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ऑक्सीजन के बेड फुल, तीन दिन से नहीं भर्ती हुए मरीज
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मिर्जापुर। कोविड संक्रमण के चलते इस समय सांस रोगियों की संख्या में इजाफा हो गया है। कोविड के गंभीर मरीज को एल-टू अस्पताल में भर्ती हैं, पर सांस लेने में परेशानी होने पर कोविड संदिग्ध मरीजों को मंडलीय अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। जहां उनका कोविड टेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद पाजिटिव आने पर ही एल-टू में भर्ती किया जा रहा है। एल-टू के अस्पताल में वेंटीलेटर और मंडलीय अस्पताल के सभी वार्डों में लगे ऑक्सीजन बेड पूरी तरह से फुल हो गए हैं। इस कारण पिछले तीन दिनों से कोई भी मरीज भर्ती नहीं हो पा रहा है। जिससे ऑक्सीजन के अभाव में लोगों की जान जा रही है।
इस बार के कोविड संक्रमण में सांस फूूलने और ऑक्सीजन की कमी के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं। कोविड के अन्य लक्षण खांसी बुखार वाले मरीज तो होम आइसोलेशन में हैं, पर जिन लोगों को ऑक्सीजन आदि की कमी है या वे गंभीर है, उनको ट्रामा सेंटर के एल-टू अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है, पर जिन मरीजों का कोविड रिपोर्ट नहीं आया है। वे सांस फूलने और ऑक्सीजन की कमी होने पर मंडलीय अस्पताल आ रहे है।
मंडलीय अस्पताल में यह है स्थिति
मंडलीय अस्पताल की हालत ये है कि यहां पर ऑक्सीजन का बेड खाली नहीं है। मंडलीय अस्पताल में 200 से अधिक बेड हैं। इसमें सर्जिकल वार्ड में ऑक्सीजन के 12, मेडिकल वार्ड में ऑक्सीजन के 18, महिला वार्ड में ऑक्सीजन के 18 बेड है। इमरजेंसी, चिल्ड्रेन वार्ड आदि मिलाकर मंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन के कुल 70 बेड उपलब्ध हैं। सभी बेड फुल हैं। इस कारण पिछले तीन दिनों से मंडलीय अस्पताल में किसी भी सांस फूलने या ऑक्सीजन की कमी वाले मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है। एल-टू में अभी 50 बेड का है। 50 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। एल-टू में अभी 30 मरीज भर्ती हैं, इसमें वेंटीलेकर के सभी 18 बेड फुल है। मंडलीय अस्पताल में आने वाले लोगों को अंयत्र रेफर किया जा रहा है। भर्ती न होने से लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। इस बीच ऑक्सीजन की कमी से कई लोग दम तोड़ चुके है।
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इमरजेंसी में ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर के सहारे मरीज
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में इस समय ऑक्सीजन के सारे बेड फुल हो गए हैं। जिससे जो मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं, उनको बिजली से ऑक्सीजन निर्मित करने वाली मशीन ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर के सहारे लोगों को आक्सजीन दिया जा रहा है। इसमें लगे कनेक्शन से एक से दो लोगों को आक्सजीन दिया जा रह है। इस बीच अन्य सांस के मरीज आ रहे हैं, इससे समस्या उत्पन्न हो रही है। दूसरे मरीज आने पर अन्य लोगों को हटाना पड़ रहा है।
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इस बार के कोविड संक्रमण में सांस फूूलने और ऑक्सीजन की कमी के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं। कोविड के अन्य लक्षण खांसी बुखार वाले मरीज तो होम आइसोलेशन में हैं, पर जिन लोगों को ऑक्सीजन आदि की कमी है या वे गंभीर है, उनको ट्रामा सेंटर के एल-टू अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है, पर जिन मरीजों का कोविड रिपोर्ट नहीं आया है। वे सांस फूलने और ऑक्सीजन की कमी होने पर मंडलीय अस्पताल आ रहे है।
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मंडलीय अस्पताल में यह है स्थिति
मंडलीय अस्पताल की हालत ये है कि यहां पर ऑक्सीजन का बेड खाली नहीं है। मंडलीय अस्पताल में 200 से अधिक बेड हैं। इसमें सर्जिकल वार्ड में ऑक्सीजन के 12, मेडिकल वार्ड में ऑक्सीजन के 18, महिला वार्ड में ऑक्सीजन के 18 बेड है। इमरजेंसी, चिल्ड्रेन वार्ड आदि मिलाकर मंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन के कुल 70 बेड उपलब्ध हैं। सभी बेड फुल हैं। इस कारण पिछले तीन दिनों से मंडलीय अस्पताल में किसी भी सांस फूलने या ऑक्सीजन की कमी वाले मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है। एल-टू में अभी 50 बेड का है। 50 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। एल-टू में अभी 30 मरीज भर्ती हैं, इसमें वेंटीलेकर के सभी 18 बेड फुल है। मंडलीय अस्पताल में आने वाले लोगों को अंयत्र रेफर किया जा रहा है। भर्ती न होने से लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। इस बीच ऑक्सीजन की कमी से कई लोग दम तोड़ चुके है।
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इमरजेंसी में ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर के सहारे मरीज
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में इस समय ऑक्सीजन के सारे बेड फुल हो गए हैं। जिससे जो मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं, उनको बिजली से ऑक्सीजन निर्मित करने वाली मशीन ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर के सहारे लोगों को आक्सजीन दिया जा रहा है। इसमें लगे कनेक्शन से एक से दो लोगों को आक्सजीन दिया जा रह है। इस बीच अन्य सांस के मरीज आ रहे हैं, इससे समस्या उत्पन्न हो रही है। दूसरे मरीज आने पर अन्य लोगों को हटाना पड़ रहा है।