राम मंदिर का आकर्षण बढ़ाएंगे शक्ति धाम के गुलाबी पत्थर, 40 करोड़ के पत्थरों के आपूर्ति की तैयारी
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विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं का हिस्सा मिर्जापुर इलाके के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल प्राचीन काल से होता आया है। इसकी गुणवत्ता और सुंदरता को देखते हुए अयोध्या में बने रहे श्रीराम मंदिर में भी इनका इस्तेमाल हो सकता है।
राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों की खदानों से निकलने वाले उप खनिजों पर भरतपुर जिला प्रशासन की रोक के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की नजर अहरौरा व चुनार के गुलाबी पत्थरों पर है।
इन पत्थरों का सैंपल परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। पत्थरों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यहां के पत्थर निर्माण में इस्तेमाल किए जाएंगे। मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को साढ़े चार लाख घन फीट से भी ज्यादा गुलाबी पत्थरों की आवश्यकता है। एनजीटी की टीम ने सोमवार की देर शाम खनन इलाके के पत्थर कटर प्लांट के व्यवसायियों से मुलाकात की। इसके पूर्व भी मंदिर निर्माण ट्रस्ट की ओर से पत्थरों के सैंपल लिए गए हैं।
पत्थरों कीे निर्धारित दर के अनुसार तकरीबन चालीस करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो 60 मीटर गहरी नींव के ऊपरी सतह पर 1200 पिलर पायलिंग करके तैयार किए जाने की योजना है। लगभग ढाई एकड़ क्षेत्र में एक लाख पांच हजार 147 वर्ग फीट क्षेत्रफल पर पिलर लगाए जाने हैं।
एनजीटी तथा निर्माण इकाई से जुड़े ट्रस्ट के लोगों ने बताया कि पत्थर की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जा रहा है। आपूर्ति की तय समय सीमा के भीतर गुलाबी पत्थर मिल पाने की संभावना कठिन है, परंतु कोशिश लगातार की जा रही है। गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मांग के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
मजबूती और रंग की वजह से है मांग
कटर प्लांट संचालकों ने बताया कि अहरौरा के गुलाबी पत्थरों की क्वालिटी पिंक सैंड स्टोन के मामले में काफी अच्छी रही है। इसका रंग कभी अपनी सुंदरता नहीं खोता है। पूर्व में किले की दीवार और महलों के निर्माण में उपयोग किया जाता रहा है। नक्काशी के उभार में भी इन पत्थरों का अपना विशेष महत्व है।
इनमें आसानी से नक्काशी की जा सकती है। इन पत्थरों में अत्याधिक भार सहन करने की क्षमता है। भारी दबाव के बावजूद इन पर भार का कोई असर नहीं होता है। कारोबारियों ने राम मंदिर निर्माण के लिए अहरौरा इलाके से गुलाबी पत्थर की आपूर्ति करना गौरव की बात बताया।
फिर भी पत्थरों को लेकर हैं कुछ दिक्कतें
वैज्ञानिक परीक्षण के बाद अहरौरा के गुलाबी पत्थर चयनित हुए तो पहले चरण में दो फीट व्यास वाले चार फीट लंबे पत्थर की आपूर्ति की जानी है। मुलायम पत्थरों की दरकार होगी जिन पर नक्काशी के सहारे विभिन्न शैलियों को जीवंत किया जा सके। पिलर निर्माण में रंगों की समानता का विशेष ख्याल रखने की अनिवार्यता होगी।
पहाड़ियों से निकलने वाले पत्थरों की एकरंगता हो पाना मुश्किल है। अलग-अलग पहाड़ियों से एक रंग का पत्थर निकलना तो दूर की बात है एक ही पहाड़ी से एक ही रंग का पत्थर निकलना भी कठिन है परंतु रंगों की समानता तथा परीक्षण का विशेष ख्याल रखे जाने की अनिवार्यता रहेगी।