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Mirzapur News: ढेकवा बांध से 150 मीटर दूर हो रहा खनन, ब्लास्टिंग से क्षेत्र में कंपन

Fri, 21 Nov 2025 01:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 21 Nov 2025 01:36 AM IST
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Mining happening 150 meters from Dhekwa Dam, area shaking due to blasting
अहरौरा क्षेत्र में खनन का दृश्य। स्रोत- सोशल मीडिया
मिर्जापुर। जनपद के खदानों पर सालों से मानकों को दरकिनार करके की जा रही ब्लास्टिंग पर अंकुश नहीं लग रहा है। अब हालात ये है कि ब्लास्टिंग से ढेकवा बांध पर खतरा मंडरा रहा है। बांध से 150 मीटर दूर खनन क्षेत्र है। सिंचाई विभाग खंड चुनार के अधिशासी अभियंता हरिशंकर सिंह ने डीएम पवन कुमार गंगवार को पत्र लिखकर ढेकवा बांध के पास से हो रहे खनन को तत्काल रोकने की मांग की है। जिले 321 खदान है। इसमें 200 से अधिक खदानोें पर ब्लास्टिंग की जाती है। जिले के अहरौरा, चुनार, मड़िहान क्षेत्र के खदानों पर ब्लास्टिंग की जाती है। मानक को दरकिनार कर हैवी ब्लास्टिंग से पत्थर के पहाड़ को खाई में तबदील कर दिया गया है। ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उड़कर रिहायशी इलाकों में गिरते है। इसमें कई घटनाओं में मौत तो कई घायल हो चुके हैं। हादसा होने के बाद कुछ दिन विभाग तेजी दिखाता है, उसके बाद फिर से खदानों पर मनमानी होने लगती है।
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सिंचाई खंड चुनार के अधिशासी अभियंता हरिशंकर सिंह ने जिलाधिकारी को छह नवंबर को पत्र लिखकर बताया था कि सहायक अभियंता व अवर अभियंता ने ढेकवा बांध का निरीक्षण किया था। इस दौरान चुनार के लहौरा में स्वीकृत खनन पट्टा क्षेत्र में खनन के दौरान ब्लास्टिंग की जा रही है। जहां से ढेकवा बांध की दूरी मात्र 150 मीटर है। लहौरा के ग्रामीणों ने बताया कि जब भी ब्लास्टिंग की जाती है तो घरों में कंपन होता है।
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सिंचाई विभाग के आरोप पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है। खनन विभाग पत्र का जवाब पत्र देने की तैयारी में लगा है। हालांंकि धरातल पर अभी भी खनन जारी है। ऐसे में यहां भी सोनभद्र की घटना जैसी पुनरावृत्ति हो सकती है।
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ब्लास्टिंग के दौरान कांप उठती है दीवारें, खौफ में रहते हैं अध्यापक और बच्चे
भावां। राजगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत लहौरा के अतरी मौजा स्थित परिषदीय विद्यालय के ठीक पीछे महीनों से खनन कार्य हो रहा है। माइंस में धमाके से विद्यालय की दीवारें कांप उठती है। इससे अध्यापक और बच्चे खौफ में रहते हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक सियाराम ने बताया कि साल 2006 में विद्यालय का निर्माण हुआ था। यहां 55 बच्चों का नामांकन है। दो अध्यापकों में एक शिक्षामित्र की तैनाती है। ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर छिटककर स्कूल की छत पर गिरते हैं। इस बारे में बीएसए को जानकारी दी गई। कई अभिभावक डर के कारण बच्चों का नाम कटवाकर दूसरे विद्यालय में दाखिला करवा दिए हैं।


केस-वन
अगस्त 2025 में अहरौरा के धूरिया गांव का एक किसान खेत में काम कर रहा था। खदान की ब्लास्टिंग से एक पत्थर उड़कर उनके पैर पर गिरा। इससे वह घायल हो गए।

