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बच्चों के सामने मोबाइल फोन कम चलाएं अभिभावक : डॉ. अशोक परासर

Sun, 08 Feb 2026 12:39 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 12:39 AM IST
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Parents should use mobile phones less in front of children: Dr. Ashok Parasar
बदलती जीवन शैली, सोशल मीडिया की लत लगने से लोग मानसिक विकार शिकार हो जा रहे हैं। लोगों की सोचने की क्षमता और दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। गाजियाबाद में तीन बहनों के छत से कूदकर जान देने से अभिभावक भी चिंतित है। मनोचिकित्सक अभिभावकों को बच्चों के सामने मोबाइल का उपयोग नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। फोन में गेम डाऊनलोड न करें, बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव बताने का सुझाव दे रहे हैं।
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महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के मानसिक विभाग के ओपीडी में मोबाइल एडिक्शन के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। मनो चिकित्सकों का कहना है कि बिना काम के 30 मिनट से अधिक समय तक मोबाइल फोन का उपयोग करना बीमारी है। जिला के नैदानिक मनोवैज्ञानिक एवं इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल साॅयकोलोजी के ऑल इंडिया कॉउंसिल मेंबर डॉ. अशोक परासर ने बताया कि मानसिक बीमारी गंभीर समस्या नहीं है, इससे घबराने की जरुरत नहीं है। बस सही समय पर दवा शुरू कर दें। देश में मोबाइल एडिक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। टोल फ्री नंबर है, 24 घंटे इस संपर्क किया जा सकता है। मरीजों का काउंसिलिंग भी की जाती है। तकनीकी के दौर में स्मार्ट फोन अच्छा है, लेकिन उपयोग समय पर करनी चाहिए। जिन बच्चों में मोबाइल की लत लगी है, उनके सामने अभिभावक फोन पर अधिक समय तक व्यस्त न रहे। धीरे धीरे उनकी आदत छूट जाएगी। जिला चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव पांडेय ने बताया कि 14416 टोल फ्री नंबर है। इस पर 24 घंटे सेवा है। जहां विशेषज्ञ फोन पर ही काउंसिलिंग करते हैं। जरुरत पड़ने पर नजदीकी मनकक्ष पर संपर्क करने की नसीहत भी दी जाती है।
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केस 1 : चार साल की बेटी मोबाइल बहुत देखती थी, बिना मोबाइल के दूध नहीं पीती थी, न कुछ खाती थी। जिला चिकित्सालय के मनकक्ष में दिखाया, काउंसिलिंग के बाद बेटी अब ज्यादा मोबाइल नहीं देखती है। -विनय सरोज नेवादा
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केस 2 : पांच से छह घंटे तक मोबाइल देखता था, आंख से धुंधला दिखने लगा। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया, अब जरुरत पर ही मोबाइल का उपयोग करता हूं। अब किसी तरह की दिक्कत नहीं है। अमित राव ज्ञानपुर

इनसेट:
इन बातों का रखे ध्यान:
- बच्चाें के सामने मोबाइल का उपयोग ज्यादा समय तक न करें
- अभिभावक बच्चों के लिए टीवी, लैपटाॅप, मोबाइल का समय तय करे
- बच्चों को अकेले में मोबाइल लैपटाॅप कतई न देखने दें
- बच्चों के तनाव और व्यवहार में बदलाव होने पर तुरंत काउंसिलिंग कराए
- फोन में गेम डाऊनलोड न करें, बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बताए
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