्य निगम के मड़िहान धान क्रय केंद्र का निरीक्षण किया। केंद्र बंद कर प्रभारी गायब थे। आरएफसी और जिला प्रशासन ने उन्होंने धान क्रय केंद्र प्रभारी पर कार्रवाई की संस्तुति की है।
तहसील क्षेत्र के मड़िहान कस्बा स्थित भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्र पर लगभग साढ़े तीन हजार कुंतल धान खरीद दिखाया गया है। जबकि किसान धान बेचने के लिए केंद्र का चक्कर काट रहे हैं। केंद्र प्रभारी द्वारा कभी बोरी की कमी, कभी पैसे का अभाव तो कभी गोदाम में जगह नही है, बता कर किसानों को वापस किया जा रहा है। जब कि केंद्र में सम्मिलित पटेवर, देवरीकला, मड़िहान, हसरा, बहुती, बेलहरा, हड़ौरा, हरदीमिश्र, धनावल, देवरीउत्तर, रामपुर ठाकुर दयाल, गुलालपुर, कोटवा पांडेय, राजापुर, पचोखरा, नौडिहा लालपुर, कुन्दरुफ आदि गांवों के सैकड़ो किसान धान बेचने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्र पर प्रभारी द्वारा बिचौलियों व दलालों का धान कमीशन पर ख़रीदा जा रहा है। उपज का समर्थन मूल्य किसानों को नही मिल रहा है। जिससे किसान औने-पौने दाम पर उपज को बेचने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों को किसानो की चिंता कम नोटबंदी की चिंता अधिक है। जिससे कोई भी जनप्रतिनिधि की समस्या को उठाने की जहमत नहीं उठा रहा है। इससे ग्रामीणों में खासा रोष व्याप्त है।
तहसील क्षेत्र के मड़िहान कस्बा स्थित भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्र पर लगभग साढ़े तीन हजार कुंतल धान खरीद दिखाया गया है। जबकि किसान धान बेचने के लिए केंद्र का चक्कर काट रहे हैं। केंद्र प्रभारी द्वारा कभी बोरी की कमी, कभी पैसे का अभाव तो कभी गोदाम में जगह नही है, बता कर किसानों को वापस किया जा रहा है। जब कि केंद्र में सम्मिलित पटेवर, देवरीकला, मड़िहान, हसरा, बहुती, बेलहरा, हड़ौरा, हरदीमिश्र, धनावल, देवरीउत्तर, रामपुर ठाकुर दयाल, गुलालपुर, कोटवा पांडेय, राजापुर, पचोखरा, नौडिहा लालपुर, कुन्दरुफ आदि गांवों के सैकड़ो किसान धान बेचने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
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किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्र पर प्रभारी द्वारा बिचौलियों व दलालों का धान कमीशन पर ख़रीदा जा रहा है। उपज का समर्थन मूल्य किसानों को नही मिल रहा है। जिससे किसान औने-पौने दाम पर उपज को बेचने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों को किसानो की चिंता कम नोटबंदी की चिंता अधिक है। जिससे कोई भी जनप्रतिनिधि की समस्या को उठाने की जहमत नहीं उठा रहा है। इससे ग्रामीणों में खासा रोष व्याप्त है।
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