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न ओपीडी की सुविधा न कोविड मरीज ही हो रहे भर्ती
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मिर्जापुर। पंचायत चुनाव के चलते ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना का संक्रमण शहर से चार गुना अधिक है, फिर भी ग्रामीण क्षेत्र में मरीजों की स्वास्थ्य सुविधा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले के मंडलीय अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी, पीएचसी पर ओपीडी बंद कर दिया गया है। सिर्फ इमरजेंसी सेवा चालू है। जिसमें एक डाक्टर और कुछ स्टाफ रहते हैं। ओपीडी सेवा बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। जबकि ग्रामीण इलाकों से कोरोना संक्रमित अधिक मिल रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए निजी कोविड केयर अस्पताल के अलावा चुनार और मड़िहान सीएचसी को कोविड अस्पताल बनाया गया, पर वहां पर आज तक कोई भी कोविड मरीज भर्ती नहीं हो सका। वहां जो भी कोविड मरीज या लक्षण वाला मरीज आता है, उसे मंडलीय अस्पताल भेज दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोविड अस्पताल का सही ढंग से संचालन हो तो जिले के अस्पताल पर भी लोड कम रहे।
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नहीं भर्ती किया गया एक भी कोविड मरीज
मड़िहान। मड़िहान ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमितों के बढ़ने पर सुविधा के लिए शासन स्थानीय कस्बा स्थित सीएचसी को 50 बेड का अस्पताल बना दिया गया, लेकिन सुविधाएं नहीं है। गम्भीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए चिकित्सक को मंडलीय अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र के रामपुर 33 गांव निवासिनी व जग्गनपुर निवासी कोरोना पाजिटिव होने पर बृहस्पतिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान पहुंचे थे। आक्सीजन सिलेंडर के अभाव में दोनों मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया, जबकि इसके पूर्व खंतरा गांव निवासी दो लोगों का इलाज मड़िहान में हुआ और ठीक होने पर दोनों को अस्पताल से छुट्टी दी गयी। अधीक्षक डाक्टर कौशल कुमार मौर्य ने बताया कि पांच आक्सीजन कंसट्रेटर मिला लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर एक भी नहीं आया है। ऐसी स्थिति में गंम्भीर मरीजों को रोकना खतरे से खाली नहीं होगा। राजगढ़, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इमरजेंसी में एक चिकित्सक एक कंपाउंडर की व्यवस्था की गई है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र के हर अस्पताल में ऐसी ही सुविधा है।
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निजी अस्पताल में भी नहीं हो रहे भर्ती
कछवां। सीएससी पर तीस बेड की सुविधा हैं, पर वहा भी कोविड मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं उपलब्ध हैं। पास ही कछवां कृश्चियन हॉस्पिटल हैं। वहां पर 15 बेड और वेंटीलेटर मशीन है। जो कोविड केयर अस्पताल है, पर यहां भी कोविड के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है, सिर्फ कोविड लक्षण वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही हैं।
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अभी नहीं बना है कोविड अस्पताल
चुनार। चेचरी मोड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तीस बेड का अस्पताल है। जिसे 50 बेड का कोविड अस्पताल बनाया जाना था, पर वहां कोविड अस्पताल की अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय कुमार ने बताया कि पर्याप्त बेड व छह आक्सीजन कंस्ट्रेटर मौजूद है। आवश्यकता को देखते हुए तत्काल सेवा शुरू कर दी जाएगी, अभी कोई मरीज नहीं आया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डां संतोष वर्मा व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक राजेश यादव ने बताया कि केन्द्र पर इमरजेंसी में चिकित्सक अपनी सेवा दे रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी-पीएचसी पर जांच और टीकाकरण की सुविधा है। शासन के आदेश पर ओपीडी बंद है। इमरजेंसी सेवा जारी है। कोविड मरीजों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निजी कोविड केयर अस्पताल है। इसके अलावा चुनार और मड़िहन सीएचसी में कोविड अस्पताल बनाया गया है।
- डा. पीडी गुप्ता, सीएमओ
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ग्रामीण इलाकों में कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए निजी कोविड केयर अस्पताल के अलावा चुनार और मड़िहान सीएचसी को कोविड अस्पताल बनाया गया, पर वहां पर आज तक कोई भी कोविड मरीज भर्ती नहीं हो सका। वहां जो भी कोविड मरीज या लक्षण वाला मरीज आता है, उसे मंडलीय अस्पताल भेज दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोविड अस्पताल का सही ढंग से संचालन हो तो जिले के अस्पताल पर भी लोड कम रहे।
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नहीं भर्ती किया गया एक भी कोविड मरीज
मड़िहान। मड़िहान ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमितों के बढ़ने पर सुविधा के लिए शासन स्थानीय कस्बा स्थित सीएचसी को 50 बेड का अस्पताल बना दिया गया, लेकिन सुविधाएं नहीं है। गम्भीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए चिकित्सक को मंडलीय अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र के रामपुर 33 गांव निवासिनी व जग्गनपुर निवासी कोरोना पाजिटिव होने पर बृहस्पतिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान पहुंचे थे। आक्सीजन सिलेंडर के अभाव में दोनों मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया, जबकि इसके पूर्व खंतरा गांव निवासी दो लोगों का इलाज मड़िहान में हुआ और ठीक होने पर दोनों को अस्पताल से छुट्टी दी गयी। अधीक्षक डाक्टर कौशल कुमार मौर्य ने बताया कि पांच आक्सीजन कंसट्रेटर मिला लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर एक भी नहीं आया है। ऐसी स्थिति में गंम्भीर मरीजों को रोकना खतरे से खाली नहीं होगा। राजगढ़, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इमरजेंसी में एक चिकित्सक एक कंपाउंडर की व्यवस्था की गई है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र के हर अस्पताल में ऐसी ही सुविधा है।
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निजी अस्पताल में भी नहीं हो रहे भर्ती
कछवां। सीएससी पर तीस बेड की सुविधा हैं, पर वहा भी कोविड मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं उपलब्ध हैं। पास ही कछवां कृश्चियन हॉस्पिटल हैं। वहां पर 15 बेड और वेंटीलेटर मशीन है। जो कोविड केयर अस्पताल है, पर यहां भी कोविड के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है, सिर्फ कोविड लक्षण वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही हैं।
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अभी नहीं बना है कोविड अस्पताल
चुनार। चेचरी मोड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तीस बेड का अस्पताल है। जिसे 50 बेड का कोविड अस्पताल बनाया जाना था, पर वहां कोविड अस्पताल की अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय कुमार ने बताया कि पर्याप्त बेड व छह आक्सीजन कंस्ट्रेटर मौजूद है। आवश्यकता को देखते हुए तत्काल सेवा शुरू कर दी जाएगी, अभी कोई मरीज नहीं आया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डां संतोष वर्मा व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक राजेश यादव ने बताया कि केन्द्र पर इमरजेंसी में चिकित्सक अपनी सेवा दे रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी-पीएचसी पर जांच और टीकाकरण की सुविधा है। शासन के आदेश पर ओपीडी बंद है। इमरजेंसी सेवा जारी है। कोविड मरीजों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निजी कोविड केयर अस्पताल है। इसके अलावा चुनार और मड़िहन सीएचसी में कोविड अस्पताल बनाया गया है।
- डा. पीडी गुप्ता, सीएमओ