{"_id":"587e682c4f1c1bfb18efe575","slug":"patna-hyderabad-spread-between-businesses","type":"story","status":"publish","title_hn":"पटना, हैदराबाद के बीच फैला कारोबार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पटना, हैदराबाद के बीच फैला कारोबार
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Wed, 18 Jan 2017 12:23 AM IST
विज्ञापन
नलकूप के झेरे से निकालने के बाद पिंजरे में कैद जंगली बिल्ली
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बिहार और बंगाल के जंगलों से पकड़ कर दुर्लभ वन्य जीवों को हैदराबाद और कोलकाता पहुंचाया जाता है। इसका केंद्र पटना है, जहां से कोलकाता और हैदराबाद में जंगली जानवरों की सप्लाई की जाती है। कोलकाता और हैदराबाद में इसका बड़ा बाजार है। पिछले दिनों भरुहना के पास दुर्लभ काली जंगली बिल्लियों (कराकल) और तेंदुए के बच्चे के पकड़े गए तस्करों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बिहार, हैदराबाद और कोलकाता में इसके नेटवर्क खंगालने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उनके पास इसके काफी सबूत भी एकत्रित हुए हैं।
पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि पकड़े गए वन्य जीव तस्करों से मिले इनपुट के आधार पर बिहार की राजधानी पटना और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पुलिस टीम भेजी गई थी। पुलिसकर्मियों ने तस्करों से जानवरों का खरीददार बनकर मुलाकात की। उनसे तस्करी के नेटवर्क के बारे में पता लगाया।
उन्होंने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के जंगलों से पकड़े गए वन्य जीवों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इनको पकड़ने वाला पूरा रैकेट इलाके में काम कर रहा है। कुछ वनकर्मियों से भी उनकी मिलीभगत हो सकती है। इस रैकेट के बारे में किसी को भी पूरी जानकारी नहीं है। हर व्यक्ति का काम बंटा हुआ है। गिरोह बडे़ से बड़े सदस्य को भी मात्र कुछ फीसदी जानकारी ही होती है। कोलकाता में इसका हब बनाया गया है। पटना में भी रंग बिरंगे पंक्षियों की बिक्री की आड़ में जंगली जानवरों के खरीद बिक्री का खेल फलफूल रहा है। जानवरों की तस्करी कर हैदराबाद ले जाया जाता है जहां से निकटवर्ती बंदरगाह से पानी के जहाज से अन्य देशों में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि इस खेल के पीछे लगे लोगों की पहचान की जा रही है। प्रदेश के पुलिस मुख्यालय तक इसकी पूरी जानकारी दे कर इस नेटवर्क को ध्वस्त करने की मंशा पुलिस की है।
पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि पकड़े गए वन्य जीव तस्करों से मिले इनपुट के आधार पर बिहार की राजधानी पटना और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पुलिस टीम भेजी गई थी। पुलिसकर्मियों ने तस्करों से जानवरों का खरीददार बनकर मुलाकात की। उनसे तस्करी के नेटवर्क के बारे में पता लगाया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के जंगलों से पकड़े गए वन्य जीवों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इनको पकड़ने वाला पूरा रैकेट इलाके में काम कर रहा है। कुछ वनकर्मियों से भी उनकी मिलीभगत हो सकती है। इस रैकेट के बारे में किसी को भी पूरी जानकारी नहीं है। हर व्यक्ति का काम बंटा हुआ है। गिरोह बडे़ से बड़े सदस्य को भी मात्र कुछ फीसदी जानकारी ही होती है। कोलकाता में इसका हब बनाया गया है। पटना में भी रंग बिरंगे पंक्षियों की बिक्री की आड़ में जंगली जानवरों के खरीद बिक्री का खेल फलफूल रहा है। जानवरों की तस्करी कर हैदराबाद ले जाया जाता है जहां से निकटवर्ती बंदरगाह से पानी के जहाज से अन्य देशों में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि इस खेल के पीछे लगे लोगों की पहचान की जा रही है। प्रदेश के पुलिस मुख्यालय तक इसकी पूरी जानकारी दे कर इस नेटवर्क को ध्वस्त करने की मंशा पुलिस की है।
विज्ञापन