{"_id":"634dadf4bf0b6d3101435d25","slug":"no-arrangement-in-cow-shelters-to-protect-animals-from-cold-mirzapur-news-vns6795633154","type":"story","status":"publish","title_hn":"पशुओं को ठंड से बचाने के लिए गोआश्रय स्थलों में व्यवस्था नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पशुओं को ठंड से बचाने के लिए गोआश्रय स्थलों में व्यवस्था नहीं
विज्ञापन
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड शुरू हो गई है। रात में हल्की ठंड लगने के बावजूद जिले के स्थायी व अस्थायी गोआश्रय स्थलों में गोवंश को ठंड से बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जिले में तीन स्थायी व 22 अस्थायी गोआश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें से पटेहरा कला, हलिया के उमरिया व पहाड़ी विकास खंड के सिंधोरा में स्थायी गोआश्रय स्थल हैं। इन गोआश्रय स्थलों में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। पटेहरा कला स्थित आश्रय स्थल करीब 400 गोवंश रखे गए हैं। इन पशुओं के ळिए 80 क्विंटल भूसा गोदाम में रखा हुआ है। पशुओं को ठंड से बचाव के लिए अभी तक यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
हलिया विकास खंड के उमरिया स्थित पशु आश्रय स्थल में 300 गोवंश हैं। इनके लिए 70 क्विंटल भूसा गोदाम में रखा गया है। इसी तरह से गौरवा में 195 पशु तथा 25 क्विंटल भूसा, हलिया में 195 पशु व 20 क्विंटल भूसा, गलरा में 244 पशु व 200 क्विंटल भूसा, हथेड़ा में 64 पशु व 13 क्विंटल भूसा उपलब्ध है। यहां भी ठंड से बचाव के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
जिगना विकास खंड के रसौली व नीबीगहरवार में पशु आश्रय स्थल है। जहां ठंड से बचाव के लिए प्लास्टिक की व्यवस्था है तथा मवेशियों को धूप में रहने की व्यवस्था भी है। लालगंज क्षेत्र के बामी व उसरी खम्हरिया स्थित गोवंश आश्रय स्थल में पशुओं को ठंड से बचाव के लिए त्रिपाल की व्यवस्था की गई है। बामी में 414 गोवंश व उसरी खम्हरिया स्थित अस्थायी आश्रय स्थल में कुल 204 गोवंश मौजूद हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ईश्वर देव नारायण चतुर्वेदी ने बताया कि ठंड के मौसम में गोवंश को सुरक्षित रहने के उपाय के बारे में गोपालकों को प्रशिक्षित कर जरूरी जानकारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में पशु विभाग एलएसडी (लंपी स्किन डिजिज) से बचाव के लिए पशुओं के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। विभाग की तरफ से पांच लाख 11 हजार लक्ष्य की तुलना में दो लाख 70 हजार गोवंश का टीकाकरण कर लिया गया है। पशुओं को ठंड से बचाव की भी तैयारी की जा रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. केएन कुशवाहा ने बताया कि पशुओं को ठंड से बचाव के लिए भी तैयारी की जा रही हैं। जूट के बोरे गोवंश को ओढ़ाए जाएंगे और आश्रय स्थलों में जूट के पर्दे लटकाने की व्यवस्था की जा रही है।
विज्ञापन
जिले में तीन स्थायी व 22 अस्थायी गोआश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें से पटेहरा कला, हलिया के उमरिया व पहाड़ी विकास खंड के सिंधोरा में स्थायी गोआश्रय स्थल हैं। इन गोआश्रय स्थलों में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। पटेहरा कला स्थित आश्रय स्थल करीब 400 गोवंश रखे गए हैं। इन पशुओं के ळिए 80 क्विंटल भूसा गोदाम में रखा हुआ है। पशुओं को ठंड से बचाव के लिए अभी तक यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
हलिया विकास खंड के उमरिया स्थित पशु आश्रय स्थल में 300 गोवंश हैं। इनके लिए 70 क्विंटल भूसा गोदाम में रखा गया है। इसी तरह से गौरवा में 195 पशु तथा 25 क्विंटल भूसा, हलिया में 195 पशु व 20 क्विंटल भूसा, गलरा में 244 पशु व 200 क्विंटल भूसा, हथेड़ा में 64 पशु व 13 क्विंटल भूसा उपलब्ध है। यहां भी ठंड से बचाव के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
जिगना विकास खंड के रसौली व नीबीगहरवार में पशु आश्रय स्थल है। जहां ठंड से बचाव के लिए प्लास्टिक की व्यवस्था है तथा मवेशियों को धूप में रहने की व्यवस्था भी है। लालगंज क्षेत्र के बामी व उसरी खम्हरिया स्थित गोवंश आश्रय स्थल में पशुओं को ठंड से बचाव के लिए त्रिपाल की व्यवस्था की गई है। बामी में 414 गोवंश व उसरी खम्हरिया स्थित अस्थायी आश्रय स्थल में कुल 204 गोवंश मौजूद हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ईश्वर देव नारायण चतुर्वेदी ने बताया कि ठंड के मौसम में गोवंश को सुरक्षित रहने के उपाय के बारे में गोपालकों को प्रशिक्षित कर जरूरी जानकारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में पशु विभाग एलएसडी (लंपी स्किन डिजिज) से बचाव के लिए पशुओं के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। विभाग की तरफ से पांच लाख 11 हजार लक्ष्य की तुलना में दो लाख 70 हजार गोवंश का टीकाकरण कर लिया गया है। पशुओं को ठंड से बचाव की भी तैयारी की जा रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. केएन कुशवाहा ने बताया कि पशुओं को ठंड से बचाव के लिए भी तैयारी की जा रही हैं। जूट के बोरे गोवंश को ओढ़ाए जाएंगे और आश्रय स्थलों में जूट के पर्दे लटकाने की व्यवस्था की जा रही है।