मिर्जापुर: कोर्ट ने सीओ को गिरफ्तार कर पेश करने के दिए आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला
मिर्जापुर के अहरौरा क्षेत्र में 2010 में हत्या कर शव को छिपाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसकी विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष और वर्तमान में सीओ तिर्वा कन्नौज दीपक दुबे ने की थी। उनके साक्ष्य के लिए जून 2017 से कार्यवाही लंबित है। अब तक 42 बार वारंट/नोटिस जारी हो चुका है।
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मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष और वर्तमान में सीओ तिर्वा कन्नौज दीपक दुबे को न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम वायुनंदन मिश्र ने गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही उनके वेतन से 100 रुपये अर्थदंड की राशि काटकर न्यायालय में जमा कराने का आदेश दिया है।
अहरौरा क्षेत्र में 2010 में हत्या कर शव को छिपाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसकी विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष दीपक दुबे ने की थी। इस समय दीपक दुबे कन्नौज के तिर्वा में सीओ हैं। दीपक दुबे के साक्ष्य के लिए जून 2017 से कार्यवाही लंबित है। इसके बाद भी साक्षी न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे। लखनऊ में कार्यरत रहने के दौरान 42 बार वारंट/नोटिस जारी हुआ।
हाईकोर्ट द्वारा मामले का शीघ्र निस्तारण का निर्देश
2017 से 2019 तक लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा सात बार न्यायालय को पत्र लिखकर कानून व्यवस्था और संवेदनशील ड्यूटी में व्यस्तता के आधार पर साक्षी के उपस्थित न होने का कारण बताया। जब हाईकोर्ट द्वारा मामले का शीघ्र निस्तारण का निर्देश दिया गया तो न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम वायुनंदन मिश्र ने पुलिस अधीक्षक कन्नौज को सीओ तिर्वा दीपक दुुबे के वेतन से 100 रुपये कटौती कर पत्र मिलने के 20 दिन में कोर्ट में अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया।
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कोषाधिकारी कन्नौज को आदेशित किया कि वेतन से 100 रुपये अर्थदंड की धनराशि की निकासी न होने दें। साक्षी दीपक दुबे पर पुन: गैर जमानती नोटिस जारी कर पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत रुचि लेकर साक्षी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष उपस्थित करने का निर्देश दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश ने आदेश में साक्षी दीपक दुबे को 12 नंवबर 2021 तक पेश करने का आदेश दिया है। आदेश में कहा है कि 12 नंवबर को पेश न होने पर न्यायालय के आदेश की अवमानना की कार्रवाई मानते हुए प्रकरण पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक कन्नौज के खिलाफ उच्च न्यायालय को प्रेषित किया जाएगा।
अपर सत्र न्यायाधीश वायु नंदन मिश्र ने आदेश में बताया कि यह मामला इस न्यायालय के प्राचीनतम पत्रावली की श्रेणी में आता है। इसमें पांच साक्षी परीक्षित हो चुके हैं। सिर्फ दीपक दुबे का परीक्षण होने के बाद यह केस अंतिम निस्तारण के करीब होगा। इस पत्रावली के शीघ्र निस्तारण का निर्देश उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है। एक्शन प्लान के तहत निस्तारित होने योग्य पत्रावलियों की सूची में भी यह प्रकरण शीर्ष पर है।
'पुलिस अधीक्षक की संवेदनहीनता और अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा'
अपर सत्र न्यायाधीश ने आदेश में लिखा कि 42 बार वारंट जारी होने के बाद भी साक्षी उपस्थित नहीं हुआ। पुलिस अधीक्षकों द्वार उसको साक्ष्य के लिए उपस्थित कराने के बजाए उसे न्यायालय में अनुपस्थित रहने से संरक्षण देना लखनऊ के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व कन्नौज के वर्तमान पुलिस अधीक्षक की संवेदनहीनता और अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।
पुलिस अधीक्षकों के हठधर्मिता के कारण 53 माह से साक्ष्य की कार्यवाही संपादित नहीं हुई है। इस कारण तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व कन्नौज के वर्तमान पुलिस अधीक्षक के खिलाफ यथोचित कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा है।
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