{"_id":"aa3a1495081869a079fde39e8211e72f","slug":"picnic-spots-are-not-necessarily-facilities-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिकनिक स्पॉट पर नहीं हैं जरूरी सुविधाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिकनिक स्पॉट पर नहीं हैं जरूरी सुविधाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Fri, 01 Jan 2016 02:09 AM IST
विज्ञापन
विंध्य पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित जनपद मिर्जापुर पर्यटन के लिए देश के कोने-कोने में जाना जाता है, लेकिन यहां के प्रमुख पर्यटन केंद्र दुर्व्यवस्थाओं का दंश झेल रहे हैं।
विभागीय लापरवाही सैलानियों पर भारी पड़ रही है। नये साल पर भी हजारों की संख्या में पर्यटक पिकनिक स्पॉटों पर पहुंचेंगे, जहां उन्हें बदइंतजामी से दो चार होना पड़ेगा।
अहरौरा स्थित पिकनिक स्पॉट लखनिया दरी हो या लालगंज का कुशियरा फाल या फिर सक्तेशगढ़ स्थित सिद्घनाथ की दरी। कहीं भी पर्यटकों के लिए सुविधाएं नहीं हैँ। यहां न तो यात्री विश्राम गृह है और न ही साफ-सफाई एवं पेयजल की कोई व्यवस्था। सड़कें अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही हैं, वहीं पार्किंग प्रबंध नहीं होने से वाहनों की चोरी होना आम बात है।
विज्ञापन
जल प्रपात स्थलों पर सुरक्षा-व्यवस्था नहीं होने से अब तक कई सैलानी अपनी जान तक गंवा चुके हैं, बावजूद इसके महकमा लापरवाह बना हुआ है। जंगलों के गर्भ में बसा अहरौरा स्थित लखनिया दरी की प्राकृतिक छटा जनपद में अपना विशेष महत्व रखती है। डेढ़ किलोमीटर तक फैले इस जल प्रपात में सैलानियों के लिए न तो मार्ग है और न ही यात्री विश्राम गृह। पेयजल और पार्क का भी घोर अभाव है।
प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने लखनिया दरी की भौगोलिक संरचना का जायजा लिया था और सालभर में विशेष पैकेज देकर यहां सारी सुविधाएं बहाल करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन नतीजा सिफर है। जल प्रपात के चारों तरफ सुुरक्षा सूचक यंत्र, पुल और जल प्रपात के अचानक बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षा प्रबंध होने चाहिए।
विज्ञापन
विभागीय लापरवाही सैलानियों पर भारी पड़ रही है। नये साल पर भी हजारों की संख्या में पर्यटक पिकनिक स्पॉटों पर पहुंचेंगे, जहां उन्हें बदइंतजामी से दो चार होना पड़ेगा।
विज्ञापन
अहरौरा स्थित पिकनिक स्पॉट लखनिया दरी हो या लालगंज का कुशियरा फाल या फिर सक्तेशगढ़ स्थित सिद्घनाथ की दरी। कहीं भी पर्यटकों के लिए सुविधाएं नहीं हैँ। यहां न तो यात्री विश्राम गृह है और न ही साफ-सफाई एवं पेयजल की कोई व्यवस्था। सड़कें अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही हैं, वहीं पार्किंग प्रबंध नहीं होने से वाहनों की चोरी होना आम बात है।
विज्ञापन
जल प्रपात स्थलों पर सुरक्षा-व्यवस्था नहीं होने से अब तक कई सैलानी अपनी जान तक गंवा चुके हैं, बावजूद इसके महकमा लापरवाह बना हुआ है। जंगलों के गर्भ में बसा अहरौरा स्थित लखनिया दरी की प्राकृतिक छटा जनपद में अपना विशेष महत्व रखती है। डेढ़ किलोमीटर तक फैले इस जल प्रपात में सैलानियों के लिए न तो मार्ग है और न ही यात्री विश्राम गृह। पेयजल और पार्क का भी घोर अभाव है।
प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने लखनिया दरी की भौगोलिक संरचना का जायजा लिया था और सालभर में विशेष पैकेज देकर यहां सारी सुविधाएं बहाल करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन नतीजा सिफर है। जल प्रपात के चारों तरफ सुुरक्षा सूचक यंत्र, पुल और जल प्रपात के अचानक बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षा प्रबंध होने चाहिए।