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बाढ़ से राहत अब कटान को लेकर लोगों की बढ़ी चिंता
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मिर्जापुर। खतरा निशान 77.724 मीटर पार कर 78.350 मीटर तक जलस्तर पहुंचा गंगा का जलस्तर शुक्रवार को प्रति घंटे चार सेंटीमीटर की रफ्तार से घट रहा है। शाम चार बजे तक गंगा का जलस्तर 77.89 मीटर रहा। बाढ़ से लोगों को राहत तो मिला लेकिन अब गंगा के तटवर्ती इलाको कटान का खतरा बढ़ गया है। पानी घटने के चलते कुछ मार्गो पर आवागमन शुरु हो गया लेकिन अब भी सैकड़ों गांव बाढ़ के पानी से घिरे होने के चलते सड़को और पुल-पुलियों पर पानी भरा होने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जिगना, गंगानदी का पानी घटने से प्रभावित गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन गंगा के किनारे बसे गांवों में हरगढ़, गोगांव, बीजर, झिलवर, आदमपुर, अर्जुनपुर, नौगांव, असवा में कटान का खतरा बढ़ गया है। कर्णावती नदी से छनवर में पानी भर जाने से किसानो की धान, अरहर, मूंग, उरद, ज्वार, मूंगफली, तिल व सब्जी सहित अन्य फसलें डूब कर नष्ट हो गई। खम्हरिया कला के किसान पन्ना लाल पटेल ने बताया कि खम्हरिया, रैपुरी, गोडसर, नौगांव, नीबीगहरवार, बिरौरा गांव में काफी फसलें बर्बाद हुई है। गंगानदी के किनारे बसे गांव चेहरा, देवरी, मुतलिखके गौरा, बजटा, काशीसरपत्ती, हरगढ़, भौरुपुर पुर, साटनपट्टी, गोगांव, खैरा, बसेवरा, मिश्रपुर, नगवासी, घुघुटी, दुगौली, कोठरा, डंगहर, परमानपुर गौरा, चडैचा, असवा, बीजर, झिलवर, नीबीगहरवार, आदमपुर, अर्जुनपुर, नौगांव, नदिनी, कुरौठी, बभनी, निफरा, भैदपुर, जोपा, थानीपट्टी, दत्तीपट्टी, सुपंथा, उंचडीह, अधवार, तिलई, बबुरा व अकोढ़ी आदि गांव में पानी घुसने के साथ ही फसल बर्बाद हो रही हैं। सीखड़, स्थानीय विकास खंड में बाढ़ का पानी घटने के चलते ग्रामीणों ने राहत की सांस ली लेकिन बर्बाद हुए फसलों को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ गयी हैं। पशुओं के चारे का संकट छाया हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी तक चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। चील्ह, तेजी से गंगा का पानी घटने के बावजूद दर्जनों गांव अब भी पानी से घिरे हुए हैं। राहत न मिलने से कई परिवार संकट से जूझ रहे हैं। कई गांवों में बाढ़ का पानी लगा होने से भीषण दुर्गंध उठ रही है जिससे लोगों का एक पल ठहरना मुश्किल हो गया है।
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जिगना, गंगानदी का पानी घटने से प्रभावित गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन गंगा के किनारे बसे गांवों में हरगढ़, गोगांव, बीजर, झिलवर, आदमपुर, अर्जुनपुर, नौगांव, असवा में कटान का खतरा बढ़ गया है। कर्णावती नदी से छनवर में पानी भर जाने से किसानो की धान, अरहर, मूंग, उरद, ज्वार, मूंगफली, तिल व सब्जी सहित अन्य फसलें डूब कर नष्ट हो गई। खम्हरिया कला के किसान पन्ना लाल पटेल ने बताया कि खम्हरिया, रैपुरी, गोडसर, नौगांव, नीबीगहरवार, बिरौरा गांव में काफी फसलें बर्बाद हुई है। गंगानदी के किनारे बसे गांव चेहरा, देवरी, मुतलिखके गौरा, बजटा, काशीसरपत्ती, हरगढ़, भौरुपुर पुर, साटनपट्टी, गोगांव, खैरा, बसेवरा, मिश्रपुर, नगवासी, घुघुटी, दुगौली, कोठरा, डंगहर, परमानपुर गौरा, चडैचा, असवा, बीजर, झिलवर, नीबीगहरवार, आदमपुर, अर्जुनपुर, नौगांव, नदिनी, कुरौठी, बभनी, निफरा, भैदपुर, जोपा, थानीपट्टी, दत्तीपट्टी, सुपंथा, उंचडीह, अधवार, तिलई, बबुरा व अकोढ़ी आदि गांव में पानी घुसने के साथ ही फसल बर्बाद हो रही हैं। सीखड़, स्थानीय विकास खंड में बाढ़ का पानी घटने के चलते ग्रामीणों ने राहत की सांस ली लेकिन बर्बाद हुए फसलों को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ गयी हैं। पशुओं के चारे का संकट छाया हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी तक चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। चील्ह, तेजी से गंगा का पानी घटने के बावजूद दर्जनों गांव अब भी पानी से घिरे हुए हैं। राहत न मिलने से कई परिवार संकट से जूझ रहे हैं। कई गांवों में बाढ़ का पानी लगा होने से भीषण दुर्गंध उठ रही है जिससे लोगों का एक पल ठहरना मुश्किल हो गया है।
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