{"_id":"5730e41c4f1c1b4335919aee","slug":"peace-is-possible-through-our-ancient-culture","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘सनातन संस्कृति से ही विश्व में है शांति’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘सनातन संस्कृति से ही विश्व में है शांति’
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Tue, 10 May 2016 12:55 AM IST
विज्ञापन
ब्राह्मण समाज कल्याण समिति की ओर से परशुराम जयंती मनाई गई। इसमें मौजूद अतिथि।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सनातन संस्कृति के बल पर ही विश्व में शांति कायम है। हर व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र है। समाज में वर्ण व्यवस्था की जगह जाति व्यवस्था विकृति का परिणाम है। समाज का पुरुष शक्तिशाली तभी बन सकता हैं, जब सभी अंग अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे । यह बातें परशुराम जयंती समारोह के मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पं. शिवजी उपाध्याय ने कही।
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में नारघाट स्थित श्याम उत्सव वाटिका में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति पं. शिवजी उपाध्याय ने कहा कि धरा पर सारे अवतार भगवान ने आर्यावर्त क्षेत्र में असुरों का संहार एवं धर्म की रक्षा के लिए लिया। भगवान के छठे अवतार में उनका नाम माता रेणुका ने राम रखा था। शिव की साधना और तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए और अपना परशु दे दिया। इस प्रकार राम, परशुराम कहे जाने लगे। उनके त्याग और तपस्या को देखते हुए गुरु वशिष्ठ ने दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम रखा था।
एक ने ब्राह्मण जाति के तो दूसरे ने क्षत्रिय वंश में उत्पन्न होकर असुरों का संहार किया। इसके पूर्व समारोह का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। पं. महेश्वपति त्रिपाठी के शिष्यों ने कत्थक नृत्य के माध्यम गणेश और सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। समारोह के विशिष्ट अतिथि आईपीएस जुगुल किशोर तिवारी ने कहा कि समाज में बदलाव की बयार बह रही हैं, इसमें अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए जागरूकता के साथ एकजुटता आवश्यक हैं। विशिष्ट अतिथि डा. प्रभुनाथ द्विवेदी ने सम्मान से अभीभूत होकर कहा कि जनपद में मेरा सम्मान ब्राह्मण समाज का सम्मान है ।
विज्ञापन
समस्या हर समाज में हैं, इसका निराकरण धर्मपथ पर चलकर ही किया जा सकता है। कार्यक्रम संयोजक डा. नीरज त्रिपाठी ने आरक्षण के नाम पर प्रतिभाओं के दमन को समाज हित में घातक बताया। प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश नाथ द्विवेदी ने संगठन के विस्तार और एकता पर जोर दिया। इस दौरान एएसपी नक्सल अरविंद मिश्र, एसपी सिटी डीपी शुक्ल, नारायण जी उपाध्याय, आद्या प्रसाद तिवारी, गोवर्धन त्रिपाठी, डा. एसएन पाठक, अमरेश मिश्र, शशांक शेखर चतुर्वेदी, सच्चिदानंद तिवारी, चुनमुन शुक्ल, ज्ञानशंकर पांडेय, लल्लू तिवारी आदि ने भी अपने विचार रखे।
नगर के विभिन्न वार्ड के संयोजकों का परिचय संगठन सचिव विष्णु मालवीय व संस्था का प्रगति रिपोर्ट महासचिव अश्वनी त्रिपाठी तथा अभिनंदन पत्र का वाचन शिव प्रसाद दिवेदी ने किया। स्वागत शिवशंकर पांडेय तथा संचालन अरविंद अवस्थी ने किया। संस्था के जिलाध्यक्ष डा. गणेश प्रसाद अवस्थी ने संस्था के उद्देश्यों प्रकाश डालते हुए आभार व्यक्त किया। इस दौरान रत्नाकर मिश्र, आरपी ओझा, श्याम नारायण तिवारी, गंगासागर दूबे, बालेंदु मणि त्रिपाठी, यशवीर सहित तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में नारघाट स्थित श्याम उत्सव वाटिका में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति पं. शिवजी उपाध्याय ने कहा कि धरा पर सारे अवतार भगवान ने आर्यावर्त क्षेत्र में असुरों का संहार एवं धर्म की रक्षा के लिए लिया। भगवान के छठे अवतार में उनका नाम माता रेणुका ने राम रखा था। शिव की साधना और तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए और अपना परशु दे दिया। इस प्रकार राम, परशुराम कहे जाने लगे। उनके त्याग और तपस्या को देखते हुए गुरु वशिष्ठ ने दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम रखा था।
विज्ञापन
एक ने ब्राह्मण जाति के तो दूसरे ने क्षत्रिय वंश में उत्पन्न होकर असुरों का संहार किया। इसके पूर्व समारोह का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। पं. महेश्वपति त्रिपाठी के शिष्यों ने कत्थक नृत्य के माध्यम गणेश और सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। समारोह के विशिष्ट अतिथि आईपीएस जुगुल किशोर तिवारी ने कहा कि समाज में बदलाव की बयार बह रही हैं, इसमें अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए जागरूकता के साथ एकजुटता आवश्यक हैं। विशिष्ट अतिथि डा. प्रभुनाथ द्विवेदी ने सम्मान से अभीभूत होकर कहा कि जनपद में मेरा सम्मान ब्राह्मण समाज का सम्मान है ।
विज्ञापन
समस्या हर समाज में हैं, इसका निराकरण धर्मपथ पर चलकर ही किया जा सकता है। कार्यक्रम संयोजक डा. नीरज त्रिपाठी ने आरक्षण के नाम पर प्रतिभाओं के दमन को समाज हित में घातक बताया। प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश नाथ द्विवेदी ने संगठन के विस्तार और एकता पर जोर दिया। इस दौरान एएसपी नक्सल अरविंद मिश्र, एसपी सिटी डीपी शुक्ल, नारायण जी उपाध्याय, आद्या प्रसाद तिवारी, गोवर्धन त्रिपाठी, डा. एसएन पाठक, अमरेश मिश्र, शशांक शेखर चतुर्वेदी, सच्चिदानंद तिवारी, चुनमुन शुक्ल, ज्ञानशंकर पांडेय, लल्लू तिवारी आदि ने भी अपने विचार रखे।
नगर के विभिन्न वार्ड के संयोजकों का परिचय संगठन सचिव विष्णु मालवीय व संस्था का प्रगति रिपोर्ट महासचिव अश्वनी त्रिपाठी तथा अभिनंदन पत्र का वाचन शिव प्रसाद दिवेदी ने किया। स्वागत शिवशंकर पांडेय तथा संचालन अरविंद अवस्थी ने किया। संस्था के जिलाध्यक्ष डा. गणेश प्रसाद अवस्थी ने संस्था के उद्देश्यों प्रकाश डालते हुए आभार व्यक्त किया। इस दौरान रत्नाकर मिश्र, आरपी ओझा, श्याम नारायण तिवारी, गंगासागर दूबे, बालेंदु मणि त्रिपाठी, यशवीर सहित तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।