केस-दो
जुलाई 2023 में अहरौरा के घासीपुर में एक खदान में ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर गिरने से तीन लोग घायल हो गए थे।
केस-तीन
अक्तूबर 2020 में अहरौरा थाना क्षेत्र के बगहिया गांव में एक खदान में विस्फोटक चेक करते समय ब्लास्ट हो गया था। एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई थी।
अहरौरा खदान में डूबने से तीन बच्चों की हुई थी मौत
मिर्जापुर। खदानों पर मनमानी ब्लास्टिंग कर खनन करने के कारण पहाड़ों पर बड़ी-बड़ी खाई बन गई है। बरसात में पानी भर जाता है। खनन पट्टा धारक द्वारा बाड़ा न बनाए जाने के कारण डूबने की घटनाएं होती है। अहरौरा की खदान में डूबने से जुलाई 2020 में अहरौरा के सोनपुर चिरैया पहाड़ी के पास खदान में बकरी चराने घर से जंगल की ओर गए एक परिवार के तीन बच्चे स्नान करते समय डूब गए थे। तीनों बच्चे राधिका (12), खुशबू (5) और काजू (6) की मौत हो गई थी।


शिक्षा विभाग खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक है। रसुख दारों के दबदबे के आगे कोई पीड़ा सुनने को तैयार नहीं। आए दिन हो रहे ब्लास्टिंग से विद्यालय सहित ग्रामीणों को खतरा है।
-कीरत, ग्रामीण
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बच्चे रोज सुबह स्कूल जाते तो जरूर है, परंतु उनके सही सलामत घर लौटने तक चिंता सताती रहती है। कुछ दिन पहले सोनभद्र जिले के ओबरा में खनन के दौरान हुए हादसे से डर बना हुआ है।
-धर्मेंद्र, ग्रामीण।
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ब्लास्टिंग से जहां एक ओर विद्यालय भवन और बस्ती दहल रही है, तो वहीं मानक को ताक पर रखकर संचालित क्रशर प्लांट से निकलने वाले डस्ट से खेती और जनजीवन प्रभावित हो रही है। कई लोग गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुके है।
-सोमारु, ग्रामीण

खनन अधिकारी ने बताया सिंचाई विभाग कमेटी बनाकर कराए जांच
खनन अधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि बांध से 500 मीटर दूर ब्लास्टिंग का मानक रखा गया है। बांध के पास खनन पट्टा के लिए छह सदस्ययी कमेटी बनती है। इसमें खान अधिकारी, डीएफओ, एडीएम, एसडीएम, सिंचाई, प्रदूषण के अधिकारी रहते है। सिंचाई विभाग की एनओसी के बाद ही खनन पट्टा बांध के पास दिया जाता है। लहौरा में 14 खदान को एनओसी स्वीकृत है। एक प्रस्तावित है। सिंचाई विभाग से जो पत्र आया है। उसमें ये नहीं लिखा कि किस पट्टा धारक या गाटा में ब्लास्टिंग से समस्या हो रही है। सिंचाई विभाग की एनओसी के बाद ही खनन पट्टा दिया गया है। ब्लास्टिंग से समस्या है तो सिंचाई विभाग लोग कमेटी बनाकर जांच कर लें या फिर जिलाधिकारी द्वारा कमेटी बनवाकर जांच करा लें। पूर्व में लहौरा में ब्लास्टिंग कराकर जांच की गई थी कि कितनी दूर तक कंपन हो रहा है। इसमें बांध में कोई खतरा नहीं मिला। जरगो बांध के पास ब्लास्टिंग करने में एक पट्टा निरस्त किया गया था। चोरी से खनन करने पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी।



वर्जन
ब्लास्टिंग का आदेश डायरेक्टर जनरल आफ माइंस सेफ्टी से होता है। डीजीएमस के पास पट्टा धारक का आवेदन जाता है। वह बारुद के लाइसेंस धारी को पत्र लिखते है। वहां से ऑर्डर होता है। लाइसेंसधारी और पट्टा धारक की ओर से रखे गए लोगों की निगरानी में विस्फोट होता है। जो बारुद बचता है। उसे भी फार्म भरकर वापस लाइसेंधारी लेकर जाता है। खनन विभाग का काम खनन के क्षेत्र को देखना है कि वह अधिक क्षेत्र में तो नहीं कर रहा है। प्रदूषण के मानक को पूरा कर रहा है या नहीं। मानक पूरा न करने पर कार्रवाई की जाती है।
जितेंद्र सिंह, खनन अधिकारी
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