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Mirzapur News: बंद रहे मेडिकल स्टोर, जन औषधि और अमृत फार्मेसी ने कमी पूरी की
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मंडलीय अस्पताल के सामने बंद मेडिकल स्टोर । स्रोत- संवाद
- फोटो : 1
मिर्जापुर। दवा विक्रेता समिति की ओर से देशव्यापी हड़ताल के तहत बुधवार को दवा व्यवसायियों ने सुबह से ही दुकान बंद रखीं। सुबह दुकान बंद कर व्यवसायी कलेक्ट्रेट पहुंचे।
प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। मेडिकल स्टोर बंद होने के बाद भी अस्पताल के अंदर मिलने वाली दवा के साथ जन औषधि और अमृत फार्मेसी पर दवा मिलने के कारण मरीजों को परेशानी नहीं हुई। अमृत फार्मेसी व जन औषधि पर अन्य दिनों की अपेक्षा पांच से 10 प्रतिशत दवा खरीदार बढ़ गए थे।
मंडलीय अस्पताल के बाहर 12 से अधिक मेडिकल स्टोर की दुकानें बंद रही। अन्य स्थानों पर मेडिकल स्टोर बंद रहे।
मंडलीय अस्पताल में सबसे अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अस्पताल के अंदर भी कुछ दवाएं मिल जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में दो जन औषधि और अमृत फार्मेसी की दुकान होने से समस्या नहीं हुई। शाम को चार बजे के बाद सभी दुकानें खुल गईं। निजी अस्पतालों में स्थित मेडिकल स्टोर की दुकानें खुली रहीं।
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दवा विक्रेता समिति के सचिव संजय गुप्ता ने बताया कि अवैध ई-फार्मेसी और डीप डिस्काउंट से पांच करोड़ दवा विक्रेताओं के आश्रितों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है। देश भर के 12 लाख 40 हजार केमिस्ट ई-फार्मेसी की अनियंत्रित कार्य प्रणाली और शोषणकारी मूल्य निर्धारण के खिलाफ विरोध जताया।
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प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। मेडिकल स्टोर बंद होने के बाद भी अस्पताल के अंदर मिलने वाली दवा के साथ जन औषधि और अमृत फार्मेसी पर दवा मिलने के कारण मरीजों को परेशानी नहीं हुई। अमृत फार्मेसी व जन औषधि पर अन्य दिनों की अपेक्षा पांच से 10 प्रतिशत दवा खरीदार बढ़ गए थे।
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मंडलीय अस्पताल के बाहर 12 से अधिक मेडिकल स्टोर की दुकानें बंद रही। अन्य स्थानों पर मेडिकल स्टोर बंद रहे।
मंडलीय अस्पताल में सबसे अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अस्पताल के अंदर भी कुछ दवाएं मिल जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में दो जन औषधि और अमृत फार्मेसी की दुकान होने से समस्या नहीं हुई। शाम को चार बजे के बाद सभी दुकानें खुल गईं। निजी अस्पतालों में स्थित मेडिकल स्टोर की दुकानें खुली रहीं।
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दवा विक्रेता समिति के सचिव संजय गुप्ता ने बताया कि अवैध ई-फार्मेसी और डीप डिस्काउंट से पांच करोड़ दवा विक्रेताओं के आश्रितों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है। देश भर के 12 लाख 40 हजार केमिस्ट ई-फार्मेसी की अनियंत्रित कार्य प्रणाली और शोषणकारी मूल्य निर्धारण के खिलाफ विरोध जताया।

मंडलीय अस्पताल के सामने बंद मेडिकल स्टोर । स्रोत- संवाद- फोटो : 1