मिर्जापुर नाव हादसाः पांचवें दिन भी लापता 5 लोगों का नहीं चला पता, गंगा में समा चुकी पत्नियों का किया प्रतीकात्मक दाह संस्कार
मिर्जापुर जिले में विंध्याचल धाम के अखाड़ा घाट पर दर्शनार्थियों से भरी नाव डूबने के बाद लापता हुए छह लोगों में से मात्र एक का शव अभी तक बरामद किया गया। घटना में तीन लोगों की पत्नियां नाव सहित पानी में समा गई थी।
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यूपी के मिर्जापुर जिले में विंध्याचल धाम के अखाड़ा घाट पर हुए नाव हादसे के पांचवें दिन लापता परिजनों के न मिलने पर निराश दो लोगों ने अपनी पत्नियों का पुतला बनाकर प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया। वहीं, एक का बिहार के बक्सर में पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया गया। माना जा रहा है कि अंतिम संस्कार करने के बाद परिजन अपने घर वापस लौट सकते हैं।
बीते बुधवार को झारखंड और बिहार के बक्सर से आए जीजा-साले के परिवार के 11 सदस्य, वाहन चालक के साथ नाव से विंध्याचल के अखाड़ा घाट पर पहुंचे थे। वहां से स्नान करने के लिए गंगा पार गए। नाव पर नाविक और फोटोग्राफर भी मौजूद था। वापस लौटते समय नाव गंगा में पलट गई। स्थानीय मल्लाहों ने नाविक, फोटोग्राफर समेत आठ लोगों को बचाया।
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झारखंड और बक्सर से आए परिवार की तीन महिलाएं गुड़िया (28) पत्नी विकास, खुशबू (30) पत्नी राजेश, अनीशा (26) पत्नी दीपक, विकास के दो पुत्र सत्यम (5), शौर्य (3) और दीपक की दो माह की पुत्री, गंगा में लापता हो गईं। एनडीआरएफ, पीएसी फ्लड और एसडीआरएफ की टीम पांच दिनों तक खोजबीन करती रही पर सिर्फ सत्यम का शव बृहस्पतिवार को फतहां घाट पर उतराया मिला। जिसका परिजनों ने चौबे घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया।
घटना के दिन से लेकर रविवार तक तलाशी अभियान में कोई सफलता न मिलने पर थक हारकर विकास, राजेश और दीपक ने अपनी अपनी पत्नियों का पुतला बनाकर सांकेतिक अंतिम संस्कार किया। बक्सर निवासी विकास दो दिन पूर्व ही वापस लौट गए थे। उन्होंने वहीं पर पत्नी गुड़िया का सांकेतिक अंतिम संस्कार कर दिया।
राजेश और दीपक इस आस में रुके थे कि एनडीआरएफ की टीम उनके परिजनों को तलाश लेगी। 100 घंटे से ज्यादा व्यतीत होने के बाद पूर्णरूप से निराश होकर राजेश ने पत्नी खुशबू और दीपक ने पत्नी अनीशा का पुतला बनाकर हादसे वाले अखाड़ा घाट के बगल में ही अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार की कार्रवाई के बाद समस्त पीड़ित व उनके रिश्तेदार विन्ध्याचल धाम से अपनी पत्नी और बच्चों की यादों के साथ घर के लिए रवाना हो सकते हैं।
नहीं थम रहे थे आंसू
जिन हाथों ने मांग में सिंदूर भरा था, आज वही हाथ प्रतीकात्मक पुतले को आग देते समय कांप रहे थे। पिछले पांच दिनों से अपनों के लौटने की आस लिए गंगा की ओर टकटकी लगाने वाली पथरा चुकी आंखें एक बार फिर डबडबा उठीं। उन्हें पत्नियों का अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हुआ। क्रिया कर्म के दौरान घाट पर मौजूद परिजन व स्थानीय लोगों की आंखें भी यह नजारा देख भर आईं। हर कोई तीनों परिवार के गम में दुखी नजर आया।
आखिर कहां गई नाव
खोजबीन में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम रविवार को भी अखाड़ा घाट पर पहुंच कर खोजबीन में जुटी रही। राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने दो घंटे तक घटना स्थल का निरीक्षण किया। आकलन लगाया कि जिस तरीके से नाव गंगा में समाहित हुआ है, उससे यही प्रतीत होता है कि पानी के बहाव के कारण नाव रेत में धस गयी है।
उसके ऊपर रेत जमा हो गयी है, इसलिए नाव का पता नहीं चल पा रहा है। बुधवार को हुई नाव दुर्घटना के पांचवे दिन तक अपने परिजनों के असफल तलाश के पश्चात निराश दो पतियों ने अपनी अपनी पत्नियों के छाया रूपी पुतले का दाह संस्कार घटनास्थल अखाड़ाघाट के समीप ही कर दिया । घटना में तीन लोगों की पत्नियां नाव सहित पानी में समा गई थी।