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Mirzapur News: सीवर-पानी के लिए खोद दीं सड़कें और गलियां, बनाने में लापरवाही
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मिर्जापुर। सीवर लाइन और पेयजल की पाइप लाइन बिछाने के लिए नगर की सड़कों व गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया है। काम पूरा होने के बाद भी कई इलाकों में इनकी मरम्मत नहीं कराई गई। कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के कारण बरसात में लोगों को जलभराव और कीचड़ से मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।
वर्ष 2021 में अमृत योजना के तहत 210 करोड़ के बजट से सीवर लाइन का काम शुरू कराया गया था। काम पूरा करने की अंतिम तिथि 30 जून तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है। नगर की 203 किलोमीटर सड़कों को खोदकर पाइप लाइनें बिछाई गई। इसमें 198 किमी लंबी सड़कें तो बन गई हैं लेकिन जो बाद में खोदी गई थीं, उनकी मरम्मत नहीं कराई गई।
नगर के नटवां, मिल्लत नगर, कृष्णानगर, अनगढ़ और पुरानी दशमी की पतली गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया है। पाइप लाइन बिछाने के बाद मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। मानसून के दस्तक देने के बाद इन इलाकों की गलियों और सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। इससे बरसात में जलभराव और कीचड़ से लोगों को जूझना पड़ेगा। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक मो. अयाज का कहना है कि जो सड़कें खोदी गई हैं, उन सभी का निर्माण कराया जाएगा। बताया कि 15 दिन के अंदर सड़क बना दी जाती है। पाइप लाइन बिछाने और खोदी गईं सड़कों की मरम्मत का क्रम चल रहा है।
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नटवां में होती है जलभराव की समस्या
नगर के नटवा ओवरब्रिज के पास एक-दो घंटे की तेज बारिश होने पर जलभराव हो जाता है। यही स्थित विंध्याचल के पटेंगरा नाला के पास होती है। इन जगहों पर पंप लगाकर पानी निकालना पड़ता है। नगर पालिका इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं करा पा रही है। नटवां में वाटर हार्रवेस्टिंग प्लांट भी लगवाया गया है लेकिन इससे भी समस्या का निदान नहीं हो रहा।
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वर्ष 2021 में अमृत योजना के तहत 210 करोड़ के बजट से सीवर लाइन का काम शुरू कराया गया था। काम पूरा करने की अंतिम तिथि 30 जून तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है। नगर की 203 किलोमीटर सड़कों को खोदकर पाइप लाइनें बिछाई गई। इसमें 198 किमी लंबी सड़कें तो बन गई हैं लेकिन जो बाद में खोदी गई थीं, उनकी मरम्मत नहीं कराई गई।
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नगर के नटवां, मिल्लत नगर, कृष्णानगर, अनगढ़ और पुरानी दशमी की पतली गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया है। पाइप लाइन बिछाने के बाद मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। मानसून के दस्तक देने के बाद इन इलाकों की गलियों और सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। इससे बरसात में जलभराव और कीचड़ से लोगों को जूझना पड़ेगा। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक मो. अयाज का कहना है कि जो सड़कें खोदी गई हैं, उन सभी का निर्माण कराया जाएगा। बताया कि 15 दिन के अंदर सड़क बना दी जाती है। पाइप लाइन बिछाने और खोदी गईं सड़कों की मरम्मत का क्रम चल रहा है।
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नटवां में होती है जलभराव की समस्या
नगर के नटवा ओवरब्रिज के पास एक-दो घंटे की तेज बारिश होने पर जलभराव हो जाता है। यही स्थित विंध्याचल के पटेंगरा नाला के पास होती है। इन जगहों पर पंप लगाकर पानी निकालना पड़ता है। नगर पालिका इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं करा पा रही है। नटवां में वाटर हार्रवेस्टिंग प्लांट भी लगवाया गया है लेकिन इससे भी समस्या का निदान नहीं हो रहा।