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काकोरी के शहीदो के नाम पर रखा जाए मोहल्लों का नाम
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मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश अधिवक्ता संघर्ष समिति के सदस्यों ने शनिवार को काकोरी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद अंग्रेजों के नाम पर पड़े वर्तमान मोहल्लों का नाम बदल कर काकोरी के शहीदों के नाम करने के लिए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष राजकुमार पांडेय ने कहा कि 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी रोककर क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूटा था। बाद में अनेक क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी हुई। चार क्रांतिकारियों राजिंद्रनाथ लहिड़ी, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह को फांसी दी गई। जिला उपाध्यक्ष ओमकार नाथ पटेल ने कहा कि अंग्रेजी शासकों ने गुलामों की मानसिकता को बनाए रखने के लिए नौकरशाहों के नाम पर देश के अनेक मोहल्लों, रास्तों व संस्थाओं का नाम रखा। लेकिन अब इन्हें बदलने की जरूरत है। काकोरी के नायकों के नाम पर इन मोहल्लों का नाम रखा जाए। कहा कि वासलीगंज का नाम पंडित राम प्रसाद बिस्मिल नगर, डंकीनगंज का नाम ठाकुर रोशन सिंह नगर, सिविल लाइंस का नाम अशफाक उल्ला खां नगर, आवास विकास कालोनी का नाम राजेंद्र नाथ लाहिड़ी नगर रखा जाए। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह, बार के अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा, सचिव सत्य प्रकाश गुप्त, विकास सिंह, लालजी सिंह, दीनदयाल यादव आदि रहे।
अमर शहीदों को श्रद्धांजलि और कवि सम्मेलन 20 को
मिर्जापुर। अमर शहीदों की स्मृति में नारघाट स्थित शहीद उद्यान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम और कवि सम्मेलन 20 दिसंबर को आयोजित होगा।
नौ अगस्त 1925 को काकोरी कांड में रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और अशफाक उल्ला खाँ को फांसी की सजा हुई थी। 17 दिसंबर 1927 को सबसे पहले गोंडा जेल में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को फांसी दी गयी। 19 दिसंबर 1927 को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में फांसी दी गयी। ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद में फांसी दी गयी और अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में फांसी दी गयी। इन क्रांतिकारियों की स्मृति में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। शहीद उद्यान प्रबंध समिति के अध्यक्ष शिवलाल अवस्थी ने यह जानकारी दी है। कार्यक्रम के संयोजक साहित्यकार भोलानाथ कुशवाहा हैं।
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जिलाध्यक्ष राजकुमार पांडेय ने कहा कि 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी रोककर क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूटा था। बाद में अनेक क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी हुई। चार क्रांतिकारियों राजिंद्रनाथ लहिड़ी, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह को फांसी दी गई। जिला उपाध्यक्ष ओमकार नाथ पटेल ने कहा कि अंग्रेजी शासकों ने गुलामों की मानसिकता को बनाए रखने के लिए नौकरशाहों के नाम पर देश के अनेक मोहल्लों, रास्तों व संस्थाओं का नाम रखा। लेकिन अब इन्हें बदलने की जरूरत है। काकोरी के नायकों के नाम पर इन मोहल्लों का नाम रखा जाए। कहा कि वासलीगंज का नाम पंडित राम प्रसाद बिस्मिल नगर, डंकीनगंज का नाम ठाकुर रोशन सिंह नगर, सिविल लाइंस का नाम अशफाक उल्ला खां नगर, आवास विकास कालोनी का नाम राजेंद्र नाथ लाहिड़ी नगर रखा जाए। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह, बार के अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा, सचिव सत्य प्रकाश गुप्त, विकास सिंह, लालजी सिंह, दीनदयाल यादव आदि रहे।
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अमर शहीदों को श्रद्धांजलि और कवि सम्मेलन 20 को
मिर्जापुर। अमर शहीदों की स्मृति में नारघाट स्थित शहीद उद्यान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम और कवि सम्मेलन 20 दिसंबर को आयोजित होगा।
नौ अगस्त 1925 को काकोरी कांड में रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और अशफाक उल्ला खाँ को फांसी की सजा हुई थी। 17 दिसंबर 1927 को सबसे पहले गोंडा जेल में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को फांसी दी गयी। 19 दिसंबर 1927 को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में फांसी दी गयी। ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद में फांसी दी गयी और अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में फांसी दी गयी। इन क्रांतिकारियों की स्मृति में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। शहीद उद्यान प्रबंध समिति के अध्यक्ष शिवलाल अवस्थी ने यह जानकारी दी है। कार्यक्रम के संयोजक साहित्यकार भोलानाथ कुशवाहा हैं।
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