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Mirzapur News: प्रभु राम ने माता सीता के गले में डाली वरमाला, भक्तों ने लगाए जयकारे
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मुहम्मदाबाद की रामलीला मे विवाह के बाद गुरुजनों का अभिवादन करते भगवान श्रीरामचंद्र और माता सीता
श्रीराम लीला समिति की ओर से बृहस्पतिवार की रात श्रीराम विवाह का मंचन किया गया।
रामलीला समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि रामलीला के मंचन की शुरुआत मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा अयोध्या भेजी गई पत्रिका के वाचन से हुई।
भगवान शंकर के पिनाक धनुष के भंजन और सीता स्वयंवर के बाद भेजे गए इस निमंत्रण को पाकर अयोध्या में हर्ष की लहर दौड़ गई। इसके बाद राजा दशरथ गाजे-बाजे और परिजनों के साथ बरात लेकर जनकपुर पहुंचे। प्रभु श्रीराम अपने गुरु महर्षि विश्वामित्र, कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ और परिजनों के साथ रथ पर सवार होकर जब विवाह स्थल के लिए निकले तो पूरा मैदान जयकारों से गूंज उठा।
भगवान राम द्वारा सीता जी के गले में वरमाला डालते ही हर-हर महादेव के घोष से माहौल गूंज उठा। जनकपुर में महिलाओं ने मंगल गीत गाए। जयमाल और सात फेरों के साथ ही आचार्यों ने विधि विधान से विवाह संपन्न कराया। आकाश से देवताओं ने पुष्प वर्षा की।
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रामलीला समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि रामलीला के मंचन की शुरुआत मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा अयोध्या भेजी गई पत्रिका के वाचन से हुई।
भगवान शंकर के पिनाक धनुष के भंजन और सीता स्वयंवर के बाद भेजे गए इस निमंत्रण को पाकर अयोध्या में हर्ष की लहर दौड़ गई। इसके बाद राजा दशरथ गाजे-बाजे और परिजनों के साथ बरात लेकर जनकपुर पहुंचे। प्रभु श्रीराम अपने गुरु महर्षि विश्वामित्र, कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ और परिजनों के साथ रथ पर सवार होकर जब विवाह स्थल के लिए निकले तो पूरा मैदान जयकारों से गूंज उठा।
भगवान राम द्वारा सीता जी के गले में वरमाला डालते ही हर-हर महादेव के घोष से माहौल गूंज उठा। जनकपुर में महिलाओं ने मंगल गीत गाए। जयमाल और सात फेरों के साथ ही आचार्यों ने विधि विधान से विवाह संपन्न कराया। आकाश से देवताओं ने पुष्प वर्षा की।
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