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आरटीओ के खिलाफ प्रदर्शन
ब्यूरो मिर्जापुर अमर उजाला
Updated Wed, 17 Jun 2015 12:33 AM IST
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मोटर मालिकों ने मंगलवार को दूसरे दिन भी जिला मुख्यालय पर आरटीओ के खिलाफ प्रदर्शन किया। वाहन मालिकों ने कहा कि आरटीओ विभाग भ्रष्ट हो गया है।
आरटीओ की सह पर विभागीय अधिकारी चेकिंग के नाम पर दिन रात वसूली कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्रक भेज कर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आरटीओ चुन्नीलाल की शह पर उनका शोषण किया जा रहा है। नेशनल परमिट बनाने के नाम पर दो हजार तथा फिटनेस के नाम पर पंद्रह सौ रुपये लिए जा रहे हैं।
यूपी परमिट के नाम पर अधिकारी 15 सौ रुपये प्रतिमाह लेते हैं। वहीं बंद गाड़ी को छोड़ने के लिए तीन हजार रुपये मांगे जाते हैं।
अंडर लोड चलने के बावजूद न्यू गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर पांच हजार रुपये लिए जाते हैं जबकि छोटी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के लिए 15 सौ की मांग की जाती है।
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आम जन को ड्राइविंग लाइसेंस आदि बनवाने के लिए दो हजार रुपये लिए जाते हैं।
दफ्तर में बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं किया जाता है। वाहन मालिकों ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री तथा परिवहन आयुक्त से इस पूरे मामले की जांच करा कर कार्रवाई की मांग की है।
इस दौरान जगदीश विश्वकर्मा, पत्तू यादव, पिंटू कुमार, राजू चौबे, रामदेव सरोज, जावेद अंसारी, समेत अन्य वाहन मालिक शामिल रहे।
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आरटीओ की सह पर विभागीय अधिकारी चेकिंग के नाम पर दिन रात वसूली कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्रक भेज कर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आरटीओ चुन्नीलाल की शह पर उनका शोषण किया जा रहा है। नेशनल परमिट बनाने के नाम पर दो हजार तथा फिटनेस के नाम पर पंद्रह सौ रुपये लिए जा रहे हैं।
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यूपी परमिट के नाम पर अधिकारी 15 सौ रुपये प्रतिमाह लेते हैं। वहीं बंद गाड़ी को छोड़ने के लिए तीन हजार रुपये मांगे जाते हैं।
अंडर लोड चलने के बावजूद न्यू गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर पांच हजार रुपये लिए जाते हैं जबकि छोटी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के लिए 15 सौ की मांग की जाती है।
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आम जन को ड्राइविंग लाइसेंस आदि बनवाने के लिए दो हजार रुपये लिए जाते हैं।
दफ्तर में बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं किया जाता है। वाहन मालिकों ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री तथा परिवहन आयुक्त से इस पूरे मामले की जांच करा कर कार्रवाई की मांग की है।
इस दौरान जगदीश विश्वकर्मा, पत्तू यादव, पिंटू कुमार, राजू चौबे, रामदेव सरोज, जावेद अंसारी, समेत अन्य वाहन मालिक शामिल रहे।