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Mirzapur News: एक लाख से अधिक लोगों ने शीश नवाया

Sat, 13 Jul 2024 04:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2024 04:06 AM IST
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More than one lakh people bowed their heads
विंध्याचल (मिर्जापुर)। गुप्त नवरात्र की सप्तमी तिथि पर शुक्रवार को मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कुल एक लाख से अधिक लोगों ने शीश नवाया। भोर में मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन शुरू हो गया। शंख, घंटा और नगाड़े के बीच माता के जयकारे से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। मां विंध्यवासिनी मंदिर की छत पर जनेऊ और बच्चों के मुंडन संस्कार हुए।
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पहले भक्तों ने विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचकर स्नान किया। उसके बाद नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी, रक्षा आदि लेकर मां के दरबार पहुंचे। यहां दर्शन-पूजन कर सुख व समृद्धि की कामना की। किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। इसके बाद मंदिर परिसर में विराजमान, मां काली, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, मां दुर्गा, मां शीतला, राधा-कृष्ण, श्री पंचमुखी महादेव, दक्षिणमुखी हनुमान, बटूक भैरव आदि मंदिरों में मत्था टेका। इस दौरान नई वीआईपी, पुरानी वीआईपी मार्ग के साथ बच्चा पाठक की गली, थाना गली, पक्काघाट गली, जैपुरिया गली भक्तों से पटी रही।
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मिर्जापुर। गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष गुप्त नवरात्र आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा, 6 जुलाई से शुरू होकर आषाढ़ शुक्ल दशमी, 16 जुलाई तक चलेगी। इसमें नवमी तिथि 15 जुलाई को है। इसी दिन गुप्त नवरात्र की साधना, अनुष्ठान के हवन पूजन होंगे। आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया कि गुप्त नवरात्र के दौरान तंत्र विद्या का विशेष महत्व होता है। साधक अपने गुरु के मार्गदर्शन में इसकी साधना करते हैं। मिठ्ठू मिश्रा ने बताया कि मां तारा और त्रिकोण शक्तियों की उपस्थिति विंध्याचल को दस महाविद्याओं का प्रमुख केंद्र और सिद्धपीठ बनाती है। इस कारण साधक यहां जुटते हैं।
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मिर्जापुर। शास्त्रों के अनुसार, ऋषि विश्वामित्र और महर्षि वशिष्ठ ने दस महाविद्याओं की सिद्धि प्राप्त करने के लिए बहुत प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद गुप्त नवरात्र में साधना कर ऋषि विश्वामित्र ने अद्वितीय शक्तियां प्राप्त की थीं। रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्र में साधना की थी।
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