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साढ़े नौ हजार बीघा जमीन राज्य सरकार के खाते में दर्ज
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मड़िहान। उभ्भा कांड के बाद कृषि संबंधी सरकारी जमीनों की हेराफेरी की जांच में कई मामले खुले। इसी तरह से एसआईटी की जांच में गोपलपुर संयुक्त सहकारी कृषि समिति का मामला भी खुला है। कृषि संबंधी साढ़े नौ हजार बीघे की हेराफेरी की जांच के बाद इसपर सरकारी कब्जे की तैयारी चल रही। जांच के बाद यह जमीन अपना सरकारी खाते में दर्ज कर दी गई है। तहसील अधिकारियों के अनुसार उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश की समय सीमा समाप्त होते ही जमीन पर से समिति का कब्जा हटा दिया जाएगा।
बता दें कि शासन से गठित एसआईटी टीम की जांच में जमीन अभिलेखों से छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आने पर समिति के 42 सदस्यों पर बुधवार को धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। समिति की ओर से विक्रय की गई 212 बीघे जमीन का दाखिल-खारिज भी निरस्त कर दिया गया है। जांच के बाद सरकारी कब्जे के विरोध में समिति की ओर से अदालत में स्टे भी लिया गया था। हालांकि न्यायालय के स्टे आदेश के तहत अब पूरी जमीन पर कोई भी कार्य नहीं होगा। इस संबंध में तहसीलदार नूपुर सिंह ने बताया कि स्थगन आदेश के निरस्तीकरण के लिए पैरवी की जा रही है। समय समाप्त होते ही जमीन कब्जे में ले ली जाएगी। गौरतलब है कि पटेहरा कला स्थित दीपनगर मौजा में 148 बीघे सोसाइटी के नाम जमीन की जांच महीनों तक की गई। जांच में समिति के निष्क्रिय मिलने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि जमीन से कब्जा हटाया जाएगा। राजस्व कर्मियों की मेहरबानी से सार्वजनिक जमीन पर दुकान बनाकर किराया वसूलने का मामला प्रकाश में आया है।
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बता दें कि शासन से गठित एसआईटी टीम की जांच में जमीन अभिलेखों से छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आने पर समिति के 42 सदस्यों पर बुधवार को धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। समिति की ओर से विक्रय की गई 212 बीघे जमीन का दाखिल-खारिज भी निरस्त कर दिया गया है। जांच के बाद सरकारी कब्जे के विरोध में समिति की ओर से अदालत में स्टे भी लिया गया था। हालांकि न्यायालय के स्टे आदेश के तहत अब पूरी जमीन पर कोई भी कार्य नहीं होगा। इस संबंध में तहसीलदार नूपुर सिंह ने बताया कि स्थगन आदेश के निरस्तीकरण के लिए पैरवी की जा रही है। समय समाप्त होते ही जमीन कब्जे में ले ली जाएगी। गौरतलब है कि पटेहरा कला स्थित दीपनगर मौजा में 148 बीघे सोसाइटी के नाम जमीन की जांच महीनों तक की गई। जांच में समिति के निष्क्रिय मिलने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि जमीन से कब्जा हटाया जाएगा। राजस्व कर्मियों की मेहरबानी से सार्वजनिक जमीन पर दुकान बनाकर किराया वसूलने का मामला प्रकाश में आया है।
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