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Mirzapur News: 150 बीघा भूमि से जुड़े पुराने पट्टे होंगे निरस्त, नोटिस
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लालगंज। धसड़ा गांव में करीब 150 बीघा भूमि से जुड़े पुराने पट्टों को निरस्त करने की नोटिस जारी होने से किसानों में हड़कंप मचा है। किसानों ने इसे गलत कार्रवाई बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।
धसड़ा गांव में साल 2015 से चकबंदी की कार्रवाई चल रही है। चक का निर्माण और पैमाइश पूरी होने के बाद अब चार दर्जन पट्टाधारक किसानों को नोटिस जारी कर पुराने पट्टे खारिज करने की सूचना दी गई है। चकबंदी विभाग का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है। आदेश के अनुसार जिन भूमियों का उल्लेख खसरा संख्या 1359 में जमींदारी उन्मूलन अधिनियम की धारा 132 और राजस्व संहिता की धारा 77 के अंतर्गत आता है वे पट्टे निरस्त किए जाएंगे। वहीं, किसानों का कहना है कि साल 1985 में ग्राम समाज की बंजर भूमि अनुसूचित जाति के गरीब भूमिहीन किसानों को पट्टे के रूप में दी गई थी। तब से वे किसान उसी भूमि पर खेती करते हुए मकान बनाकर रह रहे हैं। किसानों का आरोप है कि विभाग ने बिना सही परीक्षण के भूमि को खारिज करने का नोटिस भेज दिया है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि श्रेणी-5 कृषि योग्य बंजर के रूप में दर्ज है। जो धारा 77 के तहत नहीं आती है। किसानों ने आशंका जताई है कि विभाग लगभग 150 बीघा कृषि योग्य भूमि को अन्य बंजर खाते में दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल जिलाधिकारी के निर्देश पर चकबंदी अधिकारी लालगंज की ओर से पत्रावली तैयार कर किसानों को नोटिस भेजा जा रहा हैं। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं, चकबंदी के एसओसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि जमीन का प्रमाण दें, पट्टा खारिज नहीं होगा।
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धसड़ा गांव में साल 2015 से चकबंदी की कार्रवाई चल रही है। चक का निर्माण और पैमाइश पूरी होने के बाद अब चार दर्जन पट्टाधारक किसानों को नोटिस जारी कर पुराने पट्टे खारिज करने की सूचना दी गई है। चकबंदी विभाग का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है। आदेश के अनुसार जिन भूमियों का उल्लेख खसरा संख्या 1359 में जमींदारी उन्मूलन अधिनियम की धारा 132 और राजस्व संहिता की धारा 77 के अंतर्गत आता है वे पट्टे निरस्त किए जाएंगे। वहीं, किसानों का कहना है कि साल 1985 में ग्राम समाज की बंजर भूमि अनुसूचित जाति के गरीब भूमिहीन किसानों को पट्टे के रूप में दी गई थी। तब से वे किसान उसी भूमि पर खेती करते हुए मकान बनाकर रह रहे हैं। किसानों का आरोप है कि विभाग ने बिना सही परीक्षण के भूमि को खारिज करने का नोटिस भेज दिया है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि श्रेणी-5 कृषि योग्य बंजर के रूप में दर्ज है। जो धारा 77 के तहत नहीं आती है। किसानों ने आशंका जताई है कि विभाग लगभग 150 बीघा कृषि योग्य भूमि को अन्य बंजर खाते में दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल जिलाधिकारी के निर्देश पर चकबंदी अधिकारी लालगंज की ओर से पत्रावली तैयार कर किसानों को नोटिस भेजा जा रहा हैं। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं, चकबंदी के एसओसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि जमीन का प्रमाण दें, पट्टा खारिज नहीं होगा।
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